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Allahabad University : विश्वस्तर पर छवि चमकाने को इलाहाबाद विवि लेगा 50 हजार पुरा छात्रों की मदद

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नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में लगातार पिछड़ रहे इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि को पुर्नस्थापित करने के लिए 50 हजार पुरा छात्रों को जोड़ने की मुहिम शुरू की है। इसके लिए प्रत्येक विभाग को कम से कम एक हजार पुरा छात्रों को जोड़ने का लक्ष्य दिया गया है। न सिर्फ भारत, बल्कि विदेशों में भी इविवि के पुरा छात्रों का परचम लहरा रहा है। अब इन्हीं पुरा छत्रों के मदद से रैंकिंग की सीढ़ी चढ़ने की कवायद भी होगी।

‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने वाला इविवि एनआईआरएफ रैंकिंग में टॉप 200 की सूची से भी बाहर हो चुका है। रैंकिंग जिन बिंदुओं के आधार पर निर्धारित होती है, उनमें से एक बिंदु ‘पर्सेप्शन’ का भी होता है। पर्सेप्शन यानी कि लोग विश्वविद्यालय के बारे में क्या सोचते हैं। कुल अंकों के 10 फीसदी अंक इसी आधार पर मिलते हैं। उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति अशोक भूषण, गुजरात के मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ, विदेश मामलों के सचिव विकास स्वरूप, भारत सरकार के अपर सचिव भरत लाल, फिल्म निर्देशक तिग्मांशु धूलिया और न जाने ऐसे कितने ही नाम इविवि से जुड़े रहे हैं। इविवि अब ऐसे ही नामों को अपने पुराछात्रों के रूप में सीधे जोड़ने की कवायद कर रहा है। इविवि की नई कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने पदभार ग्रहण करते ही कहा था कि उनकी प्राथमिकता इविवि की एनआईआरएफ रैंकिंग को सुधारना और पुराछात्रों को इविवि से जोड़ना है। 
 

  • ‘इविवि में 41 विभाग हैं। इसके अलावा कई सेंटर्स और इंस्टीट्यूटस हैं। प्रत्येक विभाग को एक-एक हजार पुरा छात्र जोड़ने का लक्ष्य दिया गया है। सिर्फ विभाग ही अपना लक्ष्य पूरा कर लें तो पुरा छात्रों की संख्या 41 हजार हो जाएगी। साथ ही सेंटर्स और इंस्टीट्यूट्स के पुरा छात्रों को जोड़कर 50 हजार का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। पुरा छात्रों के जुड़ने से निश्चित रूप से इविवि की छवि और एनआईआएफ रैंकिंग में सुधार देखने को मिलेगा।’ -प्रो. एआर सिद्दीकी, नोडल अफसर, एनआईआरएफ और ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजूकेशन

 

पुरा छात्रों को जोड़ने के लिए नया पोर्टल भी हुआ था शुरू

पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. आरआर तिवारी के कार्यकाल में पुरा छात्रों को जोड़ने के लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया था। इस नए पोर्टल से तकरीबन 200 पुरा छात्र जुड़े हैं। वहीं, इससे पूर्व पुरा छात्रों को इविवि से जोड़ने का कार्य कर रहे ऑटा उपाध्यक्ष प्रो. एआर सिद्दीकी ने भी तकरीबन 1270 पुरा छात्रों का डाटा बेस तैयार किया था, जिन्हें अब पोर्टल से जोड़ने की कवायद चल रही है।

इविवि के लिए दान कर दी थी संपत्ति

अमेरिका में रहने वाले इविवि के पुरा छात्र ईश्वर टोपा ने विश्वविद्यालय के लिए अपनी संपत्ति दान कर दी थी। इस संपत्ति की कीमत तकरीबन 12 करोड़ रुपये थी। यह रकम बाद में इविवि प्रशासन को सौंप दी गई। इस धनराशि से विश्वविद्यालय में एकेडमिक कॉम्पलेक्स का निर्माण कराया जा रहा है।

जनार्दन द्विवेदी ने सांसद निधि से दिए थे 25 लाख
सांसद जनार्दन द्विवेदी भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुरा छात्र रहे हैं। वह यहां एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे और विश्वविद्यालय के लिए उन्होंने अपनी सांसद निधि से 25 लाख रुपये दिए थे। इस रकम से हिंदी विभाग में एक हॉल का निर्माण कराया गया है।

मेडल, स्कॉलरशिप देने का जिम्मा भी उठाया
इविवि के कई पुराछात्र अपने माता-पिता के नाम से विश्वविद्यालय के मेधावी छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप देते हैं। वहीं, टॉपर्स को मेडल देने वाले भी कई पुरा छात्र हैं। ये मेडल दीक्षांत समारोह के अवसर पर दिए जाते हैं।

नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में लगातार पिछड़ रहे इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि को पुर्नस्थापित करने के लिए 50 हजार पुरा छात्रों को जोड़ने की मुहिम शुरू की है। इसके लिए प्रत्येक विभाग को कम से कम एक हजार पुरा छात्रों को जोड़ने का लक्ष्य दिया गया है। न सिर्फ भारत, बल्कि विदेशों में भी इविवि के पुरा छात्रों का परचम लहरा रहा है। अब इन्हीं पुरा छत्रों के मदद से रैंकिंग की सीढ़ी चढ़ने की कवायद भी होगी।

‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने वाला इविवि एनआईआरएफ रैंकिंग में टॉप 200 की सूची से भी बाहर हो चुका है। रैंकिंग जिन बिंदुओं के आधार पर निर्धारित होती है, उनमें से एक बिंदु ‘पर्सेप्शन’ का भी होता है। पर्सेप्शन यानी कि लोग विश्वविद्यालय के बारे में क्या सोचते हैं। कुल अंकों के 10 फीसदी अंक इसी आधार पर मिलते हैं। उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति अशोक भूषण, गुजरात के मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ, विदेश मामलों के सचिव विकास स्वरूप, भारत सरकार के अपर सचिव भरत लाल, फिल्म निर्देशक तिग्मांशु धूलिया और न जाने ऐसे कितने ही नाम इविवि से जुड़े रहे हैं। इविवि अब ऐसे ही नामों को अपने पुराछात्रों के रूप में सीधे जोड़ने की कवायद कर रहा है। इविवि की नई कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने पदभार ग्रहण करते ही कहा था कि उनकी प्राथमिकता इविवि की एनआईआरएफ रैंकिंग को सुधारना और पुराछात्रों को इविवि से जोड़ना है। 

 

  • ‘इविवि में 41 विभाग हैं। इसके अलावा कई सेंटर्स और इंस्टीट्यूटस हैं। प्रत्येक विभाग को एक-एक हजार पुरा छात्र जोड़ने का लक्ष्य दिया गया है। सिर्फ विभाग ही अपना लक्ष्य पूरा कर लें तो पुरा छात्रों की संख्या 41 हजार हो जाएगी। साथ ही सेंटर्स और इंस्टीट्यूट्स के पुरा छात्रों को जोड़कर 50 हजार का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। पुरा छात्रों के जुड़ने से निश्चित रूप से इविवि की छवि और एनआईआएफ रैंकिंग में सुधार देखने को मिलेगा।’ -प्रो. एआर सिद्दीकी, नोडल अफसर, एनआईआरएफ और ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजूकेशन

 

पुरा छात्रों को जोड़ने के लिए नया पोर्टल भी हुआ था शुरू

पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. आरआर तिवारी के कार्यकाल में पुरा छात्रों को जोड़ने के लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया था। इस नए पोर्टल से तकरीबन 200 पुरा छात्र जुड़े हैं। वहीं, इससे पूर्व पुरा छात्रों को इविवि से जोड़ने का कार्य कर रहे ऑटा उपाध्यक्ष प्रो. एआर सिद्दीकी ने भी तकरीबन 1270 पुरा छात्रों का डाटा बेस तैयार किया था, जिन्हें अब पोर्टल से जोड़ने की कवायद चल रही है।

इविवि के लिए दान कर दी थी संपत्ति

अमेरिका में रहने वाले इविवि के पुरा छात्र ईश्वर टोपा ने विश्वविद्यालय के लिए अपनी संपत्ति दान कर दी थी। इस संपत्ति की कीमत तकरीबन 12 करोड़ रुपये थी। यह रकम बाद में इविवि प्रशासन को सौंप दी गई। इस धनराशि से विश्वविद्यालय में एकेडमिक कॉम्पलेक्स का निर्माण कराया जा रहा है।

जनार्दन द्विवेदी ने सांसद निधि से दिए थे 25 लाख

सांसद जनार्दन द्विवेदी भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुरा छात्र रहे हैं। वह यहां एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे और विश्वविद्यालय के लिए उन्होंने अपनी सांसद निधि से 25 लाख रुपये दिए थे। इस रकम से हिंदी विभाग में एक हॉल का निर्माण कराया गया है।

मेडल, स्कॉलरशिप देने का जिम्मा भी उठाया

इविवि के कई पुराछात्र अपने माता-पिता के नाम से विश्वविद्यालय के मेधावी छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप देते हैं। वहीं, टॉपर्स को मेडल देने वाले भी कई पुरा छात्र हैं। ये मेडल दीक्षांत समारोह के अवसर पर दिए जाते हैं।


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