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मानेसर लैंड स्कैम मामला : पूर्व चीफ टाउन प्लानर समेत तीन अफसरों और दो कंपनी पर चार्जशीट दायर 

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मानेसर लैंड स्कैम मामले में सीबीआई की विशेष अदालत में तीन लोगों और दो बिल्डरों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। इस मामले में अगली सुनवाई 18 जनवरी को होगी। पूर्व चीफ टाउन प्लानर रहे जगदीप सिंह, असिस्टेंट टाउन प्लानर सतीश कुमार अरोड़ा, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट राजवीर सिंह, दो कंपनी कमांडर रियलेटर्स और धर्मा कंपनी प्राइवेट लिमिटेड पर चार्जशीट दायर की गई है। 

चार्जशीट के अनुसार किसानों की जमीन एक्वायर करने के बाद उनकी जमीन प्राइवेट बिल्डरों को बेच दी गई थी। सीबीआई ने जांच के बीच जमीन अधिग्रहण में कथित अनियमितता को लेकर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 की धारा 420, 465, 467, 468, 471 और 120 बी के तहत केस दर्ज किया था। आरोप है कि पूरे मामले में हरियाणा सरकार के अधिकारियों और बिल्डरों के बीच सांठगांठ थी। 

दरअसल, पिछली सरकार ने आईएमटी मानेसर की स्थापना के लिए 900 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने के लिए मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला के ग्रामीणों को सेक्शन 4, 6 और 9 के नोटिस थमा दिए थे। इसके बाद प्राइवेट बिल्डरों ने किसानों को अधिग्रहण का डर दिखाकर जमीनों के सौदे किए और जमीन को कौड़ियों के भाव खरीद लिया।

यह है मामला
अगस्त 2014 में निजी बिल्डरों ने हरियाणा सरकार के अज्ञात जनसेवकों के साथ मिलीभगत से गुरुग्राम जिले में मानसेर, नौरंगपुर और लखनौला गांवों के किसानों और भूस्वामियों को अधिग्रहण का भय दिखाकर उनकी करीब 400 एकड़ जमीन सस्ते दामों में खरीद ली थी। कांग्रेस की तत्कालीन हुड्डा सरकार पर करीब 900 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करके उसे औने-पौने दाम पर बेचने का आरोप है। इस मामले में अब तक 39 लोगों पर चार्जशीट दायर की जा चुकी है। इस मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भी आरोपी बनाया गया है।

मानेसर लैंड स्कैम मामले में सीबीआई की विशेष अदालत में तीन लोगों और दो बिल्डरों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। इस मामले में अगली सुनवाई 18 जनवरी को होगी। पूर्व चीफ टाउन प्लानर रहे जगदीप सिंह, असिस्टेंट टाउन प्लानर सतीश कुमार अरोड़ा, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट राजवीर सिंह, दो कंपनी कमांडर रियलेटर्स और धर्मा कंपनी प्राइवेट लिमिटेड पर चार्जशीट दायर की गई है। 

चार्जशीट के अनुसार किसानों की जमीन एक्वायर करने के बाद उनकी जमीन प्राइवेट बिल्डरों को बेच दी गई थी। सीबीआई ने जांच के बीच जमीन अधिग्रहण में कथित अनियमितता को लेकर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 की धारा 420, 465, 467, 468, 471 और 120 बी के तहत केस दर्ज किया था। आरोप है कि पूरे मामले में हरियाणा सरकार के अधिकारियों और बिल्डरों के बीच सांठगांठ थी। 

दरअसल, पिछली सरकार ने आईएमटी मानेसर की स्थापना के लिए 900 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने के लिए मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला के ग्रामीणों को सेक्शन 4, 6 और 9 के नोटिस थमा दिए थे। इसके बाद प्राइवेट बिल्डरों ने किसानों को अधिग्रहण का डर दिखाकर जमीनों के सौदे किए और जमीन को कौड़ियों के भाव खरीद लिया।

यह है मामला

अगस्त 2014 में निजी बिल्डरों ने हरियाणा सरकार के अज्ञात जनसेवकों के साथ मिलीभगत से गुरुग्राम जिले में मानसेर, नौरंगपुर और लखनौला गांवों के किसानों और भूस्वामियों को अधिग्रहण का भय दिखाकर उनकी करीब 400 एकड़ जमीन सस्ते दामों में खरीद ली थी। कांग्रेस की तत्कालीन हुड्डा सरकार पर करीब 900 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करके उसे औने-पौने दाम पर बेचने का आरोप है। इस मामले में अब तक 39 लोगों पर चार्जशीट दायर की जा चुकी है। इस मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भी आरोपी बनाया गया है।


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