International

सोमवार से शुरू होगी एफएटीएफ की बैठक, पाकिस्तान के ‘ग्रे लिस्ट’ से निकलने की उम्मीद नहीं

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो)
– फोटो : PTI

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के एफएटीएफ की ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर निकलने की उम्मीद नहीं है। इसके पीछे यूरोपीय देशों की सख्ती है। कुछ यूरोपीय देशों ने सख्त रुख अपनाया है कि इस्लामाबाद ने इसके द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के सभी बिंदुओं को पूरी तरह से लागू नहीं किया है। यह जानकारी रविवार को मीडिया की एक खबर दी गई।

एफएटीएफ की धनशोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण पर निगरानी के लिए पूर्ण बैठक 22 फरवरी से होने वाली है। पेरिस स्थित वित्तीय कार्यबल (एफएटीएफ) ने जून, 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा था और इस्लामाबाद को 2019 के अंत तक धनशोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण पर लगाम लगाने के लिए कार्ययोजना को लागू करने के लिए कहा था, लेकिन बाद में कोविड-19 महामारी के कारण यह समयसीमा बढ़ा दी गई थी।

पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, एफएटीएफ का पूर्ण सत्र 22 फरवरी से 25 फरवरी तक पेरिस में आयोजित होगा, जिसमें पाकिस्तान सहित ‘ग्रे सूची’ के विभिन्न देशों के मामलों पर विचार किया जाएगा और बैठकों के समापन पर इस पर निर्णय लिया जाएगा।

भारत में वांछित आतंकियों पर कार्रवाई भी शामिल 
अक्तूबर, 2020 में आयोजित अंतिम पूर्णसत्र में एफएटीएफ ने निष्कर्ष निकाला था कि पाकिस्तान फरवरी, 2021 तक अपनी ‘‘ग्रे लिस्ट’’ में जारी रहेगा क्योंकि यह वैश्विक धनशोधन और आतंकवादी वित्तपोषण निगरानी के 27 में से छह दायित्वों को पूरा करने में विफल रहा है। उसके अनुसार, इसमें भारत के दो सबसे वांछित आतंकवादी – जैश-ए मोहम्मद प्रमुख मौलाना मसूद अजहर और जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल है।

अजहर और सईद भारत में कई आतंकवादी कृत्यों में उनकी संलिप्तता के लिए सबसे वांछित आतंकवादी हैं, जिनमें 26/11 मुंबई आतंकवादी हमला और पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ की बस पर आतंकी हमला शामिल है।

इन घटनाक्रमों से जुड़े एक आधिकारिक सूत्र ने शनिवार को अखबार को बताया कि पाकिस्तान ने छह सिफारिशों का अनुपालन किया है और एफएटीएफ सचिवालय को विवरण भी प्रस्तुत कर दिया है। सूत्र ने कहा कि अब सदस्य बैठक के दौरान पाकिस्तान की प्रतिक्रिया का मूल्यांकन करेंगे। सूत्र ने कहा कि निर्णय सदस्यों के बीच आम सहमति से लिया जाएगा।

फ्रांस के खिलाफ आवाज उठाना पड़ सकता है भारी 
अखबार ने एफएटीएफ को कवर करने वाले एक पत्रकार के हवाले से कहा कि कुछ यूरोपीय देशों में विशेष रूप से मेजबान फ्रांस ने एफएटीएफ को पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में बनाए रखने की सिफारिश की है। यह रुख अपनाया है कि इस्लामाबाद द्वारा सभी बिंदु पूरी तरह से लागू नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अन्य यूरोपीय देश भी फ्रांस का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कार्टून मुद्दे पर इस्लामाबाद की हालिया प्रतिक्रिया से फ्रांस खुश नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने पेरिस में एक नियमित राजदूत भी तैनात नहीं किया है।

अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल के अपहरण और हत्या मामले के आरोपियों को बरी किए जाने को लेकर अमेरिका ने भी चिंता जताई है। यह आशंका है कि अमेरिका पाकिस्तान को इस साल कम से कम जून तक ‘ग्रे लिस्ट’ में जारी रखने की पैरवी भी कर सकता है।

आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के एफएटीएफ की ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर निकलने की उम्मीद नहीं है। इसके पीछे यूरोपीय देशों की सख्ती है। कुछ यूरोपीय देशों ने सख्त रुख अपनाया है कि इस्लामाबाद ने इसके द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के सभी बिंदुओं को पूरी तरह से लागू नहीं किया है। यह जानकारी रविवार को मीडिया की एक खबर दी गई।

एफएटीएफ की धनशोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण पर निगरानी के लिए पूर्ण बैठक 22 फरवरी से होने वाली है। पेरिस स्थित वित्तीय कार्यबल (एफएटीएफ) ने जून, 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा था और इस्लामाबाद को 2019 के अंत तक धनशोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण पर लगाम लगाने के लिए कार्ययोजना को लागू करने के लिए कहा था, लेकिन बाद में कोविड-19 महामारी के कारण यह समयसीमा बढ़ा दी गई थी।

पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, एफएटीएफ का पूर्ण सत्र 22 फरवरी से 25 फरवरी तक पेरिस में आयोजित होगा, जिसमें पाकिस्तान सहित ‘ग्रे सूची’ के विभिन्न देशों के मामलों पर विचार किया जाएगा और बैठकों के समापन पर इस पर निर्णय लिया जाएगा।

भारत में वांछित आतंकियों पर कार्रवाई भी शामिल 

अक्तूबर, 2020 में आयोजित अंतिम पूर्णसत्र में एफएटीएफ ने निष्कर्ष निकाला था कि पाकिस्तान फरवरी, 2021 तक अपनी ‘‘ग्रे लिस्ट’’ में जारी रहेगा क्योंकि यह वैश्विक धनशोधन और आतंकवादी वित्तपोषण निगरानी के 27 में से छह दायित्वों को पूरा करने में विफल रहा है। उसके अनुसार, इसमें भारत के दो सबसे वांछित आतंकवादी – जैश-ए मोहम्मद प्रमुख मौलाना मसूद अजहर और जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल है।

अजहर और सईद भारत में कई आतंकवादी कृत्यों में उनकी संलिप्तता के लिए सबसे वांछित आतंकवादी हैं, जिनमें 26/11 मुंबई आतंकवादी हमला और पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ की बस पर आतंकी हमला शामिल है।


आगे पढ़ें

पाक की प्रतिक्रिया का होगा मूल्यांकन 

Source link

arvind007

News Media24 is a Professional News Platform. Here we will provide you National, International, Entertainment News, Gadgets updates, etc. 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
%d bloggers like this: