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coronavirus: निगेटिव एंटीजन पर आरटी-पीसीआर जांच जरूरी

कोरोना का नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी
– फोटो : अमर उजाला

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कोरोना महामारी को तेज होते देख और राज्यों के गलत रवैए के चलते केंद्र सरकार ने कोरोना जांच की प्रक्रिया में बदलाव किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि रैपिड एंटीजन जांच के दौरान निगेटिव मिलने वाले प्रत्येक व्यक्ति की दोबारा से जांच होगी। जांच के लिए आरटी-पीसीआर तकनीक का प्रयोग होगा।

सबक : राज्यों के गलत रवैये की वजह से केंद्र ने कोरोना की जांच के नियमों में किया बदलाव
केंद्र के अनुसार, रैपिड जांच में एक भी व्यक्ति अगर निगेटिव मिलता है तो उसे छोड़ा नहीं जा सकता है। केंद्र ने जांच के नियमों में बदलाव इसलिए भी किया क्योंकि पिछले वर्ष देश के ज्यादातर राज्यों में दिशा निर्देशों का सही पालन नहीं किया था।

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि अब सस्ती जांच का विकल्प ही खत्म हो चुका है। राज्य सरकार चाहें तो रैपिड एंटीजन जांच को बढ़ावा दे सकती है लेकिन प्रत्येक निगेटिव रिपोर्ट की आरटी-पीसीआर जांच भी साथ करानी होगी। यानी अगर देखा जाए तो आगामी दिनों में राज्यों पर कोरोना जांच का दोहरा भार पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कंजूसी भारी पड़ी है।

दिशा-निर्देशों का सही से पालन नहीं
पिछले वर्ष मंत्रालय ने जारी निर्देश में कहा था कि अगर किसी की एंटीजन जांच निगेटिव है। लेकिन उसमें बुखार, शरीर दर्द इत्यादि के लक्षण हैं तो उसकी आरटी-पीसीआर जांच जरूरी है। अगर यह जांच भी निगेटिव आती है तो भी उक्त व्यक्ति को 1 सप्ताह के लिए आइसोलेट करना होगा। इन निर्देशों पर ज्यादातर राज्यों ने ठीक ढंग से काम नहीं किया।

कंजूसी पड़ी भारी, सस्ती जांच का विकल्प खत्म

तमिलनाडु : एंटीजन जांच पर भरोसा नहीं
केंद्र का अध्ययन है कि एक संक्रमित मरीज पर इन राज्यों में 14 से 20 लोग छूटे हो सकते हैं। इसी माह 9 फरवरी तक की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 20.33 करोड़ जांच में 49.06 आरटी-पीसीआर व 47.88 प्रतिशत एंटीजन जांच हुई हैं। तमिलनाडु एक ऐसा राज्य जहां एंटीजन जांच पर भरोसा नहीं किया गया। 1.57 करोड़ सैंपल में से सिर्फ 0.13 रैपिड जांच हुई है। राजस्थान 0.29 व लक्षद्वीप 0.35 प्रतिशत एंटीजन जांच हुई है।

कोरोना महामारी को तेज होते देख और राज्यों के गलत रवैए के चलते केंद्र सरकार ने कोरोना जांच की प्रक्रिया में बदलाव किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि रैपिड एंटीजन जांच के दौरान निगेटिव मिलने वाले प्रत्येक व्यक्ति की दोबारा से जांच होगी। जांच के लिए आरटी-पीसीआर तकनीक का प्रयोग होगा।

सबक : राज्यों के गलत रवैये की वजह से केंद्र ने कोरोना की जांच के नियमों में किया बदलाव

केंद्र के अनुसार, रैपिड जांच में एक भी व्यक्ति अगर निगेटिव मिलता है तो उसे छोड़ा नहीं जा सकता है। केंद्र ने जांच के नियमों में बदलाव इसलिए भी किया क्योंकि पिछले वर्ष देश के ज्यादातर राज्यों में दिशा निर्देशों का सही पालन नहीं किया था।

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि अब सस्ती जांच का विकल्प ही खत्म हो चुका है। राज्य सरकार चाहें तो रैपिड एंटीजन जांच को बढ़ावा दे सकती है लेकिन प्रत्येक निगेटिव रिपोर्ट की आरटी-पीसीआर जांच भी साथ करानी होगी। यानी अगर देखा जाए तो आगामी दिनों में राज्यों पर कोरोना जांच का दोहरा भार पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कंजूसी भारी पड़ी है।

दिशा-निर्देशों का सही से पालन नहीं

पिछले वर्ष मंत्रालय ने जारी निर्देश में कहा था कि अगर किसी की एंटीजन जांच निगेटिव है। लेकिन उसमें बुखार, शरीर दर्द इत्यादि के लक्षण हैं तो उसकी आरटी-पीसीआर जांच जरूरी है। अगर यह जांच भी निगेटिव आती है तो भी उक्त व्यक्ति को 1 सप्ताह के लिए आइसोलेट करना होगा। इन निर्देशों पर ज्यादातर राज्यों ने ठीक ढंग से काम नहीं किया।

कंजूसी पड़ी भारी, सस्ती जांच का विकल्प खत्म

तमिलनाडु : एंटीजन जांच पर भरोसा नहीं

केंद्र का अध्ययन है कि एक संक्रमित मरीज पर इन राज्यों में 14 से 20 लोग छूटे हो सकते हैं। इसी माह 9 फरवरी तक की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 20.33 करोड़ जांच में 49.06 आरटी-पीसीआर व 47.88 प्रतिशत एंटीजन जांच हुई हैं। तमिलनाडु एक ऐसा राज्य जहां एंटीजन जांच पर भरोसा नहीं किया गया। 1.57 करोड़ सैंपल में से सिर्फ 0.13 रैपिड जांच हुई है। राजस्थान 0.29 व लक्षद्वीप 0.35 प्रतिशत एंटीजन जांच हुई है।

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arvind007

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