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विडंबनाः मुरादनगर के जिस श्मशान घाट में हुआ हादसा, उसी में आज 11 का होगा अंतिम संस्कार

अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Updated Mon, 04 Jan 2021 05:56 AM IST

श्मशान घाट में बड़ा हादसा
– फोटो : अमर उजाला

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जो लोग रविवार को मुरादनगर के बंबा श्मशान घाट में जयराम की अंत्येष्टि में शामिल हुए थे, उनमें से 11 लोगों को नहीं पता था कि सोमवार को उनका भी अंतिम संस्कार इसी श्मशान घाट में होगा। 11 लोगों की चिताएं एक साथ श्मशान घाट में जलेंगी। इस हादसे के बाद उखलारसी गांव के अलावा मुरादनगर का हर व्यक्ति दुखी है। जिन लोगों को इस घटना के बारे में पता चला वह एक दूसरे से दुख बांटता हुआ नजर आया। सबसे बड़ा दुख यह होगा कि बंबा श्मशान घाट एक साथ 11 सामूहिक चिताओं के जलने का गवाह बनेगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि श्मशान घाट में हुए हादसे में मरने वाले लोग आसपास के ही रहने वाले हैं। उनका अंतिम संस्कार बंबा श्मशान घाट में ही होगा। लोगों का कहना है कि किसी ने नहीं सोचा था कि जो लोग अंतिम संस्कार कराने के लिए आए हैं, वह कभी वापस नहीं आएंगे।

कई घरों में नहीं रहे कमाने वाले
श्मशान घाट में हादसे के बाद कई घरों में कमाने वाले नहीं रहे। नीरज मजदूरी करते थे। उनके चार छोटे-छोटे बच्चे हैं जो पढ़ाई कर रहे हैं। अब उनके घर में पत्नी और चार बच्चे रह गए हैं। कोई कमाने वाला नहीं है। यहीं स्थिति सुनील की है। वह किराए के मकान में रहते थे और अकेले कमाने वाले थे। उनके चार छोटे छोटे बच्चे हैं, दो वक्त की रोटी की समस्या खड़ी हो गई। जोगेंद्र कार पेंटर का काम करते थे। उनके दो बच्चे हैं। उनके परिवार में भी कोई कमाने वाला नहीं है। पत्नी और दो बच्चों की पढ़ाई और रोटी की दिक्कत होगी।

संगम कॉलोनी में नहीं जले चूल्हे
संगम कॉलोनी में आठ लोगों की मौत होने के बाद अधिकतर घरों में चूल्हे ही नहीं जले। लोग सदमें में थे कि ये क्या हो गया। रात तक मृतकों के घर सांत्वना देने के लिए लोग पहुंचते रहे। वहीं, कुछ परिवार के छोटे-छोटे बच्चों को देखकर लोगों की आंखों में आंसू थे कि इन बच्चों का अब क्या होगा।

सार

  • हादसे में मरने वाले 11 लोग आसपास के ही रहने वाले हैं
  • बंबा श्मशान घाट में सोमवार को होगा अंतिम संस्कार

विस्तार

जो लोग रविवार को मुरादनगर के बंबा श्मशान घाट में जयराम की अंत्येष्टि में शामिल हुए थे, उनमें से 11 लोगों को नहीं पता था कि सोमवार को उनका भी अंतिम संस्कार इसी श्मशान घाट में होगा। 11 लोगों की चिताएं एक साथ श्मशान घाट में जलेंगी। इस हादसे के बाद उखलारसी गांव के अलावा मुरादनगर का हर व्यक्ति दुखी है। जिन लोगों को इस घटना के बारे में पता चला वह एक दूसरे से दुख बांटता हुआ नजर आया। सबसे बड़ा दुख यह होगा कि बंबा श्मशान घाट एक साथ 11 सामूहिक चिताओं के जलने का गवाह बनेगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि श्मशान घाट में हुए हादसे में मरने वाले लोग आसपास के ही रहने वाले हैं। उनका अंतिम संस्कार बंबा श्मशान घाट में ही होगा। लोगों का कहना है कि किसी ने नहीं सोचा था कि जो लोग अंतिम संस्कार कराने के लिए आए हैं, वह कभी वापस नहीं आएंगे।

कई घरों में नहीं रहे कमाने वाले

श्मशान घाट में हादसे के बाद कई घरों में कमाने वाले नहीं रहे। नीरज मजदूरी करते थे। उनके चार छोटे-छोटे बच्चे हैं जो पढ़ाई कर रहे हैं। अब उनके घर में पत्नी और चार बच्चे रह गए हैं। कोई कमाने वाला नहीं है। यहीं स्थिति सुनील की है। वह किराए के मकान में रहते थे और अकेले कमाने वाले थे। उनके चार छोटे छोटे बच्चे हैं, दो वक्त की रोटी की समस्या खड़ी हो गई। जोगेंद्र कार पेंटर का काम करते थे। उनके दो बच्चे हैं। उनके परिवार में भी कोई कमाने वाला नहीं है। पत्नी और दो बच्चों की पढ़ाई और रोटी की दिक्कत होगी।

संगम कॉलोनी में नहीं जले चूल्हे

संगम कॉलोनी में आठ लोगों की मौत होने के बाद अधिकतर घरों में चूल्हे ही नहीं जले। लोग सदमें में थे कि ये क्या हो गया। रात तक मृतकों के घर सांत्वना देने के लिए लोग पहुंचते रहे। वहीं, कुछ परिवार के छोटे-छोटे बच्चों को देखकर लोगों की आंखों में आंसू थे कि इन बच्चों का अब क्या होगा।


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