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2020 में कोविड-19 की चुनौतियों से घिरा रहा स्वास्थ्य मंत्रालय, इस तरह किया सामना

कोरोना से बचने के लिए मास्क लगाए लोग
– फोटो : पीटीआई (फाइल)

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देश की कोविड-19 वैश्विक महामारी के खिलाफ जंग में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए साल 2020 काफी व्यस्त रहा। मंत्रालय ने समय और जरूरत के अनुसार देश में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया, जांच सुविधाएं बढ़ाईं और इसके साथ ही कोविड का इलाज और दिशा-निर्देश भी जारी किए। 

इसके साथ ही मंत्रालय ने कोरोना की वैक्सीन का काम भी पटरी पर बनाए रखा, जिसके चलते अगले साल के शुरुआती दौर में वैक्सीन उपलब्ध होने की उम्मीद है। भारत में 1200 सरकारी और 1080 निजी प्रयोगशालाओं में कोविड-19 के लिए अब तक 17 करोड़ से ज्यादा नमूनों की जांच की जा चुकी है।

बता दें कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला 30 जनवरी को केरल में सामने आया था और इस महामारी की वजह से पहली मौत कर्नाटक में 10 अप्रैल को हुई थी। संक्रमण के मामलों के लिहाज से सितंबर तक भारत इस बीमारी से दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरा सबसे प्रभावित देश बन गया था।  

जैसे-जैसे चरणबद्ध तरीके से देश में लॉकडाउन के प्रतिबंधों में राहत दी गई, स्वास्थ्य मंत्रालय ने धार्मिक स्थलों, शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट, होटल और कार्यालयों के फिर से खुलने के लिए स्थिति के अनुसार मानक संचालन प्रक्रियाएं जारी करना शुरू किया। इस फेहरिस्त में ताजा नाम शिक्षण संस्थानों का जुड़ा है।
  
केंद्र सरकार ने 30 मार्च को कोविड-19 के खिलाफ जंग में शामिल स्वास्थ्य कर्मियों के लिए 50 लाख रुपये का बीमा कवर भी जारी किया था। सरकार ने कोविड-19 महामारी के प्रबंधन के लिए 11 अधिकार प्राप्त समूहों का गठन किया था। इन समूहों का काम देश में कोरोना प्रबंधन के लिए सुविज्ञ फैसले लेना था। 

सितंबर में कोरोना के दैनिक मामलों की संख्या में अचानक तेज उछाल देखा गया था जब 17 तारीख को एक दिन में सामने आने वाले मामलों की संख्या 97,894 हो गई थी। इसके बाद विश्व के कई अन्य देशों में संक्रमण की रफ्तार बढ़ने के बावजूद भारत में कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आई थी। 

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के एक करोड़ मामले 19 दिसंबर को पूरे हुए थे। हालांकि, इस दौरान देश में कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ी थी और 10 लाख मामले सामने आने में करीब एक महीने का समय लगा था। यह स्थिति अगस्त से मध्य नवंबर के मुकाबले बहुत अलग थी, जब संक्रमण की रफ्तार बेहद तेज थी।

इसके साथ ही कोरोना से ठीक होने वाले मामलों की संख्या में भारत दुनिया में पहले स्थान पर आया। अब तक देश में 98 लाख से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज ठीक हो चुके हैं। भारत ने पीपीई और एन-95 मास्क जैसी जरूरी चीजों का उत्पादन बढ़ाने के साथ जांच की सुविधाओं में इजाफा किया। 

कोरोना वायरस महामारी से जंग के दौरान भारत ने कोविड-19 से बचाव के लिए पीपीई और एन-95 मास्क जैसी जरूरी चीजों का उत्पादन बढ़ाने के साथ ही जांच की सुविधा में भी बढ़ोतरी की और इनके घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर विदेशों पर निर्भरता कम की।

महामारी की शुरुआत में शुरू में देश में सिर्फ पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) में जांच प्रयोगशाला के रूप में महज एक प्रयोगशाला थी। लॉकडाउन की शुरुआत में इसे बढ़ाकर 100 किया गया और 23 जून को आईसीएमआर ने देश में 1000वीं जांच प्रयोगशाला को मान्यता दी थी।

