Uttar Pradesh

सर सैय्यद अहमद खां पर टिप्पणी करने वाले को राहत नहीं 

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Updated Sun, 24 Jan 2021 09:16 PM IST

prayagraj news : सर सैयद अहमद खान।
– फोटो : prayagraj

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानी सर सैय्यद अहमद खां के बारे में अभद्र टिप्पणी करने के आरोपी अलीगढ़ के  एक संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक कुमार पाण्डेय को राहत देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने व सिविल लाइंस थाने अलीगढ़ में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने  कहा है कि याची यदि अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करे तो कोर्ट तुरंत उसे निस्तारित करे। 

याची पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय व इसके संस्थापक सर सैय्यद अहमद खां के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने, प्रेस को धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने वाले,दो समुदायों के बीच घृणा फैलाने वाला बयान जारी करने का आरोप लगाया गया है। 

कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जोगेन्दर सिंह केस में कहा है कि विवेचना के बाद गिरफ्तारी के लिए  जरूरी साक्ष्य मिलने पर ही अभियुक्त को गिरफ्तार किया जाए।अनावश्यक गिरफ्तारी न की जाए।इस आदेश के अमल करने पर कोर्ट ने बल दियाहै। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता तथा न्यायमूर्ति राजेन्द्र कुमार की खंडपीठ ने अशोक कुमार पाण्डेय की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया प्राथमिकी के तथ्यों से अपराध बनता है। प्राथमिकी रद्द नहीं की जा सकती है। और गिरफ्तार करने पर भी रोक लगाने से इंकार कर दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानी सर सैय्यद अहमद खां के बारे में अभद्र टिप्पणी करने के आरोपी अलीगढ़ के  एक संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक कुमार पाण्डेय को राहत देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने व सिविल लाइंस थाने अलीगढ़ में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने  कहा है कि याची यदि अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करे तो कोर्ट तुरंत उसे निस्तारित करे। 

याची पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय व इसके संस्थापक सर सैय्यद अहमद खां के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने, प्रेस को धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने वाले,दो समुदायों के बीच घृणा फैलाने वाला बयान जारी करने का आरोप लगाया गया है। 

कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जोगेन्दर सिंह केस में कहा है कि विवेचना के बाद गिरफ्तारी के लिए  जरूरी साक्ष्य मिलने पर ही अभियुक्त को गिरफ्तार किया जाए।अनावश्यक गिरफ्तारी न की जाए।इस आदेश के अमल करने पर कोर्ट ने बल दियाहै। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता तथा न्यायमूर्ति राजेन्द्र कुमार की खंडपीठ ने अशोक कुमार पाण्डेय की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया प्राथमिकी के तथ्यों से अपराध बनता है। प्राथमिकी रद्द नहीं की जा सकती है। और गिरफ्तार करने पर भी रोक लगाने से इंकार कर दिया है।

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