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Covid-19 Bulletin: आपात उपयोग की अनुमति मिलने के 10 दिन के अंदर वैक्सीन लाने को तैयार है सरकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 05 Jan 2021 07:17 PM IST

स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण
– फोटो : एएनआई (फाइल)

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देश में कोविड-19 वैश्विक महामारी की स्थिति को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। यहां स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने बताया कि केंद्र सरकार आपातकालीन उपयोग की अनुमति मिलने के 10 दिन के अंदर वैक्सीन को लाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या अब ढाई लाख से भी कम बची है और इसमें लगातार गिरावट आ रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कोरोना महामारी की देश में सकारात्मकता दर केवल (पॉजिटिविटी रेट) 1.97 फीसदी है।

प्रेस वार्ता में राजेश भूषण ने देश में कोरोना वायरस वैक्सीनेशन (टीकाकरण) कार्यक्रम के संबंध में भी जानकारी दी। राजेश भूषण ने बताया कि देश में चार प्रमुख वैक्सीन स्टोर तैयार किए गए हैं जिन्हें जीएमएसडी नाम दिया गया है। ये स्टोर करनाल, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में स्थित हैं। इसके अलावा टदेश में 37 वैक्सीन स्टोर हैं। इन स्थानों पर बड़ी मात्रा में वैक्सीनों को स्टोर किया जा सकता है और अन्य स्थानों पर वितरित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिन केंद्रों में वैक्सीन का भंडारण किया जाएगा उनकी और टेंपरेचर ट्रैकर्स की डिजिटल तरीके से निगरानी की जाएगी। हमारे देश में एक दशक से भी अधिक समय से ऐसी सुविधा मौजूद है।

कुल सक्रिय मामलों में 44 फीसदी अस्पतालों में
मंत्रालय ने बताया कि कुल सक्रिय मामलों में से 44 फीसदी मरीज अस्पताल में हैं। इनमें मध्यम या गंभीर लक्षण हैं और इन्हें लगातार इलाज और निगरानी की जरूरत है। 56 फीसदी मामलों में बहुत हल्के लक्षण हैं या एसिम्टोमैटिक हैं और इन्हें होम आइसोलेशन में रखा गया है। भूषण ने कहा कि देश में कोविड-19 के मामले में स्वास्थ्य वितरण संरचना (हेल्थ डिलिवरी इन्फ्रा) पर पड़ने वाले भार में कमी आई है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंट लाइन कर्मचारियों को कोविन प्लेटफॉर्म (टीकाकरण के लिए) पर अपना पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि उनका डाटा पहले ही रिकॉर्ड किया जा चुका है।

10 दिन में वैक्सीन लाने के लिए तैयार सरकार
भूषण ने बताया कि आपातकालीन उपयोग की अनुमति मिलने के 10 दिन के अंदर वैक्सीन को लाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अंतिम निर्णय सरकार की ओर से लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि डीजीसीआई ने तीन जनवरी को दो वैक्सीनों (कोविशील्ड और कोवैक्सीन) को आपात उपयोग की मंजूरी दे दी थी। वार्ता में मौजूद रहे आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि औषधि नियामक ने वैक्सीन निर्माताओं से क्लिनिकल ट्रायल मोड के लिए एसओपी और प्रोटोकॉल उपलब्ध कराने को कहा है। इसका मतलब है कि सभी वैक्सीन के लिए अपनी सहमति देंगे। इससे किसी तरह की समस्या सामने नहीं आएगी।

डिजिटल माध्यम से होगा टीकाकरण कार्यक्रम
भूषण ने कहा कि ब्रिटेन में मिले कोरोना वायरस के नए स्वरूप के संदर्भ में हमें देश में अब तक एक जगह संक्रमण के ज्यादा मामले नहीं मिले हैं, जो कि आश्वस्त करने वाली बात है। 71 लोगों को पृथक किया गया जो इस तरह की वैज्ञानिक जांच में हमारी क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कोविन प्लेटफॉर्म हमने भारत में बनाया है लेकिन जो भी देश कोविन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहेंगे भारत सरकार इसमें उनकी मदद करेगी। उन्होंने कहा कि टीकाकरण की पूरी प्रकिया इलेक्ट्रॉनिक रूप से होगी। लाभार्थी को वैक्सीनेशन हुआ ये डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड किया जाएगा और उसे अगली खुराक लेने कब आना है इसकी जानकारी भी उसे डिजिटल माध्यम से मिलेगी।

