Haryana

सिंघु बॉर्डरः ठंड और बारिश से बेहाल किसान, 5000 रुपये तक किराये पर लिए मकान

राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 23 Jan 2021 02:43 PM IST

किसान आंदोलन: लंगर में किसान
– फोटो : अमर उजाला (फाइल)

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नए कृषि कानूनों के खिलाफ 59 दिनों से आंदोलनरत किसानों ने सिंघु बॉर्डर पर पूरा शहर बसा लिया है। वहीं किसान जाड़े और बारिश से भी बेहाल हैं। कई किसानों की ठंग लगने से मौत भी हो चुकी है। बारिश और ठंड से बचने के लिए किसानों ने आसपास के इलाकों में किराये के मकान भी खोज लिए हैं। किसान इन किराए के घरों का तीन से पांच हजार रुपये प्रति माह किराया चुका रहे हैं।

अमर उजाला से बातचीत में अमृतसर से आए किसान बलजीत सिंह ने कहा, जब से आंदोलन शुरू हुआ है तब से मैं और मेरा परिवार यहीं है। हम लोग गांव वालों के साथ उनके जत्थे में आ गए थे। कुछ दिन तक हम लोग बाहर खुले में रह लिए। लेकिन जैसे-जैसे ठंड शुरू हुई तो हमारी परेशानी बढ़ने लगी। इसके बाद बॉर्डर के पास गांवों में ही एक छोटा सा किराये का मकान खोज लिया। हम सभी दिनभर आंदोलन में शामिल होते हैं। रात को यहीं आराम करते हैं। मकान होने से ठंड और बारिश से भी बचाव हो जाता है। एक छोटे कमरे का हम पांच हजार रुपये किराया दे रहे हैं।

सिंघु बॉर्डर क्षेत्र में रहने वाले किशन राणा ने बताया कि ठंड और बारिश के पहले ही कुछ किसान आसपास के इलाकों में किराये के मकानों में रहने लगे थे। कोई किसान 15 दिन रुक रहा है तो कोई एक से दो महीने के लिए कमरा किराये पर ले रहा है। मैंने भी अपनी दुकान को कुछ लोगों को रहने के लिए किराये पर दे दिया है। वहां करीब पांच से सात लोग रोज रुकते है। आसपास के कई लोग अपने घर के कमरे एक से दो दिन के लिए भी किराए पर दे रहे हैं।

गौरतलब है कि वहीं किसान और सरकार के बीच गतिरोध बरकरार है। सुप्रीम कोर्ट के कमेटी वाले फैसले पर भी किसान संगठन संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। शुक्रवार को हुई बैठक में किसानों ने सरकार के डेढ़ साल कानूनों को निलंबित रखने के प्रस्ताव को सिरे से नकार दिया। किसान संगठनों की दो प्रमुख मांग है कि एमएसपी पर फसलों की खरीद की गारंटी दी जाए और तीनों कृषि कानूनों को रद्द किया जाए।  

 

सार

ठंड और बारिश के पहले ही कुछ किसान आसपास के इलाकों में किराये के मकानों में रहने लगे थे। कोई किसान 15 दिन रुक रहा है तो कोई एक से दो महीने के लिए कमरा किराये पर ले रहा है…

विस्तार

नए कृषि कानूनों के खिलाफ 59 दिनों से आंदोलनरत किसानों ने सिंघु बॉर्डर पर पूरा शहर बसा लिया है। वहीं किसान जाड़े और बारिश से भी बेहाल हैं। कई किसानों की ठंग लगने से मौत भी हो चुकी है। बारिश और ठंड से बचने के लिए किसानों ने आसपास के इलाकों में किराये के मकान भी खोज लिए हैं। किसान इन किराए के घरों का तीन से पांच हजार रुपये प्रति माह किराया चुका रहे हैं।

अमर उजाला से बातचीत में अमृतसर से आए किसान बलजीत सिंह ने कहा, जब से आंदोलन शुरू हुआ है तब से मैं और मेरा परिवार यहीं है। हम लोग गांव वालों के साथ उनके जत्थे में आ गए थे। कुछ दिन तक हम लोग बाहर खुले में रह लिए। लेकिन जैसे-जैसे ठंड शुरू हुई तो हमारी परेशानी बढ़ने लगी। इसके बाद बॉर्डर के पास गांवों में ही एक छोटा सा किराये का मकान खोज लिया। हम सभी दिनभर आंदोलन में शामिल होते हैं। रात को यहीं आराम करते हैं। मकान होने से ठंड और बारिश से भी बचाव हो जाता है। एक छोटे कमरे का हम पांच हजार रुपये किराया दे रहे हैं।

सिंघु बॉर्डर क्षेत्र में रहने वाले किशन राणा ने बताया कि ठंड और बारिश के पहले ही कुछ किसान आसपास के इलाकों में किराये के मकानों में रहने लगे थे। कोई किसान 15 दिन रुक रहा है तो कोई एक से दो महीने के लिए कमरा किराये पर ले रहा है। मैंने भी अपनी दुकान को कुछ लोगों को रहने के लिए किराये पर दे दिया है। वहां करीब पांच से सात लोग रोज रुकते है। आसपास के कई लोग अपने घर के कमरे एक से दो दिन के लिए भी किराए पर दे रहे हैं।

गौरतलब है कि वहीं किसान और सरकार के बीच गतिरोध बरकरार है। सुप्रीम कोर्ट के कमेटी वाले फैसले पर भी किसान संगठन संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। शुक्रवार को हुई बैठक में किसानों ने सरकार के डेढ़ साल कानूनों को निलंबित रखने के प्रस्ताव को सिरे से नकार दिया। किसान संगठनों की दो प्रमुख मांग है कि एमएसपी पर फसलों की खरीद की गारंटी दी जाए और तीनों कृषि कानूनों को रद्द किया जाए।  

 

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