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सुरक्षा परिषद में सुधार प्रक्रिया पर 25 जनवरी को शुरू होगी वार्ता

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संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कन बोजकिर ने कहा है कि सुरक्षा परिषद में सुधार प्रक्रिया को लेकर अंतर-सरकारी वार्ताएं इस महीने के अंत में दोबारा से शुरू हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की सदस्यता के साथ-साथ उसके काम करने के तरीके में 21वीं सदी की वास्तविकता की झलक मिलनी चाहिए।

सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के तौर पर भारत का दो वर्ष का कार्यकाल इस साल शुरू हुआ है और वह संयुक्त राष्ट्र के इस 15 सदस्यीय शक्तिशाली अंग में सुधार के लिए लंबे समय से आवाज उठाता रहा है।

भारत का कहना है कि वह परिषद की स्थायी सदस्यता हासिल करने का हकदार है और मौजूदा स्वरूप के तहत सुरक्षा परिषद 21वीं सदी की भू-राजनैतिक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती।

बोजकिर ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता तथा इसके कामकाज के तरीके में 21वीं सदी की वास्तविकताओं की झलक मिलनी चाहिए। यह अंतर-सरकारी तथा सदस्य देशों द्वारा संचालित प्रक्रिया है।

बोजकिर ने काफी समय से लंबित सुरक्षा परिषद सुधारों की दिशा में प्रगति पर कहा, आईजीएन प्रक्रिया के सह-अध्यक्ष के रूप में नियुक्त कतर तथा पोलैंड के स्थायी प्रतिनिधि 25-26 जनवरी को 75वें अधिवेशन में अंतर-सरकारी वार्ताएं शुरू करेंगे।

अगले यूएन महासचिव के चयनमें 31 को पहले कदम की उम्मीद
संयुक्त राष्ट्र महासभा तथा सुरक्षा परिषद को इस वैश्विक संगठन का अगला प्रमुख चुनने की दिशा में इस महीने के अंत में पहला कदम उठाए उठाए जाने की उम्मीद है।

महासभा के अध्यक्ष वोल्कान बोजकिर ने कहा कि वह और संयुक्त राष्ट्र में ट्यूनीशिया के राजदूत एवं सुरक्षा परिषद के मौजूदा प्रमुख तारिक लादेब 31 जनवरी से पहले संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों को पत्र भेजकर मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरस के खिलाफ उम्मीदवार उतारने के बारे में कह सकते हैं

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कन बोजकिर ने कहा है कि सुरक्षा परिषद में सुधार प्रक्रिया को लेकर अंतर-सरकारी वार्ताएं इस महीने के अंत में दोबारा से शुरू हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की सदस्यता के साथ-साथ उसके काम करने के तरीके में 21वीं सदी की वास्तविकता की झलक मिलनी चाहिए।

सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के तौर पर भारत का दो वर्ष का कार्यकाल इस साल शुरू हुआ है और वह संयुक्त राष्ट्र के इस 15 सदस्यीय शक्तिशाली अंग में सुधार के लिए लंबे समय से आवाज उठाता रहा है।

भारत का कहना है कि वह परिषद की स्थायी सदस्यता हासिल करने का हकदार है और मौजूदा स्वरूप के तहत सुरक्षा परिषद 21वीं सदी की भू-राजनैतिक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती।

बोजकिर ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता तथा इसके कामकाज के तरीके में 21वीं सदी की वास्तविकताओं की झलक मिलनी चाहिए। यह अंतर-सरकारी तथा सदस्य देशों द्वारा संचालित प्रक्रिया है।

बोजकिर ने काफी समय से लंबित सुरक्षा परिषद सुधारों की दिशा में प्रगति पर कहा, आईजीएन प्रक्रिया के सह-अध्यक्ष के रूप में नियुक्त कतर तथा पोलैंड के स्थायी प्रतिनिधि 25-26 जनवरी को 75वें अधिवेशन में अंतर-सरकारी वार्ताएं शुरू करेंगे।

अगले यूएन महासचिव के चयनमें 31 को पहले कदम की उम्मीद

संयुक्त राष्ट्र महासभा तथा सुरक्षा परिषद को इस वैश्विक संगठन का अगला प्रमुख चुनने की दिशा में इस महीने के अंत में पहला कदम उठाए उठाए जाने की उम्मीद है।

महासभा के अध्यक्ष वोल्कान बोजकिर ने कहा कि वह और संयुक्त राष्ट्र में ट्यूनीशिया के राजदूत एवं सुरक्षा परिषद के मौजूदा प्रमुख तारिक लादेब 31 जनवरी से पहले संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों को पत्र भेजकर मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरस के खिलाफ उम्मीदवार उतारने के बारे में कह सकते हैं


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arvind007

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