Bihar

राम विलास पासवान मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित, उनके नाम है ये अनूठा रिकॉर्ड

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Updated Tue, 26 Jan 2021 05:48 AM IST

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राम विलास पासवान को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान दिया गया है। जेपी आंदोलन के सक्रिय नेता और लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक राम विलास पासवान ने 32 साल के राजनीतिक जीवन में 9 बार लोकसभा और दो बार राज्य सभा सांसद रहे। उन्होंने 11 बार चुनाव लड़े जिनमें 9 बार उनकी जीत हुई।

बिहार के खगड़िया में पैदा हुए रामविलास पासवान के नाम छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अनूठा रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने 16वीं लोकसभा में चुनाव नहीं लड़ा लेकिन मोदी सरकार में उपभोक्ता मामलों के मंत्री बने। 8 अक्तूबर 2020 में बीमारी के चलते उनका निधन हो गया।

पासवान भारतीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में से एक थे। वे लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष एवं एनडीए सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी रहे। सोलहवीं लोकसभा में बिहार के हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। वह 9 बार लोकसभा सांसद तथा 2 बार राज्यसभा सांसद रहे। 
 

पासवान ने पिछले 32 वर्षों में 11 चुनाव लड़े थे और उनमें से नौ जीते। 17वीं लोकसभा में उन्होने चुनाव नहीं लड़ा था लेकिन मोदी सरकार में एक बार फिर से उपभोक्ता मामलों के मंत्री रहे। पासवान के पास 6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अनूठा रिकॉर्ड भी रहा। 
 

     
राम विलास पासवान को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान दिया गया है। जेपी आंदोलन के सक्रिय नेता और लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक राम विलास पासवान ने 32 साल के राजनीतिक जीवन में 9 बार लोकसभा और दो बार राज्य सभा सांसद रहे। उन्होंने 11 बार चुनाव लड़े जिनमें 9 बार उनकी जीत हुई।

बिहार के खगड़िया में पैदा हुए रामविलास पासवान के नाम छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अनूठा रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने 16वीं लोकसभा में चुनाव नहीं लड़ा लेकिन मोदी सरकार में उपभोक्ता मामलों के मंत्री बने। 8 अक्तूबर 2020 में बीमारी के चलते उनका निधन हो गया।

पासवान भारतीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में से एक थे। वे लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष एवं एनडीए सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी रहे। सोलहवीं लोकसभा में बिहार के हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। वह 9 बार लोकसभा सांसद तथा 2 बार राज्यसभा सांसद रहे। 

 

पासवान ने पिछले 32 वर्षों में 11 चुनाव लड़े थे और उनमें से नौ जीते। 17वीं लोकसभा में उन्होने चुनाव नहीं लड़ा था लेकिन मोदी सरकार में एक बार फिर से उपभोक्ता मामलों के मंत्री रहे। पासवान के पास 6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अनूठा रिकॉर्ड भी रहा। 

 

     

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