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सेनाध्यक्ष बोले- चुनौतीपूर्ण रहा पिछला साल, सशस्त्र बलों ने बहादुरी से किया महामारी का मुकाबला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 14 Jan 2021 11:57 AM IST

सेनाध्यक्ष नरवणे-वायुसेनाध्यक्ष भदौरिया-नौसेनाध्यक्ष करमबीर
– फोटो : ANI

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भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे, वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया और नौसेनाध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह ने गुरुवार को वेटरन्स डे कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में जनरल नरवणे ने कहा कि पिछला साल हमारे देश और सशस्त्र बलों के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था। सशस्त्र बलों ने बड़ी कुशलता से उत्तरी सीमाओं पर बहादुरी से रहते हुए महामारी का मुकाबला किया। मुझे गर्व है कि इसे पूरा करने में हमें हमारे दिग्गजों का समर्थन प्राप्त था।

सेनाध्यक्ष ने कहा, ‘कुछ दिग्गजों ने इस बात को लेकर निराशा व्यक्त की थी कि 1971 की लड़ाई को 50 साल होने पर ज्यादा महत्व नहीं दिया जा रहा है। मैं यह कहना चाहता हूं कि 1971 के युद्ध में मिली जीत को चिह्नित करने के लिए इस पूरे वर्ष को ‘स्वर्ण विजय वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।’
 

इस मौके पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने कहा, ‘वायुसेना की शुरुआत 1932 में एक सहायक बल के रूप में हुई थी और जहां हम एक घातक, शक्तिशाली एयरोस्पेस पावर बन चुके हैं। इस वेटरन्स डे पर मैं इस यात्रा में हमारे दिग्गजों के सम्मान और गर्व के साथ स्वीकार करना चाहता हूं।’

यह भी पढ़ें- पाक-चीन की जुगलबंदी बड़ा खतरा लेकिन सेना किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार – सेनाध्यक्ष नरवणे

नौसेनाध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा, ‘सशस्त्र सेना के वेटरन्स डे के अवसर पर अपने दिग्गजों से बात करने का अवसर मिलना मेरे लिए बहुत गर्व और सम्मान की बात है। सबसे पहले मैं राष्ट्र के प्रति सेवा के लिए सभी दिग्गजों का दिल से आभार व्यक्त करता हूं। हम सभी जो वर्दी में हैं और सेवा कर रहे हैं, आभारी रूप से स्वीकार करते हैं कि आज हमारे पास जो बहु-आयामी और विश्वसनीय बल है, वह हमारे दिग्गजों की दृष्टि, दृढ़ता और धैर्य के कारण है।’

भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे, वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया और नौसेनाध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह ने गुरुवार को वेटरन्स डे कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में जनरल नरवणे ने कहा कि पिछला साल हमारे देश और सशस्त्र बलों के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था। सशस्त्र बलों ने बड़ी कुशलता से उत्तरी सीमाओं पर बहादुरी से रहते हुए महामारी का मुकाबला किया। मुझे गर्व है कि इसे पूरा करने में हमें हमारे दिग्गजों का समर्थन प्राप्त था।

सेनाध्यक्ष ने कहा, ‘कुछ दिग्गजों ने इस बात को लेकर निराशा व्यक्त की थी कि 1971 की लड़ाई को 50 साल होने पर ज्यादा महत्व नहीं दिया जा रहा है। मैं यह कहना चाहता हूं कि 1971 के युद्ध में मिली जीत को चिह्नित करने के लिए इस पूरे वर्ष को ‘स्वर्ण विजय वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।’

 

इस मौके पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने कहा, ‘वायुसेना की शुरुआत 1932 में एक सहायक बल के रूप में हुई थी और जहां हम एक घातक, शक्तिशाली एयरोस्पेस पावर बन चुके हैं। इस वेटरन्स डे पर मैं इस यात्रा में हमारे दिग्गजों के सम्मान और गर्व के साथ स्वीकार करना चाहता हूं।’

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नौसेनाध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा, ‘सशस्त्र सेना के वेटरन्स डे के अवसर पर अपने दिग्गजों से बात करने का अवसर मिलना मेरे लिए बहुत गर्व और सम्मान की बात है। सबसे पहले मैं राष्ट्र के प्रति सेवा के लिए सभी दिग्गजों का दिल से आभार व्यक्त करता हूं। हम सभी जो वर्दी में हैं और सेवा कर रहे हैं, आभारी रूप से स्वीकार करते हैं कि आज हमारे पास जो बहु-आयामी और विश्वसनीय बल है, वह हमारे दिग्गजों की दृष्टि, दृढ़ता और धैर्य के कारण है।’

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