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मकर संक्रांति: गुजरात हाईकोर्ट का पतंगबाजी पर रोक लगाने से इनकार, सरकारी पाबंदियों को मंजूरी

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गुजरात हाईकोर्ट ने 14 जनवरी को उत्तरायण और मकर संक्रांति से जुड़ी पतंगबाजी पर पूर्ण रोक लगाने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने कोरोना वायरस महामारी के संदर्भ में राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित पाबंदियों को मंजूरी दे दी। गुजरात में उत्तरायण के दौरान पतंगबाजी एक बड़ी गतिविधि है। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की छतों पर पतंग उड़ाते हैं।

मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला की खंडपीठ ने मकर संक्रांति पर पतंगबाजी पर सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदियों पर अपनी सहमति दी। कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, ‘हम किसी के विरोधी नहीं हैं और किसी की आजीविका छीनना नहीं चाहते हैं। लेकिन किसी अन्य की जिंदगी खतरे में डाल देना भी विचारणीय विषय है। लोगों पर बड़ी जिम्मेदरी है।’

बता दें कि कुछ याचिकाकर्ताओं ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए पतंगबाजी पर पूर्ण रोक का अनुरोध किया है जबकि कुछ अन्य ने राहत की दरख्वास्त की है। सरकार ने खुले मैदानों और सार्वनजिक क्षेत्रों में पतंगबाजी पर रोक लगा रखी है । सरकारी नियमों के अनुसार छतों से पतंग उड़ाने के दौरान मास्क पहनना, सामाजिक दूरी और सेनेटाइजर का उपयोग जरूरी है।

ईटानगर: केंद्र ने अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में परशुराम कुंड तीर्थस्थल को संवारने के लिए 37.87 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। राज्यपाल ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) डॉ. बी डी मिश्रा ने पर्यटन मंत्री नकप नालो और पर्यटन सचिव साधना देवरी को राजभवन में एक बैठक के दौरान इस बारे में अवगत कराया।

राज्यपाल ने कहा कि परशुराम कुंड देश के मुख्य तीर्थस्थल में से एक है जहां साल भर श्रद्धालु आते हैं और मकर संक्रांति के दौरान लोहित नदी में स्नान करते हैं। उन्होंने कहा, ‘आगंतुकों की सुविधा और कुंड को संवारने के लिए राज्य सरकार ने एक योजना तैयार की थी और केंद्र ने इसके लिए 37.87 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

गुजरात हाईकोर्ट ने 14 जनवरी को उत्तरायण और मकर संक्रांति से जुड़ी पतंगबाजी पर पूर्ण रोक लगाने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने कोरोना वायरस महामारी के संदर्भ में राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित पाबंदियों को मंजूरी दे दी। गुजरात में उत्तरायण के दौरान पतंगबाजी एक बड़ी गतिविधि है। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की छतों पर पतंग उड़ाते हैं।

मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला की खंडपीठ ने मकर संक्रांति पर पतंगबाजी पर सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदियों पर अपनी सहमति दी। कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, ‘हम किसी के विरोधी नहीं हैं और किसी की आजीविका छीनना नहीं चाहते हैं। लेकिन किसी अन्य की जिंदगी खतरे में डाल देना भी विचारणीय विषय है। लोगों पर बड़ी जिम्मेदरी है।’

बता दें कि कुछ याचिकाकर्ताओं ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए पतंगबाजी पर पूर्ण रोक का अनुरोध किया है जबकि कुछ अन्य ने राहत की दरख्वास्त की है। सरकार ने खुले मैदानों और सार्वनजिक क्षेत्रों में पतंगबाजी पर रोक लगा रखी है । सरकारी नियमों के अनुसार छतों से पतंग उड़ाने के दौरान मास्क पहनना, सामाजिक दूरी और सेनेटाइजर का उपयोग जरूरी है।


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अरुणाचल: परशुराम कुंड के कायाकल्प के लिए 37.8 करोड़ आवंटित


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