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शुक्रवार की वार्ता से तय होगा किसान आंदोलन का रुख, सबको सकारात्मक चर्चा की उम्मीद

राकेश टिकैत (बाएं), नरेंद्र तोमर (बीच) और दर्शन पाल सिंह (दाएं)
– फोटो : amar ujala

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लगातार बेनतीजा रही वार्ताओं के बाद किसानों और केंद्र सरकार के बीच शुक्रवार को एक बार फिर वार्ता होगी। अब तक प्रदूषण संबंधी पराली जलाने पर किसानों पर जुर्माना और बिजली बिल-2020 की अधिसूचना पर सहमति के बाद अब किसानों और सरकार के बीच कृषि कानूनों को निरस्त करने और एमएसपी पर कानूनी गारंटी पर निर्णय न होने की वजह से दोनों पक्षों में गतिरोध बरकरार है। 

सुप्रीम कोर्ट के दखल से कृषि कानूनों पर स्टे लगा दिया गया। कमेटी के समक्ष किसानों ने अपना पक्ष रखने के लिए पेश न होने की बात साफ कर दी है, ऐसे में शुक्रवार की वार्ता के नतीजे से ही आंदोलन का रुख तय होगा। अगर, दोनों पक्षों ने लचीला रुख अपनाया तो वार्ता के निर्णायक परिणाम हो सकते हैं।

शुक्रवार को होने वाली वार्ता में अगा दोनों पक्ष लचीला रुख अपनाए तो इस मसले पर कोई सार्थक निर्णय की उम्मीद की जा सकती है। उधर, किसान अभी भी तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने और एमएसपी को कानूनी गारंटी की मांग पर अड़े हुए हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि 26 जनवरी को किसान देश का सिर ऊंचा करेंगे। दुनिया की सबसे ऐतिहासिक परेड होगी। एक तरफ से जवान चलेगा और एक तरफ से किसान चलेगा। इंडिया गेट पर हमारे शहीदों की अमर ज्योति पर दोनों का मेल मिलाप होगा। साथ ही उन्होंने बैठकर को लेकर कहा कि सरकार से बातचीत के लिए हम तैयार हैं। सरकार कृषि कानूनों को वापस ले, इसी संबंध में शुक्रवार को मुलाकात होगी। 

वहीं दूसरी तरफ क्रांति किसान यूनियन के प्रमुख दर्शन पाल ने भी कहा कि हम बातचीत के लिए कल (शुक्रवार) की बैठक में जाएंगे। बैठक में सरकार कैसे व्यवहार करेगी, इसके आधार पर हम तय करेंगे कि आगे क्या करना है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा कृषि कानूनों की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति के सदस्य भूपिंदर सिंह मान के इस्तीफे को सही ठहराया। 

इससे पहले किसानों की सबसे पहली वार्ता 14 अक्तूबर, 2020 को हुई। इसके बाद 13 नवंबर, एक दिसंबर, 2020 के बाद आठ जनवरी को भी वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। ठीक एक हफ्ते बाद शुक्रवार को एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच वार्ता में एजेंडा रखने की तैयारी हो चुकी है। अब विज्ञान भवन में वार्ता के शुरू होने के बाद, सभी को इंतजार है कि दोनों पक्षों के बीच वार्ता से सरकार-किसानों के बीच गतिरोध खत्म करने के लिए कोई रास्ता कैसे निकले।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि प्रदर्शनकारी किसान संगठनों और सरकार के बीच नौवें दौर की वार्ता तय कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को होगी और केंद्र को उम्मीद है कि चर्चा सकारात्मक होगी।

तोमर ने कहा, ‘‘सरकार खुले मन से किसान नेताओं के साथ बातचीत करने को तैयार है।’’

उच्चतम न्यायालय द्वारा गतिरोध सुलझाने के लिए चार सदस्यीय कमेटी नियुक्त किए जाने और फिर एक सदस्य के इससे अलग हो जाने के कारण नौवें दौर की वार्ता को लेकर भ्रम की स्थिति को दूर करते हुए तोमर ने कहा कि सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच 15 जनवरी को दिन में 12 बजे से बैठक होगी।

किसान संगठनों ने कहा है कि वे सरकार के साथ वार्ता करने को तैयार हैं। लेकिन, वे उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त कमेटी के समक्ष पेश नहीं होना चाहते हैं। किसान संगठनों ने समिति के सदस्यों को लेकर आशंका जाहिर करते हुए कहा कि इसके सदस्य पूर्व में तीनों कानूनों की पैरवी कर चुके हैं।

लगातार बेनतीजा रही वार्ताओं के बाद किसानों और केंद्र सरकार के बीच शुक्रवार को एक बार फिर वार्ता होगी। अब तक प्रदूषण संबंधी पराली जलाने पर किसानों पर जुर्माना और बिजली बिल-2020 की अधिसूचना पर सहमति के बाद अब किसानों और सरकार के बीच कृषि कानूनों को निरस्त करने और एमएसपी पर कानूनी गारंटी पर निर्णय न होने की वजह से दोनों पक्षों में गतिरोध बरकरार है। 

सुप्रीम कोर्ट के दखल से कृषि कानूनों पर स्टे लगा दिया गया। कमेटी के समक्ष किसानों ने अपना पक्ष रखने के लिए पेश न होने की बात साफ कर दी है, ऐसे में शुक्रवार की वार्ता के नतीजे से ही आंदोलन का रुख तय होगा। अगर, दोनों पक्षों ने लचीला रुख अपनाया तो वार्ता के निर्णायक परिणाम हो सकते हैं।

शुक्रवार को होने वाली वार्ता में अगा दोनों पक्ष लचीला रुख अपनाए तो इस मसले पर कोई सार्थक निर्णय की उम्मीद की जा सकती है। उधर, किसान अभी भी तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने और एमएसपी को कानूनी गारंटी की मांग पर अड़े हुए हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि 26 जनवरी को किसान देश का सिर ऊंचा करेंगे। दुनिया की सबसे ऐतिहासिक परेड होगी। एक तरफ से जवान चलेगा और एक तरफ से किसान चलेगा। इंडिया गेट पर हमारे शहीदों की अमर ज्योति पर दोनों का मेल मिलाप होगा। साथ ही उन्होंने बैठकर को लेकर कहा कि सरकार से बातचीत के लिए हम तैयार हैं। सरकार कृषि कानूनों को वापस ले, इसी संबंध में शुक्रवार को मुलाकात होगी। 

वहीं दूसरी तरफ क्रांति किसान यूनियन के प्रमुख दर्शन पाल ने भी कहा कि हम बातचीत के लिए कल (शुक्रवार) की बैठक में जाएंगे। बैठक में सरकार कैसे व्यवहार करेगी, इसके आधार पर हम तय करेंगे कि आगे क्या करना है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा कृषि कानूनों की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति के सदस्य भूपिंदर सिंह मान के इस्तीफे को सही ठहराया। 

इससे पहले किसानों की सबसे पहली वार्ता 14 अक्तूबर, 2020 को हुई। इसके बाद 13 नवंबर, एक दिसंबर, 2020 के बाद आठ जनवरी को भी वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। ठीक एक हफ्ते बाद शुक्रवार को एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच वार्ता में एजेंडा रखने की तैयारी हो चुकी है। अब विज्ञान भवन में वार्ता के शुरू होने के बाद, सभी को इंतजार है कि दोनों पक्षों के बीच वार्ता से सरकार-किसानों के बीच गतिरोध खत्म करने के लिए कोई रास्ता कैसे निकले।


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वार्ता तय कार्यक्रम के मुताबिक होगी : तोमर


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