Uttar Pradesh

हत्या के आरोपी गैंगस्टर अनमोल सिंह की सशर्त जमानत मंजूर

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांसी, सिद्धार्थनगर के अनमोल सिंह की हत्या, षड्यंत्र व गिरोहबंद अधिनियम (गैंगस्टर) के आरोप में दर्ज आपराधिक मामले में सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने वरिष्ठ अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र व चंद्रकेश मिश्र को सुनकर दिया है। याची को कोतवाली बांसी में हत्या, षड्यंत्र व अन्य आरोपों में दर्ज प्राथमिकी के तहत गिरफ्तार किया गया है। याची का कहना था कि विपुल सिंह की गोली लगने से मौत हुई है।

सह अभियुक्त प्रशांत सिंह उर्फ नीरज के तमंचे की गोली से मौत हुई है। कुल चार आरोपियों में से दो की पहले ही जमानत हो चुकी है। याची का हत्या में कोई हाथ नहीं है। उसके खिलाफ इससे पहले दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनमें से एक में  पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी है, जिसपर आपत्ति कोर्ट में विचाराधीन है।

दूसरे केस में उसे जमानत मिल चुकी है और केवल एक केस के आधार पर गिरोहबंद अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है, जो विधि सम्मत नहीं है। कोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए कहा है कि याची साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं करेगा। न ही पीड़ित पर दबाव डालेगा तथा कोर्ट में हाजिर होगा, सुनवाई में अवरोध न उत्पन्न करने का लिखित आश्वासन देगा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांसी, सिद्धार्थनगर के अनमोल सिंह की हत्या, षड्यंत्र व गिरोहबंद अधिनियम (गैंगस्टर) के आरोप में दर्ज आपराधिक मामले में सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने वरिष्ठ अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र व चंद्रकेश मिश्र को सुनकर दिया है। याची को कोतवाली बांसी में हत्या, षड्यंत्र व अन्य आरोपों में दर्ज प्राथमिकी के तहत गिरफ्तार किया गया है। याची का कहना था कि विपुल सिंह की गोली लगने से मौत हुई है।

सह अभियुक्त प्रशांत सिंह उर्फ नीरज के तमंचे की गोली से मौत हुई है। कुल चार आरोपियों में से दो की पहले ही जमानत हो चुकी है। याची का हत्या में कोई हाथ नहीं है। उसके खिलाफ इससे पहले दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनमें से एक में  पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी है, जिसपर आपत्ति कोर्ट में विचाराधीन है।

दूसरे केस में उसे जमानत मिल चुकी है और केवल एक केस के आधार पर गिरोहबंद अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है, जो विधि सम्मत नहीं है। कोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए कहा है कि याची साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं करेगा। न ही पीड़ित पर दबाव डालेगा तथा कोर्ट में हाजिर होगा, सुनवाई में अवरोध न उत्पन्न करने का लिखित आश्वासन देगा।


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