Uttar Pradesh

विधायक विजय मिश्र, माफिया दिलीप मिश्र और महेंद्र ने कराया था मंत्री नंदी पर हमला, जांच अधिकारी ने दी गवाही

prayagraj news : मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी और ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र (फाइल फोटो)।
– फोटो : prayagraj

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उत्तर प्रदेश के नागरिक उड्डयन, अल्पसंख्यक कल्याण, राजनीतिक पेंशन, मुस्लिम वक्फ एवं हज मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर 2010 में हुए जानलेवा हमले के मामले की सुनवाई आज एमपी एमएलए कोर्ट में हुई, जिसमें मामले के फर्स्ट इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर एके निगम की एमपी एमएलए कोर्ट में गवाही हुई।

गवाही के दौरान निगम ने मंत्री नंदी पर हुए जानलेवा हमले से जुड़े अहम तथ्यों का खुलासा कोई के सामने किया। कोर्ट के सामने राजेश यादव द्वारा किए गए खुलासे को कोर्ट के सामने रखा। मामले की पैरवी बम ब्लास्ट मामलों के एक्सपर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता एडवोकेट जेपी शर्मा ने की।

एके निगम ने कोर्ट को बताया कि किस प्रकार से उन्होंने पूरे मामले की विवेचना शुरू की, किस प्रकार उन्होंने गवाहों को परीक्षण किया, किस प्रकार उन्होंने कृपाशंकर पांडे और राजेश यादव को एग्जामिन किया। जिसमें उन लोगों ने इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर को बताया था कि किस प्रकार महेंद्र मिश्रा उसके रिश्तेदारों जानने वालों और विजय मिश्रा ने साजिश करके कैबिनेट मंत्री पर जानलेवा हमला कराया। जिसमें संयोगवश मंत्री जी बच गए। लेकिन एक पत्रकार और एक सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई थी। मंत्री समेत 6 लोग घायल हुए थे। एके निगम ने साजिश की गुत्थी कोर्ट के सामने खोली। उन्होंने कोर्ट के सामने राजेश यादव के बयानों का खुलासा किया।

विजय मिश्रा की तरफ से 22 जनवरी को अपनी मौजूदगी में गवाही कराने की बात कही गई थी, लेकिन वे आज नहीं आए। गाइडलाइन के अनुसार कोर्ट ने एके निगम की गवाही कराई। हर हफ्ते केस की सुनवाई हो इस पर हाईकोर्ट का आदेश है। कोतवाली को दो बार माल मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया जा चुका है।

इसके बाद भी आज भी कोतवाली पुलिस ने माल मुकदमा कोर्ट में पेश नहीं किया। जिसकी वजह से एके निगम की गवाही अधूरी रह गई। 4 फरवरी अगली डेट है। कोर्ट ने कोतवाली पुलिस को आदेश दिया कि अगली डेट पर माल मुकदमा जरूर पेश करें। अधिवक्ता जेपी शर्मा ने बताया कि जल्द ही गवाही मुकम्मल होकर शुरू हो जाएगी। तीन महीने में मुकदमे का फैसला आ सकता है। एके निगम ने कृपाशंकर व राजेश यादव को एग्जामिन किया था। राजेश यादव ने उन्हें अपने बयान में बताया था कि पूरी साजिश में दिलीप मिश्रा और इसके साथ शामिल थे। 

तत्कालीन एसएचओ कोतवाली व फर्स्ट इन्वेस्टिगेटिव ऑफिस एके निगम ने आज कोर्ट को बताया कि घटना के बाद वे मौके पर गए थे। कंप्लेन में 3 लोगों का नाम था। दिलीप मिश्रा, कृपा शंकर पांडे और राजेश यादव। राजेश यादव ने जांच के दौरान यह माना था और गवाही दी थी कि महेंद्र मिश्रा, ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्रा और दिलीप मिश्रा ने साजिश के तहत घटना को अंजाम दिया। राजेश पायलट महेश मिश्रा का ड्राइवर था। महेंद्र ने राजेश पायलट को कैबिनेट मंत्री पर हमले की जिम्मेदारी सौंपी थी। दिलीप मिश्रा ने महेंद्र मिश्रा से कहा था कि नंदी की वजह से उनका राजनीतिक कैरियर चौपट हो गया है। इस इसलिए इस काम को पूरा कराओ।

सार

  • विवेचना अधिकारी एके निगम ने एमपी एमएलए कोर्ट में दी गवाही
  • मंत्री नंदी पर जानलेवा हमले के मामले की हुई सुनवाई
  • राजेश यादव ने दिया था बयान
  • 4 फरवरी को फिर होगी सुनवाई

विस्तार

उत्तर प्रदेश के नागरिक उड्डयन, अल्पसंख्यक कल्याण, राजनीतिक पेंशन, मुस्लिम वक्फ एवं हज मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर 2010 में हुए जानलेवा हमले के मामले की सुनवाई आज एमपी एमएलए कोर्ट में हुई, जिसमें मामले के फर्स्ट इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर एके निगम की एमपी एमएलए कोर्ट में गवाही हुई।

गवाही के दौरान निगम ने मंत्री नंदी पर हुए जानलेवा हमले से जुड़े अहम तथ्यों का खुलासा कोई के सामने किया। कोर्ट के सामने राजेश यादव द्वारा किए गए खुलासे को कोर्ट के सामने रखा। मामले की पैरवी बम ब्लास्ट मामलों के एक्सपर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता एडवोकेट जेपी शर्मा ने की।

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