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म्यांमार : सैन्य नेताओं पर अमेरिका ने लगाए प्रतिबंध, राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक नए शासकीय आदेश को दी मंजूरी

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने म्यांमार में अमेरिकी संपत्तियों और धन को अवरुद्ध करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए साथ ही सैन्य तख्तापलट के नेताओं के साथ संयुक्त राज्य की विदेश नीति के लिए एक खतरे के रूप में निपटने की घोषणा की।

जो बाइडन ने कहा कि ये इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सेना ने म्यांमार की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई नागरिक सरकार को उखाड़ फेंका और सरकारी नेताओं, राजनेताओं, मानवाधिकार रक्षकों को अनुचित रूप से गिरफ्तार किया और हिरासत में लिया। 

आदेश के अनुसार, सभी अमेरिकी स्वामित्व वाली संपत्तियों को अवरुद्ध कर दिया गया है और म्यांमार अर्थव्यवस्था के संचालन में भुगतान, निर्यात, निकासी, को निपटाया नहीं जा सकता है।

2 फरवरी के बाद म्यांमार और म्यांमार सरकार के सैन्य या सुरक्षा बलों के लिए भी धनराशि को अवरुद्ध कर दिया गया है। इसके बाद सैन्य शक्तियों को किसी तरह का लाभ भी नहीं दिया जाएगा।

म्यांमार : सैन्य नेताओं पर अमेरिका ने लगाए प्रतिबंध
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने म्यांमार सैन्य नेताओं पर तख्तापलट के मद्देनजर कई प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। उन्होंने बताया, आज मैं कई कार्रवाइयों की घोषणा कर रहा हूं और म्यांमार में तख्तापलट के जिम्मेदार नेताओं पर प्रतिबंध लगाकर इसकी शुरुआत कर रहा हूं। 

बाइडन ने कहा, म्यांमार सरकार को अमेरिका से मदद के रूप में मिले एक अरब डॉलर के कोष तक वहां के जनरलों की अनुचित तरीके से पहुंच को रोकने के लिए अमेरिका की सरकार यह प्रतिबंध लगा रही है। उन्होंने इस संबंध में एक नए शासकीय आदेश को मंजूरी दी।

इसके तहत तख्तापलट का निर्देश देने वाले सैन्य नेताओं, उनके कारोबारी हितों और उनके परिवार के सदस्यों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लग गया है। बाइडन ने कहा, हम निर्यात पर भी सख्त नियंत्रण लगाने वाले हैं। अमेरिका की ऐसी संपत्ति को जब्त किया जा रहा है जिनसे म्यांमार की सरकार को लाभ होता था।

उन्होंने कहा, अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ हिंसा अस्वीकार्य है। बाइडन ने कहा, आज एक बार फिर मैं म्यांमार सेना से अपील करता हूं कि वह आंग सान सू की और विन मिंट समेत लोकतांत्रिक नेताओं को तत्काल रिहा करे।

प्रदर्शन को अल्पसंख्यकों का भी समर्थन
म्यांमार में सेना के खिलाफ प्रदर्शन बृहस्पतिवार को भी जारी रहे। इस बीच, देश के बड़े अल्पसंख्यक जातीय समूह ने भी प्रदर्शन को अपना समर्थन देते हुए रैली निकाली और पिछले सप्ताह जुंटा द्वारा सरकार पर नियंत्रण साधने के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की कार्रवाई से बढ़ावा मिला।

यहां राजधानी नेपीता और सबसे बड़े शहर यंगून व मांडले में हजारों लोगों ने रैलियां निकालीं और सेना के विरोध में प्रदर्शन किया। दक्षिणी शहर दाववी में बृहस्पतिवार को वरिष्ठ सैन्य जनरल मिन आंग ह्लाइंग के पोस्टर जलाए गए। वे तख्तापलट करने वाले प्रमुख अधिकारी थे।

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arvind007

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