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बेलगाम को लेकर महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच फिर बढ़ी तनातनी

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई
Updated Fri, 22 Jan 2021 12:08 AM IST

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे
– फोटो : पीटीआई (फाइल)

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बेलगाम को लेकर जारी विवाद में एक बार फिर महाराष्ट्र और कर्नाटक की सरकार के बीच तनातनी बढ़ गई है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को राज्य के सांसदों के साथ बैठक में बेलगाम को महाराष्ट्र में मिलाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का आह्वान किया जिसका भाजपा के सांसदों ने भी समर्थन किया है। इससे मराठी के मुद्दे पर भाजपा भी शिवेसना, कांग्रेस एनसीपी की महाविकास आघाड़ी के साथ आ गई है।

महाराष्ट्र सरकार हर वर्ष केंद्रीय बजट से पहले राज्य के सांसदों की बैठक बुलाती है। इसी संबंध में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को संसद सत्र शुरू होने से पूर्व राज्य के सर्वदलीय सांसदों की बैठक बुलाई थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ठाकरे ने बेलगाम मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सांसदों का आह्वान किया कि बेलगाम के मामले में सारे सांसद एकजुट हों और मराठी भाईयों को अपने साथ लाने का प्रयत्न करें। इसका भाजपा ने भी समर्थन किया। 

भाजपा सांसद गिरीश बापट ने कहा कि बेलगाम को लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ हम लोगों की चर्चा हुई। खासकर कर्नाटक के सीमा भाग में रहने वाले मराठीभाषी क्षेत्र को महाराष्ट्र में मिलाने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जिस भी फोरम पर लेकर जाएंगे, सारे सांसद उसका साथ देंगे। इस बीच सीमा विवाद को लेकर शिवसैनिकों ने कर्नाटक सीमा पर आंदोलन किया और कर्नाटक में घुसने का प्रयास किया लेकिन कर्नाटक पुलिस ने उन्हें सीमा में प्रवेश करने से रोक दिया।

क्या है विवाद
दरअसल, बीती 17 जनवरी को बेलगाम तथा अन्य सीमावर्ती इलाके को महाराष्ट्र में शामिल करवाने के संघर्ष में मारे गए लोगों की याद में महाराष्ट्र एकीकरण समिति ने शहीदी दिवस मनाया था। इसको लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ट्वीट किया कि कर्नाटक के कब्जे वाले मराठी भाषी तथा सांस्कृतिक इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल करना सीमा विवाद में शहीद होने वाले के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हम इसके लिए एकजुट हैं और हमारी प्रतिज्ञा दृढ़ है। शहीदों के सम्मान में हम यह वादा करते हैं। इसके बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने इसका दूसरे दिन ही जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की एक इंच जमीन महाराष्ट्र को नहीं दूंगा। इससे शिवसेना भड़क गई है।

सुप्रीम कोर्ट में है सीमा विवाद का मामला
बेलगाम के मुद्दे पर महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच बीते 70 साल से अधिक समय से यह विवाद कायम है। बेलगाम और इससे सटे अन्य क्षेत्र मराठी बाहुल्य है। जो पूर्व में बांबे प्रेसिडेंसी का हिस्सा भी रहा है। लेकिन आजादी के बाद साल 1956 में नए राज्य के पुनर्गठन में यह क्षेत्र कर्नाटक में चला गया। तब से लेकर यहां के लोग महाराष्ट्र एकीकरण समिति के माध्यम से इस इलाके को महाराष्ट्र में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। यह मामला वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है। 

बेलगाम को लेकर जारी विवाद में एक बार फिर महाराष्ट्र और कर्नाटक की सरकार के बीच तनातनी बढ़ गई है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को राज्य के सांसदों के साथ बैठक में बेलगाम को महाराष्ट्र में मिलाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का आह्वान किया जिसका भाजपा के सांसदों ने भी समर्थन किया है। इससे मराठी के मुद्दे पर भाजपा भी शिवेसना, कांग्रेस एनसीपी की महाविकास आघाड़ी के साथ आ गई है।

महाराष्ट्र सरकार हर वर्ष केंद्रीय बजट से पहले राज्य के सांसदों की बैठक बुलाती है। इसी संबंध में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को संसद सत्र शुरू होने से पूर्व राज्य के सर्वदलीय सांसदों की बैठक बुलाई थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ठाकरे ने बेलगाम मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सांसदों का आह्वान किया कि बेलगाम के मामले में सारे सांसद एकजुट हों और मराठी भाईयों को अपने साथ लाने का प्रयत्न करें। इसका भाजपा ने भी समर्थन किया। 

भाजपा सांसद गिरीश बापट ने कहा कि बेलगाम को लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ हम लोगों की चर्चा हुई। खासकर कर्नाटक के सीमा भाग में रहने वाले मराठीभाषी क्षेत्र को महाराष्ट्र में मिलाने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जिस भी फोरम पर लेकर जाएंगे, सारे सांसद उसका साथ देंगे। इस बीच सीमा विवाद को लेकर शिवसैनिकों ने कर्नाटक सीमा पर आंदोलन किया और कर्नाटक में घुसने का प्रयास किया लेकिन कर्नाटक पुलिस ने उन्हें सीमा में प्रवेश करने से रोक दिया।

क्या है विवाद

दरअसल, बीती 17 जनवरी को बेलगाम तथा अन्य सीमावर्ती इलाके को महाराष्ट्र में शामिल करवाने के संघर्ष में मारे गए लोगों की याद में महाराष्ट्र एकीकरण समिति ने शहीदी दिवस मनाया था। इसको लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ट्वीट किया कि कर्नाटक के कब्जे वाले मराठी भाषी तथा सांस्कृतिक इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल करना सीमा विवाद में शहीद होने वाले के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हम इसके लिए एकजुट हैं और हमारी प्रतिज्ञा दृढ़ है। शहीदों के सम्मान में हम यह वादा करते हैं। इसके बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने इसका दूसरे दिन ही जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की एक इंच जमीन महाराष्ट्र को नहीं दूंगा। इससे शिवसेना भड़क गई है।

सुप्रीम कोर्ट में है सीमा विवाद का मामला

बेलगाम के मुद्दे पर महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच बीते 70 साल से अधिक समय से यह विवाद कायम है। बेलगाम और इससे सटे अन्य क्षेत्र मराठी बाहुल्य है। जो पूर्व में बांबे प्रेसिडेंसी का हिस्सा भी रहा है। लेकिन आजादी के बाद साल 1956 में नए राज्य के पुनर्गठन में यह क्षेत्र कर्नाटक में चला गया। तब से लेकर यहां के लोग महाराष्ट्र एकीकरण समिति के माध्यम से इस इलाके को महाराष्ट्र में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। यह मामला वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है। 

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