इलाज के लिए टीका विकसित करने के लिए जब कई देशों ने कमर कसी तो भारतीय वैज्ञानिकों ने भी पहल की और कम से कम तीन टीके विकसित करने की दिशा में दावेदारी। इनमें से एक को मंजूरी देने के लिए सक्रियता से विचार हो रहा है। अभी, छह टीके भारत में नैदानिक परीक्षण के दौर से गुजर रहे हैं।

महामारी का प्रसार रोकने के लिए किए जा रहे तमाम प्रयासों के साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय लोगों में कोविड अनुकूल आचरण को अपनाने के महत्व को रेखांकित करने के लिये मीडिया से भी नियमित रूप से संपर्क में रहा। मास्क पहनने, हाथों की सफाई और शारीरिक दूरी के पालन का प्रभाव भी बताया गया।

सरकार पहले चरण में 30 करोड़ लोगों के टीकाकरण की तैयारी कर रही है ऐसे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में राज्यों को टीकाकरण अभियान के लिए ‘कोविड-19 टीका संचालन दिशा-निर्देश’ जारी किए हैं।

कोविड-19 टीका पहले स्वास्थ्य कर्मियों, अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों और 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को दिया जाएगा जिसके बाद अन्य बीमारियों से ग्रस्त 50 साल से कम उम्र के लोगों को यह दिया जाएगा। इसके बाद अंत में बची हुई आबादी को टीके की उपलब्धता के हिसाब से इसकी खुराक दी जाएगी।

कोविड-19 टीकों की आपूर्ति और वितरण की वास्तविक समय में निगरानी के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘कोविन’ नाम का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बनाया है। लोग इसपर टीकों की उपलब्धता संबंधी विवरण देखने के साथ ही टीकों के लिए पंजीकरण भी करा सकेंगे।

देश की कोविड-19 वैश्विक महामारी के खिलाफ जंग में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए साल 2020 काफी व्यस्त रहा। मंत्रालय ने समय और जरूरत के अनुसार देश में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया, जांच सुविधाएं बढ़ाईं और इसके साथ ही कोविड का इलाज और दिशा-निर्देश भी जारी किए। 

इसके साथ ही मंत्रालय ने कोरोना की वैक्सीन का काम भी पटरी पर बनाए रखा, जिसके चलते अगले साल के शुरुआती दौर में वैक्सीन उपलब्ध होने की उम्मीद है। भारत में 1200 सरकारी और 1080 निजी प्रयोगशालाओं में कोविड-19 के लिए अब तक 17 करोड़ से ज्यादा नमूनों की जांच की जा चुकी है।

बता दें कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला 30 जनवरी को केरल में सामने आया था और इस महामारी की वजह से पहली मौत कर्नाटक में 10 अप्रैल को हुई थी। संक्रमण के मामलों के लिहाज से सितंबर तक भारत इस बीमारी से दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरा सबसे प्रभावित देश बन गया था।  

जैसे-जैसे चरणबद्ध तरीके से देश में लॉकडाउन के प्रतिबंधों में राहत दी गई, स्वास्थ्य मंत्रालय ने धार्मिक स्थलों, शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट, होटल और कार्यालयों के फिर से खुलने के लिए स्थिति के अनुसार मानक संचालन प्रक्रियाएं जारी करना शुरू किया। इस फेहरिस्त में ताजा नाम शिक्षण संस्थानों का जुड़ा है।
  
केंद्र सरकार ने 30 मार्च को कोविड-19 के खिलाफ जंग में शामिल स्वास्थ्य कर्मियों के लिए 50 लाख रुपये का बीमा कवर भी जारी किया था। सरकार ने कोविड-19 महामारी के प्रबंधन के लिए 11 अधिकार प्राप्त समूहों का गठन किया था। इन समूहों का काम देश में कोरोना प्रबंधन के लिए सुविज्ञ फैसले लेना था। 


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कोरोना के मामले बढ़े तो स्वास्थ्य मंत्रालय ने सेवाएं भी बढ़ाईं


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