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हाथरस दुष्कर्म कांड के बाद आतंक फैलाना चाहता था पीएफआई, ईडी ने किया खुलासा

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और इसकी छात्र शाखा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में पहला आरोपपत्र दाखिल किया है। इसमें दावा किया गया है कि पिछले साल हुए हाथरस सामूहिक दुष्कर्म मामले के बाद इस संगठन के सदस्य सांप्रदायिक हिंसा और आतंक फैलाना चाहते थे। 

जांच एजेंसी ने रऊफ शरीफ समेत पांच लोगों के खिलाफ दाखिल किया आरोपपत्र
केंद्रीय जांच एजेंसी 2006 में केरल में गठित पीएफआई के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है। ईडी ने हाल ही में पिछले साल हुए नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शनों और दिल्ली के सांप्रदायिक दंगों में पीएफआई की कथित भूमिका की जांच शुरू की है।

ईडी ने आरोपपत्र प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की विभिन्न धाराओं के तहत बुधवार को लखनऊ में विशेष पीएमएलए कोर्ट के सामने दाखिल किया। इसमें पीएफआई के सदस्य और इसकी छात्र शाखा कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) के महासचिव केए रऊफ शरीफ, सीएफआई के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अतिकुर रहमान, दिल्ली सीएफआई महासचिव मसूद अहमद, पीएफआई से जुड़े पत्रकार सिद्दीकी कप्पन और एक अन्य मोहम्मद आलम का नाम शामिल किया है। आलम सीएफआई और पीएफआई दोनों का सदस्य है।  

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विशेष अदालत ने ईडी के आरोपपत्र का संज्ञान लिया है और पांचों आरोपियों को समन जारी कर 18 मार्च को पेश होने तथा ट्रायल का सामना करने को कहा। ईडी ने पिछले साल दिसंबर में केरल में एयरपोर्ट पर रऊफ को गिरफ्तार किया था, उस वक्त वह देश छोड़कर फरार होने की फिराक में था। अन्य चार आरोपियों को पिछले साल हाथरस जाते वक्त मथुरा में यूपी पुलिस ने पकड़ा था। 

ईडी ने दावा किया है कि ये चारों हाथरस में दलित लड़की से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के बाद उत्पन्न माहौल का फायदा उठाकर सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने, हिंसा भड़काने और आतंक फैलाने के मकसद से जा रहे थे। एजेंसी का कहना है कि जांच में पता चला कि ये सभी रऊफ के निर्देश पर जा रहे थे और इन्हें फंड भी उसी ने मुहैया कराया था। पिछले कुछ सालों के दौरान पीएफआई के अलग-अलग खातों में 100 करोड़ रुपये जमा होने का पता चला है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और इसकी छात्र शाखा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में पहला आरोपपत्र दाखिल किया है। इसमें दावा किया गया है कि पिछले साल हुए हाथरस सामूहिक दुष्कर्म मामले के बाद इस संगठन के सदस्य सांप्रदायिक हिंसा और आतंक फैलाना चाहते थे। 

जांच एजेंसी ने रऊफ शरीफ समेत पांच लोगों के खिलाफ दाखिल किया आरोपपत्र

केंद्रीय जांच एजेंसी 2006 में केरल में गठित पीएफआई के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है। ईडी ने हाल ही में पिछले साल हुए नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शनों और दिल्ली के सांप्रदायिक दंगों में पीएफआई की कथित भूमिका की जांच शुरू की है।

ईडी ने आरोपपत्र प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की विभिन्न धाराओं के तहत बुधवार को लखनऊ में विशेष पीएमएलए कोर्ट के सामने दाखिल किया। इसमें पीएफआई के सदस्य और इसकी छात्र शाखा कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) के महासचिव केए रऊफ शरीफ, सीएफआई के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अतिकुर रहमान, दिल्ली सीएफआई महासचिव मसूद अहमद, पीएफआई से जुड़े पत्रकार सिद्दीकी कप्पन और एक अन्य मोहम्मद आलम का नाम शामिल किया है। आलम सीएफआई और पीएफआई दोनों का सदस्य है।  

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विशेष अदालत ने ईडी के आरोपपत्र का संज्ञान लिया है और पांचों आरोपियों को समन जारी कर 18 मार्च को पेश होने तथा ट्रायल का सामना करने को कहा। ईडी ने पिछले साल दिसंबर में केरल में एयरपोर्ट पर रऊफ को गिरफ्तार किया था, उस वक्त वह देश छोड़कर फरार होने की फिराक में था। अन्य चार आरोपियों को पिछले साल हाथरस जाते वक्त मथुरा में यूपी पुलिस ने पकड़ा था। 

ईडी ने दावा किया है कि ये चारों हाथरस में दलित लड़की से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के बाद उत्पन्न माहौल का फायदा उठाकर सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने, हिंसा भड़काने और आतंक फैलाने के मकसद से जा रहे थे। एजेंसी का कहना है कि जांच में पता चला कि ये सभी रऊफ के निर्देश पर जा रहे थे और इन्हें फंड भी उसी ने मुहैया कराया था। पिछले कुछ सालों के दौरान पीएफआई के अलग-अलग खातों में 100 करोड़ रुपये जमा होने का पता चला है।

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arvind007

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