Uttar Pradesh

मकर संक्रांति पर निभाई जाएगी प्राचीन परंपरा, काशी पुराधिपति को लगेगा आज खिचड़ी का भोग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 14 Jan 2021 12:06 AM IST

बाबा विश्वनाथ का रुद्राक्ष श्रृंगार
– फोटो : अमर उजाला।

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मकर संक्रांति पर बाबा विश्वनाथ को खिचड़ी का भोग अर्पित किया जाएगा। हर साल की तरह मकर संक्रांति पर खिचड़ी की परंपरा का निर्वहन होगा, लेकिन दंडी स्वामियों को प्रसाद नहीं मिलेगा। मकर संक्रांति पर मंदिर की मध्याह्न भोग आरती में बाबा को खिचड़ी का भोग लगेगा। बाबा के भोग की थाली में खिचड़ी के व्यंजन, दही साथ तिल के लड्डू भी होंगे।

पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में मकर संक्रांति पर बाबा को खिचड़ी भोग अर्पित करने की प्राचीन परंपरा है। भोग आरती के बाद 21 संन्यासियों को खिचड़ी प्रसाद खिलाने के बाद गरीबों में वितरण किया जाता था। वर्ष 1983 में मंदिर का अधिग्रहण होने के बाद भी परंपरा जीवित रखी गई।

मंदिर प्रशासन की ओर से संन्यासियों समेत अन्य भक्तों के बीच खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया जाता रहा है। हालांकि इस बार निर्माण कार्य के चलते केवल परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। इस साल निर्माण कार्य और कोरोना के कारण कोई तैयारी नहीं है। मंदिर कार्यालय के अनुसार निर्माण के चलते जगह का अभाव है।

मकर संक्रांति पर बाबा विश्वनाथ को खिचड़ी का भोग अर्पित किया जाएगा। हर साल की तरह मकर संक्रांति पर खिचड़ी की परंपरा का निर्वहन होगा, लेकिन दंडी स्वामियों को प्रसाद नहीं मिलेगा। मकर संक्रांति पर मंदिर की मध्याह्न भोग आरती में बाबा को खिचड़ी का भोग लगेगा। बाबा के भोग की थाली में खिचड़ी के व्यंजन, दही साथ तिल के लड्डू भी होंगे।

पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में मकर संक्रांति पर बाबा को खिचड़ी भोग अर्पित करने की प्राचीन परंपरा है। भोग आरती के बाद 21 संन्यासियों को खिचड़ी प्रसाद खिलाने के बाद गरीबों में वितरण किया जाता था। वर्ष 1983 में मंदिर का अधिग्रहण होने के बाद भी परंपरा जीवित रखी गई।

मंदिर प्रशासन की ओर से संन्यासियों समेत अन्य भक्तों के बीच खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया जाता रहा है। हालांकि इस बार निर्माण कार्य के चलते केवल परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। इस साल निर्माण कार्य और कोरोना के कारण कोई तैयारी नहीं है। मंदिर कार्यालय के अनुसार निर्माण के चलते जगह का अभाव है।


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