देश में कोविड-19 वैश्विक महामारी की स्थिति को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। यहां स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने बताया कि केंद्र सरकार आपातकालीन उपयोग की अनुमति मिलने के 10 दिन के अंदर वैक्सीन को लाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या अब ढाई लाख से भी कम बची है और इसमें लगातार गिरावट आ रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कोरोना महामारी की देश में सकारात्मकता दर केवल (पॉजिटिविटी रेट) 1.97 फीसदी है।

प्रेस वार्ता में राजेश भूषण ने देश में कोरोना वायरस वैक्सीनेशन (टीकाकरण) कार्यक्रम के संबंध में भी जानकारी दी। राजेश भूषण ने बताया कि देश में चार प्रमुख वैक्सीन स्टोर तैयार किए गए हैं जिन्हें जीएमएसडी नाम दिया गया है। ये स्टोर करनाल, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में स्थित हैं। इसके अलावा टदेश में 37 वैक्सीन स्टोर हैं। इन स्थानों पर बड़ी मात्रा में वैक्सीनों को स्टोर किया जा सकता है और अन्य स्थानों पर वितरित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिन केंद्रों में वैक्सीन का भंडारण किया जाएगा उनकी और टेंपरेचर ट्रैकर्स की डिजिटल तरीके से निगरानी की जाएगी। हमारे देश में एक दशक से भी अधिक समय से ऐसी सुविधा मौजूद है।

कुल सक्रिय मामलों में 44 फीसदी अस्पतालों में

मंत्रालय ने बताया कि कुल सक्रिय मामलों में से 44 फीसदी मरीज अस्पताल में हैं। इनमें मध्यम या गंभीर लक्षण हैं और इन्हें लगातार इलाज और निगरानी की जरूरत है। 56 फीसदी मामलों में बहुत हल्के लक्षण हैं या एसिम्टोमैटिक हैं और इन्हें होम आइसोलेशन में रखा गया है। भूषण ने कहा कि देश में कोविड-19 के मामले में स्वास्थ्य वितरण संरचना (हेल्थ डिलिवरी इन्फ्रा) पर पड़ने वाले भार में कमी आई है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंट लाइन कर्मचारियों को कोविन प्लेटफॉर्म (टीकाकरण के लिए) पर अपना पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि उनका डाटा पहले ही रिकॉर्ड किया जा चुका है।

10 दिन में वैक्सीन लाने के लिए तैयार सरकार

भूषण ने बताया कि आपातकालीन उपयोग की अनुमति मिलने के 10 दिन के अंदर वैक्सीन को लाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अंतिम निर्णय सरकार की ओर से लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि डीजीसीआई ने तीन जनवरी को दो वैक्सीनों (कोविशील्ड और कोवैक्सीन) को आपात उपयोग की मंजूरी दे दी थी। वार्ता में मौजूद रहे आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि औषधि नियामक ने वैक्सीन निर्माताओं से क्लिनिकल ट्रायल मोड के लिए एसओपी और प्रोटोकॉल उपलब्ध कराने को कहा है। इसका मतलब है कि सभी वैक्सीन के लिए अपनी सहमति देंगे। इससे किसी तरह की समस्या सामने नहीं आएगी।

डिजिटल माध्यम से होगा टीकाकरण कार्यक्रम

भूषण ने कहा कि ब्रिटेन में मिले कोरोना वायरस के नए स्वरूप के संदर्भ में हमें देश में अब तक एक जगह संक्रमण के ज्यादा मामले नहीं मिले हैं, जो कि आश्वस्त करने वाली बात है। 71 लोगों को पृथक किया गया जो इस तरह की वैज्ञानिक जांच में हमारी क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कोविन प्लेटफॉर्म हमने भारत में बनाया है लेकिन जो भी देश कोविन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहेंगे भारत सरकार इसमें उनकी मदद करेगी। उन्होंने कहा कि टीकाकरण की पूरी प्रकिया इलेक्ट्रॉनिक रूप से होगी। लाभार्थी को वैक्सीनेशन हुआ ये डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड किया जाएगा और उसे अगली खुराक लेने कब आना है इसकी जानकारी भी उसे डिजिटल माध्यम से मिलेगी।


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