Uttar Pradesh

बाबा विश्वनाथ के दरबार में लगाया गया खिचड़ी का भोग, दंडी स्वामियों ने पहली बार मंदिर में नहीं खाई खिचड़ी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 15 Jan 2021 12:00 AM IST

काशी विश्वनाथ का मनोहारी स्वरूप
– फोटो : अमर उजाला

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मकर संक्रांति पर काशी की परंपरा के अनुसार बाबा दरबार से लेकर शहर के मंदिरों में खिचड़ी भोग की परंपरा निभाई गई। वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर में पहली बार बाबा के खिचड़ी का भोग प्रसाद दंडी स्वामियों को नहीं मिला। गुरुवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मध्याह्न भोग आरती में बाबा को खिचड़ी भोग अर्पित किया गया। मंदिर कार्यालय के अनुसार परिसर में चल रहे निर्माण कार्य के कारण दंडी स्वामियों को भोजन कराने का इंतजाम नहीं हो सका।

कोरोना संक्रमण के कारण मार्च से ही मंदिर परिसर में दंडी स्वामियों को भोग प्रसाद और दक्षिणा नहीं मिल रही है। वहीं विश्वनाथ गली के मुख्य गेट के सामने मौजूद खिचड़ी बाबा के मंदिर पर भी खिचड़ी के प्रसाद के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। यहां पर वर्ष भर सुबह प्रसाद के तौर पर खिचड़ी खिलाई जाती है। मकर संक्रांति पर तो कड़ाह पर कड़ाह लगातार खिचड़ी का अनवरत लंगर चलता रहा। शहर के अन्य मंदिरों में भगवान को भोग लगाने के बाद खिचड़ी के प्रसाद का वितरण शुरू हुआ तो हर-हर महादेव से मंदिरों का प्रांगण भी गूंज उठा।

मार्कंडेय महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन कर किया दान
मकर संक्रांति पर्व पर गुरुवार को कैथी स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। पूर्वांचल के कई जनपदों के लोगों ने गंगा-गोमती संगम में डुबकी लगाकर बाबा को जलाभिषेक किया। वहीं महिलाओं ने स्नान के बाद अन्न, तिल, गुड़ आदि का दान किया। दानियालपुर डुबकियां स्थित एसओएस बालग्राम में बच्चों ने मकर संक्रांति पर्व का आनंद उठाया। बालग्राम के निदेशक मनोज मिश्र ने बच्चों को खाने पीने के सामानों के साथ गुब्बारे व पतंग दिए।

रोहनिया के शूलटंकेश्वर महादेव माधोपुर में लोगों ने गंगा में स्नान कर बाबा का दर्शन पूजन कर दान पुण्य किया। प्राचीन शिव धाम मंदिर दरेखू, बाणासुर मंदिर नरउर हनुमान मंदिर बीरभानपुर पर भी लोगों ने दर्शन पूजन किया।

मकर संक्रांति पर काशी की परंपरा के अनुसार बाबा दरबार से लेकर शहर के मंदिरों में खिचड़ी भोग की परंपरा निभाई गई। वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर में पहली बार बाबा के खिचड़ी का भोग प्रसाद दंडी स्वामियों को नहीं मिला। गुरुवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मध्याह्न भोग आरती में बाबा को खिचड़ी भोग अर्पित किया गया। मंदिर कार्यालय के अनुसार परिसर में चल रहे निर्माण कार्य के कारण दंडी स्वामियों को भोजन कराने का इंतजाम नहीं हो सका।

कोरोना संक्रमण के कारण मार्च से ही मंदिर परिसर में दंडी स्वामियों को भोग प्रसाद और दक्षिणा नहीं मिल रही है। वहीं विश्वनाथ गली के मुख्य गेट के सामने मौजूद खिचड़ी बाबा के मंदिर पर भी खिचड़ी के प्रसाद के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। यहां पर वर्ष भर सुबह प्रसाद के तौर पर खिचड़ी खिलाई जाती है। मकर संक्रांति पर तो कड़ाह पर कड़ाह लगातार खिचड़ी का अनवरत लंगर चलता रहा। शहर के अन्य मंदिरों में भगवान को भोग लगाने के बाद खिचड़ी के प्रसाद का वितरण शुरू हुआ तो हर-हर महादेव से मंदिरों का प्रांगण भी गूंज उठा।

मार्कंडेय महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन कर किया दान

मकर संक्रांति पर्व पर गुरुवार को कैथी स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। पूर्वांचल के कई जनपदों के लोगों ने गंगा-गोमती संगम में डुबकी लगाकर बाबा को जलाभिषेक किया। वहीं महिलाओं ने स्नान के बाद अन्न, तिल, गुड़ आदि का दान किया। दानियालपुर डुबकियां स्थित एसओएस बालग्राम में बच्चों ने मकर संक्रांति पर्व का आनंद उठाया। बालग्राम के निदेशक मनोज मिश्र ने बच्चों को खाने पीने के सामानों के साथ गुब्बारे व पतंग दिए।

रोहनिया के शूलटंकेश्वर महादेव माधोपुर में लोगों ने गंगा में स्नान कर बाबा का दर्शन पूजन कर दान पुण्य किया। प्राचीन शिव धाम मंदिर दरेखू, बाणासुर मंदिर नरउर हनुमान मंदिर बीरभानपुर पर भी लोगों ने दर्शन पूजन किया।


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