National

स्थायी कमीशन: सेना की 17 महिला अफसरों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 27 Jan 2021 06:18 AM IST

सर्वोच्च न्यायालय
– फोटो : पीटीआई

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

ख़बर सुनें

सुप्रीम कोर्ट में आज भारतीय सेना की 17 महिला अफसरों की याचिका पर सुनवाई होगी। इनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद सरकार ने अभी तक 50 फीसदी महिला अफसरों को भी स्थायी कमीशन नहीं दिया है। 

लेफ्टिनेंट कर्नल आशु यादव और थल सेना की अन्य महिला अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि शीर्ष न्यायालय के निर्देशों का अक्षरश: अनुपालन नहीं किया गया।

उन्होंने याचिका में आरोप लगाया है कि स्थायी कमीशन प्रदान करने की प्रक्रियाएं मनमानेपन, गैर निष्पक्षता और अतर्कसंगत से दूषित हुई हैं। याचिका पर न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा आज सुनवाई किया जाना है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि याचिका दायर करने का उद्देश्य स्थायी कमीशन, पदोन्नति, अन्य लाभ पाने की राह में शेष अड़चनों को उजागर करना है। उन्होंने अपना वाजिब हक प्राप्त करने के लिए 15 साल से अधिक लंबी लड़ाई लड़ी थी और जीत हासिल की थी।

गौरतलब है कि पिछले साल 17 फरवरी को शीर्ष न्यायालय ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में निर्देश दिया था कि थल सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जाए। न्यायालय ने महिला अधिकारियों की शारीरिक आधार पर केंद्र के रुख को खारिज करते हुए उसे लैंगिक भेदभाव करने वाला करार दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में आज भारतीय सेना की 17 महिला अफसरों की याचिका पर सुनवाई होगी। इनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद सरकार ने अभी तक 50 फीसदी महिला अफसरों को भी स्थायी कमीशन नहीं दिया है। 

लेफ्टिनेंट कर्नल आशु यादव और थल सेना की अन्य महिला अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि शीर्ष न्यायालय के निर्देशों का अक्षरश: अनुपालन नहीं किया गया।

उन्होंने याचिका में आरोप लगाया है कि स्थायी कमीशन प्रदान करने की प्रक्रियाएं मनमानेपन, गैर निष्पक्षता और अतर्कसंगत से दूषित हुई हैं। याचिका पर न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा आज सुनवाई किया जाना है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि याचिका दायर करने का उद्देश्य स्थायी कमीशन, पदोन्नति, अन्य लाभ पाने की राह में शेष अड़चनों को उजागर करना है। उन्होंने अपना वाजिब हक प्राप्त करने के लिए 15 साल से अधिक लंबी लड़ाई लड़ी थी और जीत हासिल की थी।

गौरतलब है कि पिछले साल 17 फरवरी को शीर्ष न्यायालय ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में निर्देश दिया था कि थल सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जाए। न्यायालय ने महिला अधिकारियों की शारीरिक आधार पर केंद्र के रुख को खारिज करते हुए उसे लैंगिक भेदभाव करने वाला करार दिया था।

Source link

arvind007

News Media24 is a Professional News Platform. Here we will provide you National, International, Entertainment News, Gadgets updates, etc. 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
%d bloggers like this: