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सोशल मीडिया पर दक्षिणपंथी कंटेंट बचाने के लिए पोलैंड बनाएगा कानून

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया अकाउंट्स को बंद करने के खिलाफ भड़के गुस्से के बीच पोलैंड पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने इस तरह की कार्रवाई के खिलाफ कानून बनाने का फैसला किया है। सरकारी एलान के मुताबिक एक ऐसे कानून का मसविदा तैयार किया जा रहा है, जिसके तहत टेक कंपनियों का ऐसा कदम उठाना अवैध हो जाएगा। पोलैंड सरकार के अधिकारियों ने डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया अकाउंट्स को डिऐक्टिवेट करने के फेसबुक, ट्विटर, गूगल, एपल आदि जैसी कंपनियों के कदम की कड़ी निंदा की है।

पोलैंड के प्रधानमंत्री मातेउस्ज मोरावीकी ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा है- ‘एल्गोरिद्म या बड़ी कंपनियों को यह तय करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए कि क्या सही और क्या गलत है। सेंसरशिप को स्वीकार नहीं किया जा सकता। सेंसरशिप सर्वसत्तावादी और तानाशाही व्यवस्थाओं की चीज है। अब व्यापारिक उपाय के रूप में सेंसरशिप उन लोगों के खिलाफ लौट रही है, जो अलग ढंग से सोचते हैं।’

लेकिन पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि पोलैंड की सत्ताधारी लॉ एंड जस्टिस पार्टी हाल के वर्षों में खुद भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाम लगाती रही है। ये पार्टी वैचारिक रूप से कई मुद्दों पर ट्रंप समर्थक रही है। इसके कई नेताओं ने समलैंगिक समुदाय और शरणार्थियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया है। वैसे ये पार्टी पहले भी आरोप लगा चुकी है कि अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियां पोलैंड और दूसरे देशों के दक्षिणपंथी विचारों वाले लोगों को निशाना बनाती हैं।

पोलैंड के न्याय मंत्री सिबैस्टियन कालेता ने कहा है कि फेसबुक का ट्रंप के अकाउंट को बंद करना पाखंडी, राजनीति से प्रेरित और सेंसरशिप जैसी कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि अब पोलैंड में ऐसा कानून बनेगा, जिसके तहत उन बातों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाना गैर-कानूनी होगा, जिनसे पोलैंड के किसी कानून का उल्लंघन नहीं होता हो। उन्होंने कहा कि इस कानून का पालन उन सभी कंपनियों को करना होगा, जो पोलैंड में कारोबार करना चाहती हैं।

हाल के वर्षों में फेसबुक ने पोलैंड के धुर दक्षिणपंथी संगठनों और नेताओं के कंटेंट को कई बार ब्लॉक किया है। धुर दक्षिणपंथी कॉनफेदिरिता पार्टी के सांसद जानुस्ज कोर्बिन-मिके के फेसबुक अकाउंट को पिछले नवंबर में बंद कर दिया गया था। उनके सात लाख 80 हजार से ज्यादा फॉलोवर थे। तब कोरविन-मिके ने आरोप लगाया था कि फेसबुक का संचालन फासिस्टों और बोल्शेविकों के हाथ में चला गया है।

पोलैंड में प्रस्तावित कानून के तहत यूजर्स को सोशल मीडिया पोस्ट को बहाल करवाने के लिए कोर्ट जाने का अधिकार होगा। कोर्ट को ऐसे मामलों में सात दिन के अंदर फैसला देना होगा। कोर्ट की सारी प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से चलेगी। प्रधानमंत्री मोरावीकी ने यूरोपियन यूनियन से अपील की है कि वह भी ऐसे नियम बनाए।

यहां के एनजीओ पोनोपत्यकोन के अध्यक्ष कातार्जयाना सिमिलेविज ने एक अखबार से कहा कि प्रस्तावित कानून उसी लाइन पर है, जिसके लिए पोलैंड की सिविल सोसायटी लंबे समय से अभियान चला रही थी। यह मनमाने ढंग से होने वाली ऑनलाइन सेंसरशिप के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि किस ऑनलाइन कंटेंट को रहने दिया जाए और किसे हटाया जाए, इसे अलग-अलग देशों के कानून ही बेहतर ढंग से तय कर सकते हैँ। लेकिन उन्होंने कहा कि अच्छी बात यह होगी कि पूरे यूरोपियन यूनियन के लिए एक जैसा कानून बने।

लेकिन दूसरे विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि पोलैंड सरकार की पहल के पीछे राजनीतिक मकसद है। उसे चिंता है कि अमेरिका में शुरू हुई कार्रवाई का दायरा बढ़ते-बढ़ते पोलैंड तक पहुंच सकता है। यहां इसके दायरे में धुर दक्षिणपंथी संगठन आ सकते हैं, जो सत्ताधारी पार्टी का प्रमुख आधार हैं। सरकार उन्हें ही बचाना चाहती है।

सार

पोलैंड में प्रस्तावित कानून के तहत यूजर्स को सोशल मीडिया पोस्ट को बहाल करवाने के लिए कोर्ट जाने का अधिकार होगा। कोर्ट को ऐसे मामलों में सात दिन के अंदर फैसला देना होगा। कोर्ट की सारी प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से चलेगी…

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया अकाउंट्स को बंद करने के खिलाफ भड़के गुस्से के बीच पोलैंड पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने इस तरह की कार्रवाई के खिलाफ कानून बनाने का फैसला किया है। सरकारी एलान के मुताबिक एक ऐसे कानून का मसविदा तैयार किया जा रहा है, जिसके तहत टेक कंपनियों का ऐसा कदम उठाना अवैध हो जाएगा। पोलैंड सरकार के अधिकारियों ने डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया अकाउंट्स को डिऐक्टिवेट करने के फेसबुक, ट्विटर, गूगल, एपल आदि जैसी कंपनियों के कदम की कड़ी निंदा की है।

पोलैंड के प्रधानमंत्री मातेउस्ज मोरावीकी ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा है- ‘एल्गोरिद्म या बड़ी कंपनियों को यह तय करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए कि क्या सही और क्या गलत है। सेंसरशिप को स्वीकार नहीं किया जा सकता। सेंसरशिप सर्वसत्तावादी और तानाशाही व्यवस्थाओं की चीज है। अब व्यापारिक उपाय के रूप में सेंसरशिप उन लोगों के खिलाफ लौट रही है, जो अलग ढंग से सोचते हैं।’

लेकिन पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि पोलैंड की सत्ताधारी लॉ एंड जस्टिस पार्टी हाल के वर्षों में खुद भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाम लगाती रही है। ये पार्टी वैचारिक रूप से कई मुद्दों पर ट्रंप समर्थक रही है। इसके कई नेताओं ने समलैंगिक समुदाय और शरणार्थियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया है। वैसे ये पार्टी पहले भी आरोप लगा चुकी है कि अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियां पोलैंड और दूसरे देशों के दक्षिणपंथी विचारों वाले लोगों को निशाना बनाती हैं।

पोलैंड के न्याय मंत्री सिबैस्टियन कालेता ने कहा है कि फेसबुक का ट्रंप के अकाउंट को बंद करना पाखंडी, राजनीति से प्रेरित और सेंसरशिप जैसी कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि अब पोलैंड में ऐसा कानून बनेगा, जिसके तहत उन बातों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाना गैर-कानूनी होगा, जिनसे पोलैंड के किसी कानून का उल्लंघन नहीं होता हो। उन्होंने कहा कि इस कानून का पालन उन सभी कंपनियों को करना होगा, जो पोलैंड में कारोबार करना चाहती हैं।

हाल के वर्षों में फेसबुक ने पोलैंड के धुर दक्षिणपंथी संगठनों और नेताओं के कंटेंट को कई बार ब्लॉक किया है। धुर दक्षिणपंथी कॉनफेदिरिता पार्टी के सांसद जानुस्ज कोर्बिन-मिके के फेसबुक अकाउंट को पिछले नवंबर में बंद कर दिया गया था। उनके सात लाख 80 हजार से ज्यादा फॉलोवर थे। तब कोरविन-मिके ने आरोप लगाया था कि फेसबुक का संचालन फासिस्टों और बोल्शेविकों के हाथ में चला गया है।

पोलैंड में प्रस्तावित कानून के तहत यूजर्स को सोशल मीडिया पोस्ट को बहाल करवाने के लिए कोर्ट जाने का अधिकार होगा। कोर्ट को ऐसे मामलों में सात दिन के अंदर फैसला देना होगा। कोर्ट की सारी प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से चलेगी। प्रधानमंत्री मोरावीकी ने यूरोपियन यूनियन से अपील की है कि वह भी ऐसे नियम बनाए।

यहां के एनजीओ पोनोपत्यकोन के अध्यक्ष कातार्जयाना सिमिलेविज ने एक अखबार से कहा कि प्रस्तावित कानून उसी लाइन पर है, जिसके लिए पोलैंड की सिविल सोसायटी लंबे समय से अभियान चला रही थी। यह मनमाने ढंग से होने वाली ऑनलाइन सेंसरशिप के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि किस ऑनलाइन कंटेंट को रहने दिया जाए और किसे हटाया जाए, इसे अलग-अलग देशों के कानून ही बेहतर ढंग से तय कर सकते हैँ। लेकिन उन्होंने कहा कि अच्छी बात यह होगी कि पूरे यूरोपियन यूनियन के लिए एक जैसा कानून बने।

लेकिन दूसरे विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि पोलैंड सरकार की पहल के पीछे राजनीतिक मकसद है। उसे चिंता है कि अमेरिका में शुरू हुई कार्रवाई का दायरा बढ़ते-बढ़ते पोलैंड तक पहुंच सकता है। यहां इसके दायरे में धुर दक्षिणपंथी संगठन आ सकते हैं, जो सत्ताधारी पार्टी का प्रमुख आधार हैं। सरकार उन्हें ही बचाना चाहती है।


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