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Backward Spinning Star: ब्रह्मांड में हुई दुर्लभ घटना! उल्टा घूम रहा है इस दो ग्रह के सिस्टम का तारा

नई दिल्ली: ब्रम्हांड (Universe) कई घटनाएं ऐसी होती हैं जो खगोलविदों को चकित कर जाती हैं. आमतौर पर हर तारे की एक दिशा होती है. वही दिशा तारे के घूर्णन की भी होती है. लेकिन वैज्ञानिकों ने एक ऐसे सिस्टम की खोज की है जिसमें तारे उसके चक्कर लगा रहे ग्रहों की कक्षा के विपरीत दिशा में घूम रहा है. शोधकर्ताओं ने इसकी वजह भी ढूंढ ली है.

दो तारे हैं इस सिस्टम में

यह अद्भुत सिस्टम पृथ्वी से 897 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है. इसे K2-290 नाम दिया गया है. इस सिस्टम में तीन तारे हैं और सबसे बड़े तारे के दो ग्रह भी हैं. इस प्रमुख तारे का नाम K2-290A है और ये तारा अपने ग्रहों की कक्षा की दिशा के विपरीत घूम रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि तारे के बीच की रेखा उसके ग्रहों के कक्षापथ की संरेख है और दोनों ही ग्रह एक ही घूमते बादल से बने हैं.

सामंजस्य की कमी

प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस (Procedures of the national academy of sciences) में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक इस सिस्टम की खोज डेनमार्क की ऑरहूस यूनिवर्सिटी के साइमन आलब्रैच और मारिया होर्थ (Simon Albrecht and Maria Horth of Orhus University, Denmark) की टीम ने की है. इसका और ज्यादा अध्ययन करने पर शोधकर्ताओं ने पाया कि इन ग्रहों की अपने तारे का चक्कर लगाने वाली कक्षाओं का उसके तारे की घूर्णन से तालमेल नहीं हैं.

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घूर्णन धुरी का झुकाव

दरअसल तारे की घूमने की धुरी 124 डिग्री झुकी हुई है. इससे पता चलता है कि तारा ग्रहों के विपरीत दिशा में घूम रहा है. अगर इसकी हमारे सौरमंडल से तुलना की जाए तो हमारे सूर्य की घूर्णन वाली कक्षा उसके ग्रहों की तुलना में 6 डिग्री झुकी हुई है. इसकी वजह से ग्रहों की कक्षा की दिशा और सूर्य के घूर्णन की दिशा एक ही है.

ऐसे कई उदाहरण हैं ब्रम्हांड में

यह विचित्र स्थिति ब्रम्हांड में पहली नहीं है, क्योंकि इसे दूसरे कई ग्रहों के सिस्टम में अवलोकित किया गया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह निर्माण के दौरान ही तारे और उसके ग्रहों के बीच की उथल-पुथल का नतीजा है. न्यूसाइंटिस्ट (New scientist) की रिपोर्ट के अनुसार आलब्रैच का कहना है कि प्रकृति जो भी पैदा करती है वह कहीं और भी पैदा हुआ है. उन्होंने बताया कि इस तरह की तालमेल में विचित्रता सिस्टम में दूसरे तारे की मौजूदगी की वजह से है जिसने डिस्क को गति पर अतिरिक्त गुरुत्व दबाव डाल दिया था.

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दो ग्रहों में है तालमेल

K2-290 की सबसे बड़ी विशेषता है कि दोनों ग्रह एक ही तल में अपने तारे की परिक्रमा लगा रहे हैं. इससे जाहिर होता है कि इन निर्माण के समय ही कुछ बहुत असामान्य सा हुआ होगा. शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यह असामान्य घटना एक आण्विक बादल के विकसित होने के बाद हुई होगी. यह बादल एक प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क बनी और इससे बाद में दो ग्रहों का निर्माण हुआ.

डिस्क का टेढ़ा होना

यूके की क्वीन यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के क्रिस वॉटसन (Chris Watson of Queen’s University Belfast, UK) के मुताबिक ग्रहों का एक ही तल में परिक्रमा करने का मतलब है कि वह किसी असामान्य घटना की वजह से अपने ग्रह तारे से दूर हुए थे, इसकी वजह डिस्क हो सकती है. इसलिए जरूरी है कि पहले यह पता लगाया जाए कि एक तारा और ग्रहों की बनाने वाली डिस्क टेढ़ी कैसे हुई.

आलब्रैच और उनके साथियों के अनुसार, इस डिस्क के टेढ़े होने की वजह K2-290B तारे का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव ही रहा होगा. उन्होंने बताया कि शुरूआत में डिस्क तारे के साथ तालमेल बनाने की कोशिश में रही होगी. 

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