Uttar Pradesh

यूपी: हत्या का आरोप सिद्ध होने पर तीन भाइयों को उम्रकैद, साल 2008 में गोली मार कर की गई थी हत्या

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 20 Jan 2021 10:44 PM IST

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वाराणसी के विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम पशुपति नाथ मिश्र की अदालत ने सिगरा थाना के लल्लापुरा में बशीर अहमद की हत्या में तीन सगे भाइयों की जमील शीशा वाला, टुल्लू उर्फ  जलील और शकील अहमद को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामले में आरोपी चौथे सगे भाई खलील की विचारण के दौरान मौत हो गई थी।

प्रभारी डीजीसी मुनीब सिंह चौहान, एडीजीसी रोहित मौर्य और वादिनी के अधिवक्ता एमएस खान व संजय राय ने पैरवी की। वादिनी नाजिमा ने चार नवंबर 2008 को सिगरा थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप लगाया कि वह अपने भाई लल्लापुरा के बशीर अहमद के साथ दवा लेने जा रही थी।

शाम के समय लल्लापुरा स्थित हाजी बिल्डिंग के समीप उसी क्षेत्र के जमील शीशा वाला, जलील, शकील और खलील सामने से आए। शकील के ललकारने पर जमील ने गोली मार दी और अस्पताल में बशीर की मौत हो गई। नाजिमा इस वारदात की प्रत्यक्षदर्शी साक्षी रही।

प्रभारी डीजीसी के मुताबिक इस घटना के पहले बीसी के लाखों रुपये के विवाद को लेकर बशीर के भाई शकील की हत्या वर्ष 2004 में कर दी गई थी। उस मुकदमे का वादी बशीर था। उस मुकदमे की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पुष्कर उपाध्याय की अदालत में लंबित है और वशीर की गवाही भी हो चुकी है।

इस बीच, आरोपियों ने पैसा न देने के लिए बशीर की 2008 में हत्या कर दी। अदालत ने विचारण के बाद बशीर की हत्या में अभियुक्तों को दोषी पाया। तीनों भाईयों को उम्र कैद की सजा के साथ जमील को 15 हजार और अन्य दोनों को भाईयों को 10-10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है।

वाराणसी के विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम पशुपति नाथ मिश्र की अदालत ने सिगरा थाना के लल्लापुरा में बशीर अहमद की हत्या में तीन सगे भाइयों की जमील शीशा वाला, टुल्लू उर्फ  जलील और शकील अहमद को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामले में आरोपी चौथे सगे भाई खलील की विचारण के दौरान मौत हो गई थी।

प्रभारी डीजीसी मुनीब सिंह चौहान, एडीजीसी रोहित मौर्य और वादिनी के अधिवक्ता एमएस खान व संजय राय ने पैरवी की। वादिनी नाजिमा ने चार नवंबर 2008 को सिगरा थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप लगाया कि वह अपने भाई लल्लापुरा के बशीर अहमद के साथ दवा लेने जा रही थी।

शाम के समय लल्लापुरा स्थित हाजी बिल्डिंग के समीप उसी क्षेत्र के जमील शीशा वाला, जलील, शकील और खलील सामने से आए। शकील के ललकारने पर जमील ने गोली मार दी और अस्पताल में बशीर की मौत हो गई। नाजिमा इस वारदात की प्रत्यक्षदर्शी साक्षी रही।

प्रभारी डीजीसी के मुताबिक इस घटना के पहले बीसी के लाखों रुपये के विवाद को लेकर बशीर के भाई शकील की हत्या वर्ष 2004 में कर दी गई थी। उस मुकदमे का वादी बशीर था। उस मुकदमे की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पुष्कर उपाध्याय की अदालत में लंबित है और वशीर की गवाही भी हो चुकी है।

इस बीच, आरोपियों ने पैसा न देने के लिए बशीर की 2008 में हत्या कर दी। अदालत ने विचारण के बाद बशीर की हत्या में अभियुक्तों को दोषी पाया। तीनों भाईयों को उम्र कैद की सजा के साथ जमील को 15 हजार और अन्य दोनों को भाईयों को 10-10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है।

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