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शिमला से दिखेगा अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन, 400 किमी ऊपर अंतरिक्ष में मूली उगा रहे वैज्ञानिक

अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन(फाइल)
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला, चंडीगढ़ और नई दिल्ली से रविवार सुबह दो बार 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन देखा जा सकेगा। अंतरिक्ष में वैज्ञानिक जहां मूली उगाने का प्रयोग कर रहे हैं, वहीं कैंसर और दिल के रोगों पर भी शोध कर रहे हैं। नासा ने इसकी जानकारी ऑनलाइन साझा की है। पहले यह एक मिनट और उसके बाद चार मिनट के लिए देखा जा सकेगा।

नासा की और से भेजा गया यह स्पेस स्टेशन 21 से 24 फरवरी के बीच हर दिन अलग-अलग समय पर दिखेगा। यह कब-कब कहां से कहां जाता दिखेगा, इसकी भी नासा ने समयसारिणी जारी की है। यह स्पेस स्टेशन पूर्व में भी शिमला और अन्य जगहों से अंतरिक्ष में चलते हुए बहुत ही चमकीले तारे की तरह नजर आता रहा है। विज्ञान के विद्यार्थी, पर्यटक में जहां इसे देखने की उत्सुकता है, वहीं आम लोगों के लिए यह कौतुहल का विषय है।

वैज्ञानिक क्यों उगा रहे मूली 
स्पेस स्टेशन में वैज्ञानिक मूली क्यों उगा रहे हैं, इस बारे में नासा की ओर से जारी मिशन सारांश में स्थिति स्पष्ट की गई है। इसके अनुसार जब भी अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा या मंगल के लिए रवाना होते हैं तो उस वक्त वहां खाने-पीने की चीजें उगाने के प्रयोग करते हैं। माइक्रोग्रेविटी और स्पेस की अन्य परिस्थितियों में इसे कैसे सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है, इस बारे में प्रयोग किए जा रहे हैं। मूली कम समय में उगती है। यह आनुवांशिकता के अध्ययन के लिए उपयुक्त है और पोषक तत्वों से भी भरपूर होती है। 

चार देशों के छह वैज्ञानिक हैं स्टेशन में सवार
यात्री दल-64 में चार देशों के कुल छह यात्री अक्तूूबर 2020 में इस अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में गए। ये अप्रैल 2021 तक इसमें मौजूद होंगे। इनमें रूस से सर्जेरी रीझीकोव, अमेरिका से केट रूबीन्स, माइक होपकिन्स, विक्टर ग्लोवर, शेनन वाकर, कजाकिस्तान से सरगे कुद स्वेरकोव और जापान से सौउची नगूची शामिल हैं। 

शिमला में रविवार तड़के 4:36 बजे यह पूर्व दिशा में 13 डिग्री पर निकलेगा, तो पूर्व-उत्तर-पूर्व में 10 डिग्री पर छिप जाएगा। दूसरी बार यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम में 17 डिग्री पर सुबह 6:09 बजे दिखेगा और चार मिनट बाद उत्तर-उत्तर-पूर्व में छिपेगा। वहीं, चंडीगढ़ में रविवार सुबह 4:36 बजे पूर्व-उत्तर-पूर्व में 11 डिग्री पर निकलेगा और एक मिनट तक नजर आएगा और 10 डिग्री पर इसी पूर्व-उत्तर-पूर्व कोण में छिपेगा।

दूसरी बार पश्चिम-उत्तर-पश्चिम में 6:09 मिनट पर दिखना शुरू होगा और चार मिनट बाद यह 10 डिग्री पर उत्तर-उत्तर-पूर्व में छिपेगा। नई दिल्ली में रविवार तड़के 4:35 बजे पर पूर्व-उत्तर-पूर्व में 11 डिग्री पर उदय होगा और एक मिनट तक नजर आएगा। इसके बाद यह 10 डिग्री पर इसी पूर्व-उत्तर-पूर्व कोण में छिपेगा। दूसरी बार सुबह 6:09 बजे पर नई दिल्ली में 3 मिनट के लिए फिर दिखेगा। 15 डिग्री पश्चिम-उत्तर-पश्चिम में उगकर यह 10 डिग्री उत्तर में छिपेगा।

चंडीगढ़ में यह स्पेस स्टेशन 22 फरवरी को सुबह 5:24 बजे उत्तर में 28 डिग्री में दिखेगा। दो मिनट बाद यह उत्तर-उत्तर-पूर्व में 10 डिग्री पर अस्त होगा। 24 फरवरी को सुबह 5:26 बजे यह उत्तर में 11 डिग्री पर दिखना शुरू होगा। एक मिनट बाद उत्तर में ही 10 डिग्री में छिप जाएगा। नई दिल्ली में यह स्पेस स्टेशन 22 फरवरी को सुबह 5:24 बजे उत्तर में 18 डिग्री में दिखेगा। एक मिनट बाद यह उत्तर-उत्तर-पूर्व में 10 डिग्री पर अस्त होगा। 
 

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला, चंडीगढ़ और नई दिल्ली से रविवार सुबह दो बार 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन देखा जा सकेगा। अंतरिक्ष में वैज्ञानिक जहां मूली उगाने का प्रयोग कर रहे हैं, वहीं कैंसर और दिल के रोगों पर भी शोध कर रहे हैं। नासा ने इसकी जानकारी ऑनलाइन साझा की है। पहले यह एक मिनट और उसके बाद चार मिनट के लिए देखा जा सकेगा।

नासा की और से भेजा गया यह स्पेस स्टेशन 21 से 24 फरवरी के बीच हर दिन अलग-अलग समय पर दिखेगा। यह कब-कब कहां से कहां जाता दिखेगा, इसकी भी नासा ने समयसारिणी जारी की है। यह स्पेस स्टेशन पूर्व में भी शिमला और अन्य जगहों से अंतरिक्ष में चलते हुए बहुत ही चमकीले तारे की तरह नजर आता रहा है। विज्ञान के विद्यार्थी, पर्यटक में जहां इसे देखने की उत्सुकता है, वहीं आम लोगों के लिए यह कौतुहल का विषय है।

वैज्ञानिक क्यों उगा रहे मूली 

स्पेस स्टेशन में वैज्ञानिक मूली क्यों उगा रहे हैं, इस बारे में नासा की ओर से जारी मिशन सारांश में स्थिति स्पष्ट की गई है। इसके अनुसार जब भी अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा या मंगल के लिए रवाना होते हैं तो उस वक्त वहां खाने-पीने की चीजें उगाने के प्रयोग करते हैं। माइक्रोग्रेविटी और स्पेस की अन्य परिस्थितियों में इसे कैसे सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है, इस बारे में प्रयोग किए जा रहे हैं। मूली कम समय में उगती है। यह आनुवांशिकता के अध्ययन के लिए उपयुक्त है और पोषक तत्वों से भी भरपूर होती है। 

चार देशों के छह वैज्ञानिक हैं स्टेशन में सवार

यात्री दल-64 में चार देशों के कुल छह यात्री अक्तूूबर 2020 में इस अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में गए। ये अप्रैल 2021 तक इसमें मौजूद होंगे। इनमें रूस से सर्जेरी रीझीकोव, अमेरिका से केट रूबीन्स, माइक होपकिन्स, विक्टर ग्लोवर, शेनन वाकर, कजाकिस्तान से सरगे कुद स्वेरकोव और जापान से सौउची नगूची शामिल हैं। 


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कब कहां कितने वक्त नजर आएगा स्टेशन 

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