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सुप्रीम कोर्ट ने उठाया प्रदूषित नदियों को सुधारने का बीड़ा, पांच राज्यों को नोटिस

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Thu, 14 Jan 2021 05:28 AM IST

देश में बेकाबू जलप्रदूषण
– फोटो : सोशल मीडिया

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देश की नदियों में प्रदूषण से व्यथित सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इन नदियों को सुधारने का बीड़ा उठाया। कोर्ट ने यमुना नदी से इसकी शुरुआत करने का निर्णय लिया है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने कहा है कि सीवर के पानी से दूषित हो रही नदियों को सुधारने का वक्त आ गया है।

दरअसल, यमुना में अमोनिया के खतरनाक स्तर पर दिल्ली जल बोर्ड की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सभी नदियों के प्रदूषण दूर करने का निर्णय लिया है। इस मसले को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए पीठ ने कहा है कि इसका असर न केवल आम जनता पर पड़ता है बल्कि उन सभी जीव जंतुओं पर पड़ता है जो भूजल पर आश्रित हैं। स्वच्छ पर्यावरण और प्रदूषणमुक्त पानी का अधिकार जीवन जीने के अधिकार के तहत संरक्षित है।

ऐसा अक्सर देखने को मिलता है कि या तो सीवर के पानी का शोधन नहीं किया जाता है या शोधन प्लांट सही से काम नहीं कर रहे होते हैं। लिहाजा हमारे लिए स्वत: संज्ञान लेना आवश्यक हो गया है।

यमुना नदी से इसकी शुरुआत करते हुए पीठ ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश को नोटिस जारी किया है। साथ ही पीठ ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, आवासीय व शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया है।

पीठ ने वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा को कोर्ट सलाहकार नियुक्त किया है। शीर्ष अदालत ने प्रदूषण बोर्ड को रिपोर्ट दाखिल कर यमुना के किनारे उन नगर पालिकाओं की पहचान करने के लिए कहा है जहां जरूरत के मुताबिक सीवर शोधन प्लांट नहीं है। बोर्ड को यह भी बताने के लिए कहा है कि प्रदूषण के अन्य क्या स्रोत हैं।

देश की नदियों में प्रदूषण से व्यथित सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इन नदियों को सुधारने का बीड़ा उठाया। कोर्ट ने यमुना नदी से इसकी शुरुआत करने का निर्णय लिया है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने कहा है कि सीवर के पानी से दूषित हो रही नदियों को सुधारने का वक्त आ गया है।

दरअसल, यमुना में अमोनिया के खतरनाक स्तर पर दिल्ली जल बोर्ड की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सभी नदियों के प्रदूषण दूर करने का निर्णय लिया है। इस मसले को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए पीठ ने कहा है कि इसका असर न केवल आम जनता पर पड़ता है बल्कि उन सभी जीव जंतुओं पर पड़ता है जो भूजल पर आश्रित हैं। स्वच्छ पर्यावरण और प्रदूषणमुक्त पानी का अधिकार जीवन जीने के अधिकार के तहत संरक्षित है।

ऐसा अक्सर देखने को मिलता है कि या तो सीवर के पानी का शोधन नहीं किया जाता है या शोधन प्लांट सही से काम नहीं कर रहे होते हैं। लिहाजा हमारे लिए स्वत: संज्ञान लेना आवश्यक हो गया है।

यमुना नदी से इसकी शुरुआत करते हुए पीठ ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश को नोटिस जारी किया है। साथ ही पीठ ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, आवासीय व शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया है।

पीठ ने वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा को कोर्ट सलाहकार नियुक्त किया है। शीर्ष अदालत ने प्रदूषण बोर्ड को रिपोर्ट दाखिल कर यमुना के किनारे उन नगर पालिकाओं की पहचान करने के लिए कहा है जहां जरूरत के मुताबिक सीवर शोधन प्लांट नहीं है। बोर्ड को यह भी बताने के लिए कहा है कि प्रदूषण के अन्य क्या स्रोत हैं।


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