Uttar Pradesh

32 साल बाद मिली साक्ष्य नष्ट करने के आरोप से निजात, सेशन कोर्ट ने सुनाई थी एक साल की सजा

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Updated Sat, 23 Jan 2021 01:10 AM IST

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महिला का शव जलाने और साक्ष्य नष्ट करने के आरोपी मैनपुरी के विजय कुमार को इन आरोपों से निजात पाने में पूरे 32 साल लग गए। मैनपुरी के दन्नाहर निवासी विजय पर खुदकुशी करने वाली महिला का साक्ष्य नष्ट करने के इरादे से शव जलाने का आरोप लगा था। सेशन कोर्ट से उसे इस मामले में एक साल की सजा हुई। सजा के खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने अपील की सुनवाई के बाद पाया कि विजय पर लगे आरोप और उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य संदेह से परे नहीं हैं। कोर्ट ने सेशन कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए उसे बरी करने का आदेश दिया है। विजय पहले से जमानत पर है।  

यह आदेश न्यायमूर्ति राजवीर सिंह ने सोबरन व अन्य की आपराधिक अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। खुदकुशी करने वाली सर्वेश कुमारी का विवाह दन्नाहर के मातादीन के साथ हुआ था। घरेलू कलह के कारण 17 सितंबर 1986 को सर्वेश ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। ससुराल वालों ने पुलिस को जानकारी दिए बिना ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया। सर्वेश की भतीजी उसी गांव में ब्याही थी, उसकी सूचना पर पिता राम सिंह दन्नाहर पहुंचे। ससुराल में पुत्री का शव न मिलने पर उन्होंने थाने में नामजद मुकदमा दर्ज कराया। 

सेशन कोर्ट ने आठ जनवरी, 1988 को पति मातादीन को पत्नी को मारने, शव जलाने और साक्ष्य नष्ट करने का आरोपी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई। इसके अलावा परिजन हरीदास, छेदालाल, सोबरन व पड़ोसी विजय कुमार को एक-एक साल की सजा सुनाई गई। आरोपितों ने सेशन कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। अपील लंबित रहने के दौरान ही पति मातादीन सहित अन्य चारों की मौत हो गई। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह साक्ष्य नहीं है कि मृतका को जलाते समय आरोपित को उसके जहर खाकर मरने की जानकारी थी। अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा है।

महिला का शव जलाने और साक्ष्य नष्ट करने के आरोपी मैनपुरी के विजय कुमार को इन आरोपों से निजात पाने में पूरे 32 साल लग गए। मैनपुरी के दन्नाहर निवासी विजय पर खुदकुशी करने वाली महिला का साक्ष्य नष्ट करने के इरादे से शव जलाने का आरोप लगा था। सेशन कोर्ट से उसे इस मामले में एक साल की सजा हुई। सजा के खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने अपील की सुनवाई के बाद पाया कि विजय पर लगे आरोप और उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य संदेह से परे नहीं हैं। कोर्ट ने सेशन कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए उसे बरी करने का आदेश दिया है। विजय पहले से जमानत पर है।  

यह आदेश न्यायमूर्ति राजवीर सिंह ने सोबरन व अन्य की आपराधिक अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। खुदकुशी करने वाली सर्वेश कुमारी का विवाह दन्नाहर के मातादीन के साथ हुआ था। घरेलू कलह के कारण 17 सितंबर 1986 को सर्वेश ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। ससुराल वालों ने पुलिस को जानकारी दिए बिना ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया। सर्वेश की भतीजी उसी गांव में ब्याही थी, उसकी सूचना पर पिता राम सिंह दन्नाहर पहुंचे। ससुराल में पुत्री का शव न मिलने पर उन्होंने थाने में नामजद मुकदमा दर्ज कराया। 

सेशन कोर्ट ने आठ जनवरी, 1988 को पति मातादीन को पत्नी को मारने, शव जलाने और साक्ष्य नष्ट करने का आरोपी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई। इसके अलावा परिजन हरीदास, छेदालाल, सोबरन व पड़ोसी विजय कुमार को एक-एक साल की सजा सुनाई गई। आरोपितों ने सेशन कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। अपील लंबित रहने के दौरान ही पति मातादीन सहित अन्य चारों की मौत हो गई। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह साक्ष्य नहीं है कि मृतका को जलाते समय आरोपित को उसके जहर खाकर मरने की जानकारी थी। अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा है।

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