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म्यांमार की सेना ने अपने स्वार्थ में लोकतंत्र का घोंटा गला

म्यांमार में सैनिक शासन फिर कायम होने के हफ्ते भर के भीतर जिस तरह का विरोध दिखा है, वह अभूतपूर्व है। सेना ने बीते रविवार 31 जनवरी की रात को तख्ता पलटा। मंगलवार से जनता के स्तर पर विरोध की आवाजें उठने लगीं। शनिवार 6 फरवरी को यंगून की सड़कों पर हजारों लोग उमड़ पड़े।

ये शुरुआती जन प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि लोग देश में स्थिरता कायम करने के लिए सत्ता संभालने के सेना के दावे पर यकीन नहीं कर रहे हैं। इस बीच विदेशी मीडिया में छप रही खबरों से भी लोगों का ये यकीन गहरा हुआ है कि सेनाध्यक्ष मिन आंग हलैंग ने अपने स्वार्थ की रक्षा के लिए लोकतंत्र का गला दबाया है।

अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मिन के खिलाफ कार्रवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा था। उन पर आरोप है कि उनकी देखरेख में ही म्यांमार के प्रांत रखाइन में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ सेना ने संगठित हिंसा की।

इस हिंसा के कारण लगभग सवा सात लाख रोहिंग्या मुसलमानों को शरणार्थी बनकर बांग्लादेश जाना पड़ा। संयुक्त राष्ट्र के जांच दल ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ कार्रवाई नरसंहार के इरादे से की गई थी। इस रिपोर्ट में म्यांमार की सेना पर सामूहिक बलात्कार, यातना, आगजनी और अवैध हत्याएं  करने का आरोप लगाया गया था।

2019 में अमेरिका ने मिन पर मानवाधिकारों के हनन के आरोप में व्यक्तिगत प्रतिबंध लगा दिया था। उन पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भी इस इल्जाम में केस चल रहा है। इस बीच वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सत्ता हथियाने के पीछे मिन का मकसद अपने, अपने परिवार और सेना के वित्तीय हितों की रक्षा करना भी है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक मिन पांच महीने बाद रिटायर होने वाले थे। उसके बाद उनके और उनके बेटे के कारोबार को अभी मिली अवैध सुरक्षा खत्म हो जाती। एशिया टाइम्स के मुताबिक मिन और उनके बेटे आंग पाये सोन मेडिकल सामग्रियों की सप्लाई की कंपनी- ए एंड एम माहर चलाते हैं, खाद्य और दवा के कारोबार के लिए लाइसेंस दिलवाने का काम करते हैं, और साथ ही दवा और मेडिकल टेक्नोलॉजी के कारोबार में शामिल हैं।

आंग पाये सोन एक बीच (समुद्र तटीय) रिजॉर्ट के मालिक भी हैं। ये 22.22 एकड़ पर बना ये रिजॉर्ट सरकारी लीज की जमीन पर है। इस बीच को बनाने का कॉन्ट्रैक्ट जिस स्काई वन नाम की कंपनी को मिला था, उसके मालिक भी आंग पाये सोन ही हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक आंग पाये सोन की पत्नी एक मैनुफैक्चरिंग और ट्रेडिंग कंपनी की मालकिन हैं।

मिन आंग हालैंग की बेटी खिन थिरी थेट मोन मीडिया प्रोडक्शन कंपनी सेवेन्थ सेन्स की मालिक हैं। ये कंपनी बड़े बजट की फिल्में भी बनाती है। 2019 की संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बताया गया था कि मिन के कारोबारी हित शेयर होल्डिंग्स के जरिए दूर- दूर तक फैले हुए हैं।

सीएनएन की रिपोर्ट में बताया गया है कि म्यांमार की सेना एक बेहद धनी संगठन है। सैनिक अधिकारियों के संबंध व्यापक दायरे में अनगिनत कंपनियों से हैं। ये कंपनियां खनन, तंबाकू औऱ बीयर उत्पादन, पर्यटन, बैंकिंग और परिवहन क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

पिछले साल एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक रिपोर्ट में बताया था कि म्यांमार की सेना की लगभग हर इकाई के शेयर सेना की फंडिंग से चलने वाले कंपनी समूह म्यांमार इकॉनोमिक होल्डिंग्स लिमिटेड (एमईएचएल) में हैं। इस कंपनी समूह की कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ पार्टनरशिप है।

म्यांमार में 1962 से 1988 तक सेना ने लगातार राज किया। उसके बाद कराए गए चुनाव में आंग सान सू ची की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी जीती, लेकिन सेना ने उन्हें सत्ता नहीं सौंपी। तब सू ची को लंबे समय के लिए जेल में डाल दिया गया था। सेना का अर्ध हस्तांतरण आखिरकार 2015 में जाकर हो पाया।

इतनी लंबी अवधि तक सत्ता में रहने के कारण सैनिक जनरलों ने व्यापक रूप से कारोबारी हित बनाए हैं। जानकारों का कहना है कि वे उसमें कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते। इसलिए उन्होंने बीते हफ्ते फिर से तख्ता पलट दिया।

यंगून स्थित विश्लेषक डेविड मैथिएसन ने सीएनएन से कहा- म्यांमार की सेना बिना किसी सुधार से गुजरा, अधिनायकवादी और क्रूर संगठन है। सैनिक कंपनी समूह खुलेआम मानव अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी करते हैं। तख्ता पलट करने वाले मिन आंग हलैंग को अपने साथी अधिकारियों का पूरा समर्थन मिला हुआ है, क्योंकि उन अफसरों को भी सेना के कारोबारी उद्यमों से लाभ होता है। 

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arvind007

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