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हरियाणा : उन्हीं नए उद्योगों को मिलेगी एनओसी, जो लेंगे पीएनजी का कनेक्शन

पानीपत के उद्योग।
– फोटो : फाइल फोटो

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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से बचाव के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर ईंधन के तौर पर पाइप नेचुरल गैस को अनिवार्य कर दिया है। 27 नवंबर को एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश जारी किया है। अब यह आदेश हरियाणा राज्य प्रदूषण बोर्ड के जरिये पानीपत के क्षेत्रीय कार्यालय को मिला है। 

इसके बाद क्षेत्रीय कार्यालय ने पानीपत में लगने जा रहे नए उद्योगों के लिए पीएनजी अनिवार्य कर दिया है। बिना पीएनजी के उद्योगों को अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से एनओसी नहीं दी जाएगी।

पानीपत में मौजूदा उद्योगों की बात करें तो बॉयलर का प्रयोग करने वाले करीब 1200 उद्योग इस समय संचालित किए जा रहे हैं। पानीपत में छोटे बड़े करीब 18 हजार से अधिक उद्योग हैं। नए उद्योगों में पीएनजी की अनिवार्यता से पूर्व मौजूदा औद्योगिक इकाइयों में भी पीएनजी के प्रयोग का आदेश आ चुका है, लेकिन 12 सौ में से अब तक महज 35 औद्योगिक इकाइयों ने ही पीएनजी का उपयोग शुरू किया है। 

पांच इकाइयों की ओर से पीएनजी के लिए आवेदन किया गया है। बाकी उद्योग कोयले से ही चल रहे हैं। एनजीटी ने मौजूदा उद्योगों को पीएनजी पर लाने के लिए 30 नवंबर 2019 तक समय दिया था, जिसके बाद उद्यमियों ने मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री से मुलाकात की थी और सरकार ने एनजीटी से गुजारिश कर समय मांगा था। हालांकि इसकी समय सीमा निर्धारित नहीं है। 

एनसीआर में आने वाले हरियाणा के इन जिलों के लिए भी हैं आदेश 
हरियाणा के 14 जिले एनसीआर में आते हैं। इनमें सोनीपत, पानीपत, करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नुंह, रोहतक, झज्जर, पलवल, भिवानी, रेवाड़ी व चरखीदादरी में भी उद्योगों में पीएनजी की सप्लाई अनिवार्य की गई है। 
 
ऑनलाइन मॉनीटरिंग का नहीं हुआ फायदा
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी उद्यमियों को अपने उद्योगों में ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए थे ताकि बोर्ड के अधिकारी चंडीगढ़ और दिल्ली से उद्योगों पर नजर रख सकें। पानीपत में 80 प्रतिशत उद्यमियों ने इस सिस्टम का प्रयोग किया, लेकिन इससे प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं लग सका और न ही प्रदूषण को बढ़ावा देने वाले उद्योगों की पहचान हुई। इसलिए भी पीएनजी की सप्लाई अनिवार्य हो गई। 

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से बचाव के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर ईंधन के तौर पर पाइप नेचुरल गैस को अनिवार्य कर दिया है। 27 नवंबर को एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश जारी किया है। अब यह आदेश हरियाणा राज्य प्रदूषण बोर्ड के जरिये पानीपत के क्षेत्रीय कार्यालय को मिला है। 

इसके बाद क्षेत्रीय कार्यालय ने पानीपत में लगने जा रहे नए उद्योगों के लिए पीएनजी अनिवार्य कर दिया है। बिना पीएनजी के उद्योगों को अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से एनओसी नहीं दी जाएगी।

पानीपत में मौजूदा उद्योगों की बात करें तो बॉयलर का प्रयोग करने वाले करीब 1200 उद्योग इस समय संचालित किए जा रहे हैं। पानीपत में छोटे बड़े करीब 18 हजार से अधिक उद्योग हैं। नए उद्योगों में पीएनजी की अनिवार्यता से पूर्व मौजूदा औद्योगिक इकाइयों में भी पीएनजी के प्रयोग का आदेश आ चुका है, लेकिन 12 सौ में से अब तक महज 35 औद्योगिक इकाइयों ने ही पीएनजी का उपयोग शुरू किया है। 

पांच इकाइयों की ओर से पीएनजी के लिए आवेदन किया गया है। बाकी उद्योग कोयले से ही चल रहे हैं। एनजीटी ने मौजूदा उद्योगों को पीएनजी पर लाने के लिए 30 नवंबर 2019 तक समय दिया था, जिसके बाद उद्यमियों ने मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री से मुलाकात की थी और सरकार ने एनजीटी से गुजारिश कर समय मांगा था। हालांकि इसकी समय सीमा निर्धारित नहीं है। 

एनसीआर में आने वाले हरियाणा के इन जिलों के लिए भी हैं आदेश 

हरियाणा के 14 जिले एनसीआर में आते हैं। इनमें सोनीपत, पानीपत, करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नुंह, रोहतक, झज्जर, पलवल, भिवानी, रेवाड़ी व चरखीदादरी में भी उद्योगों में पीएनजी की सप्लाई अनिवार्य की गई है। 

 

ऑनलाइन मॉनीटरिंग का नहीं हुआ फायदा

प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी उद्यमियों को अपने उद्योगों में ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए थे ताकि बोर्ड के अधिकारी चंडीगढ़ और दिल्ली से उद्योगों पर नजर रख सकें। पानीपत में 80 प्रतिशत उद्यमियों ने इस सिस्टम का प्रयोग किया, लेकिन इससे प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं लग सका और न ही प्रदूषण को बढ़ावा देने वाले उद्योगों की पहचान हुई। इसलिए भी पीएनजी की सप्लाई अनिवार्य हो गई। 

उद्यमियों को निर्देश जारी कर दिए हैं : कमलजीत

उन्हीं नए उद्योगों को एनओसी मिलेगी, जिनमें पीएनजी की सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी। ये मुख्य रूप से बॉयलर चलाने वाले उद्योगों के लिए है। इस बारे में नोटिफिकेशन पहले ही जारी हो चुका है। – कमलजीत सिंह, रीजनल ऑफिसर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड


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