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बिहार: सीएम नीतीश कुमार को अपने फार्मूले पर पूरी तरह राजी नहीं कर पाई भाजपा

नरेंद्र मोदी-नीतीश कुमार
– फोटो : PTI

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बिहार मंत्रिमंडल में संख्या बल की दृष्टि से भाजपा भले ही बड़े भाई की भूमिका में आ गई है, लेकिन पार्टी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने फॉर्मूले पर पूरी तरह राजी नहीं कर पाई। मंत्रिमंडल में भाजपा के मंत्रियों की संख्या जदयू से दो अधिक है।

मंत्रिमंडल विस्तार: सीटों के आधार पर मंत्रिमंडल में जगह चाहती थी भाजपा  
दरअसल, भाजपा का फॉर्मूला था कि सीटों की संख्या के आधार पर मंत्रिमंडल में उसे 64 फीसदी और जदयू को 36 फीसदी जगह मिले। नीतीश 50-50 फार्मूले पर अडिग थे। इसी जद्दोजहद में मंत्रिमंडल विस्तार में करीब दो महीने की देरी हुई।

अब सरकार में जदयू के पास सीएम समेत 14 पद हैं जबकि भाजपा कोटे के 16 मंत्री हैं। यह अनुपात क्रमश: 45 फीसदी और 51 फीसदी बैठता है। विधानसभा चुनाव में भाजपा को 74 तो जदयू को 43 सीटें हासिल हुई थी।

चुनाव जीतने के बाद नीतीश ने 14 मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। विस्तार में नीतीश सरकार में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का सूखा खत्म हुआ है। भाजपा की ओर से शाहनवाज हुसैन और बसपा से जदयू में शामिल हुए जमा खान को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। जमा खान पर दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।

ऐसे बनी सहमति 
मंत्रिमंडल विस्तार पर जारी गतिरोध को दूर करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को भी शामिल किया गया। जदयू सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद होने वाले विस्तार में पार्टी को एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री का पद देने पर सहमति बनी है।

फिर निशाने पर आ सकते हैं नीतीश
सरकार गठन के तत्काल बाद दागी मेवालाल चौधरी को मंत्री बनाने के मामले में विवादों में घिरे नीतीश अब विस्तार के बाद नए सिरे से हमले का सामना कर सकते हैं। गौरतलब है कि बसपा से जदयू में आए जमा खान को मंत्री बनाने पर विवाद शुरू हो गया है।

खान पर हत्या की कोशिश, हिंसा भड़काने और आर्म्स एक्ट जैसे दो दर्जन संगीन मामले दर्ज हैं। गौरतलब है कि मेवा लाल मामले में विवाद होने के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

बिहार मंत्रिमंडल में संख्या बल की दृष्टि से भाजपा भले ही बड़े भाई की भूमिका में आ गई है, लेकिन पार्टी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने फॉर्मूले पर पूरी तरह राजी नहीं कर पाई। मंत्रिमंडल में भाजपा के मंत्रियों की संख्या जदयू से दो अधिक है।

मंत्रिमंडल विस्तार: सीटों के आधार पर मंत्रिमंडल में जगह चाहती थी भाजपा  

दरअसल, भाजपा का फॉर्मूला था कि सीटों की संख्या के आधार पर मंत्रिमंडल में उसे 64 फीसदी और जदयू को 36 फीसदी जगह मिले। नीतीश 50-50 फार्मूले पर अडिग थे। इसी जद्दोजहद में मंत्रिमंडल विस्तार में करीब दो महीने की देरी हुई।

अब सरकार में जदयू के पास सीएम समेत 14 पद हैं जबकि भाजपा कोटे के 16 मंत्री हैं। यह अनुपात क्रमश: 45 फीसदी और 51 फीसदी बैठता है। विधानसभा चुनाव में भाजपा को 74 तो जदयू को 43 सीटें हासिल हुई थी।

चुनाव जीतने के बाद नीतीश ने 14 मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। विस्तार में नीतीश सरकार में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का सूखा खत्म हुआ है। भाजपा की ओर से शाहनवाज हुसैन और बसपा से जदयू में शामिल हुए जमा खान को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। जमा खान पर दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।

ऐसे बनी सहमति 

मंत्रिमंडल विस्तार पर जारी गतिरोध को दूर करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को भी शामिल किया गया। जदयू सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद होने वाले विस्तार में पार्टी को एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री का पद देने पर सहमति बनी है।

फिर निशाने पर आ सकते हैं नीतीश

सरकार गठन के तत्काल बाद दागी मेवालाल चौधरी को मंत्री बनाने के मामले में विवादों में घिरे नीतीश अब विस्तार के बाद नए सिरे से हमले का सामना कर सकते हैं। गौरतलब है कि बसपा से जदयू में आए जमा खान को मंत्री बनाने पर विवाद शुरू हो गया है।

खान पर हत्या की कोशिश, हिंसा भड़काने और आर्म्स एक्ट जैसे दो दर्जन संगीन मामले दर्ज हैं। गौरतलब है कि मेवा लाल मामले में विवाद होने के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

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arvind007

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