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बाइडन-पुतिन वार्ता का संदेशः रूस से गैर-जरूरी टकराव नहीं चाहते बाइडन

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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन से फोन पर बात की। इसे एक महत्वपूर्ण घटना समझा गया है। इसकी वजह यह है कि बाइडन और उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी का रूस के प्रति सख्त रुख रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ इसी आरोप में पहला महाभियोग प्रस्ताव लाई थी कि 2016 के चुनाव में ट्रंप ने रूस की मदद ली थी।

पुतिन दुनिया के उन नेताओं में हैं, जिन्होंने पिछले नवंबर के राष्ट्रपति चुनाव में बाइडन की जीत के बाद उन्हें सबसे देर से बधाई दी। इसीलिए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की नजर इस पर लगी हुई है कि बाइडन के दौर में रूस के साथ अमेरिका का रिश्ता क्या मोड़ लेता है। आरोप है कि ट्रंप ने अपने कार्यकाल में अपने अधिकारियों की अनसुनी करते हुए रूस और पुतिन के प्रति नरम रुख अपनाए रखा था।

बाइडन और पुतिन के बीच हुई बातचीत के बारे में व्हाइट हाउस और अमेरिकी मीडिया ने जो जानकारी दी है, रूस की तरफ से दी गई जानकारी में जोर उनसे अलग मुद्दों पर है। अमेरिका की तरफ से आई जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति बाइडन ने पुतिन से दो-टूक कहा कि रूस अगर अमेरिका या उसके सहयोगी देशों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, तो अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सुदृढ़ कदम उठाएगा।

व्हाइट हाउस के बयान के मुताबिक बाइडन ने हाल में अमेरिका पर हुए साइबर हमलों का मामला उठाया, जिसके पीछे रूस का हाथ होने का आरोप लगाया गया था। साथ ही उन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिकी फौज पर हमला करने के लिए रूस को धन देने और पुतिन विरोधी नेता अलेक्सी नवालनी को जहर दिए जाने से संबंधित आरोपों पर भी सख्ती से बात की।

लेकिन क्रेमलिन से जारी बयान में इनमें से किसी मुद्दे की चर्चा नहीं की गई है। इसके बदले इसमें कहा गया कि पूरी बातचीत के दौरान रूस और अमेरिकी नेताओं ने उपयोगी और खुल कर बातचीत की। पुतिन ने बाइडन से कहा कि रूस और अमेरिका के रिश्ते सामान्य हुए, तो इसका फायदा दोनों देशों को मिलेगा।

रूसी मीडिया के मुताबिक दोनों राष्ट्रपतियों की बातचीत नई परमाणु हथियार विनियमन संधि (स्टार्ट), कोरोना महामारी के खिलाफ सहयोग और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित रही। क्रेमलिन के बयान के मुताबिक दोनों राष्ट्रपतियों ने नई स्टार्ट संधि की दिशा में अब तक हुई प्रगति पर संतोष जताया।

विश्लेषकों का कहना है कि बाइडन-पुतिन वार्ता का साफ संदेश यह है कि बाइडन प्रशासन रूस के साथ टकराव नहीं चाहता। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों बीच सीधा संवाद बनने का यही मतलब है कि आगे टकराव के हालात को नियंत्रित किया जा सके।

लेकिन बाइडन ने यह संकेत भी जरूर दिया है कि रूस के प्रति उनका रुख पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप की तुलना में ज्यादा सख्त होगा। खबरों के मुताबिक बाइडन ने साफ तौर पर पुतिन से कहा कि 2016 और 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनावों में रूस ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की थी। ट्रंप ने ये मुद्दा कभी पुतिन के सामने नहीं उठाया था।

ट्रंप प्रशासन ने दूसरे अंतरराष्ट्रीय मसलों की तरह रूस के प्रति भी अस्थिर रुख अपनाया था। एक तरफ पुतिन के प्रति वे नरम दिखते थे, वहीं उन्होंने रूस के साथ कई संधियों से अमेरिका को हटा लिया। इनमें स्टार्ट और ओपन स्काई संधि भी शामिल हैं। इसके अलावा यूक्रेन के मुद्दे पर उन्होंने रूस पर कई कड़े प्रतिबंध लगा दिए।

इससे रूस को चाहे जो नुकसान हुआ हो, अमेरिका को कोई लाभ नहीं हुआ। अब माना जा रहा है कि बाइडन एक सुसंगत और नियोजित रूस नीति अपनाएंगे। इसमें गैर जरूरी टकराव को टाला जाएगा और जहां तक संभव है, वहां तक सहयोग करने की नीति पर अमेरिका चलेगा।

सार

ट्रंप प्रशासन ने दूसरे अंतरराष्ट्रीय मसलों की तरह रूस के प्रति भी अस्थिर रुख अपनाया था। एक तरफ पुतिन के प्रति वे नरम दिखते थे, वहीं उन्होंने रूस के साथ कई संधियों से अमेरिका को हटा लिया…

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन से फोन पर बात की। इसे एक महत्वपूर्ण घटना समझा गया है। इसकी वजह यह है कि बाइडन और उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी का रूस के प्रति सख्त रुख रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ इसी आरोप में पहला महाभियोग प्रस्ताव लाई थी कि 2016 के चुनाव में ट्रंप ने रूस की मदद ली थी।

पुतिन दुनिया के उन नेताओं में हैं, जिन्होंने पिछले नवंबर के राष्ट्रपति चुनाव में बाइडन की जीत के बाद उन्हें सबसे देर से बधाई दी। इसीलिए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की नजर इस पर लगी हुई है कि बाइडन के दौर में रूस के साथ अमेरिका का रिश्ता क्या मोड़ लेता है। आरोप है कि ट्रंप ने अपने कार्यकाल में अपने अधिकारियों की अनसुनी करते हुए रूस और पुतिन के प्रति नरम रुख अपनाए रखा था।

बाइडन और पुतिन के बीच हुई बातचीत के बारे में व्हाइट हाउस और अमेरिकी मीडिया ने जो जानकारी दी है, रूस की तरफ से दी गई जानकारी में जोर उनसे अलग मुद्दों पर है। अमेरिका की तरफ से आई जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति बाइडन ने पुतिन से दो-टूक कहा कि रूस अगर अमेरिका या उसके सहयोगी देशों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, तो अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सुदृढ़ कदम उठाएगा।

व्हाइट हाउस के बयान के मुताबिक बाइडन ने हाल में अमेरिका पर हुए साइबर हमलों का मामला उठाया, जिसके पीछे रूस का हाथ होने का आरोप लगाया गया था। साथ ही उन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिकी फौज पर हमला करने के लिए रूस को धन देने और पुतिन विरोधी नेता अलेक्सी नवालनी को जहर दिए जाने से संबंधित आरोपों पर भी सख्ती से बात की।

लेकिन क्रेमलिन से जारी बयान में इनमें से किसी मुद्दे की चर्चा नहीं की गई है। इसके बदले इसमें कहा गया कि पूरी बातचीत के दौरान रूस और अमेरिकी नेताओं ने उपयोगी और खुल कर बातचीत की। पुतिन ने बाइडन से कहा कि रूस और अमेरिका के रिश्ते सामान्य हुए, तो इसका फायदा दोनों देशों को मिलेगा।

रूसी मीडिया के मुताबिक दोनों राष्ट्रपतियों की बातचीत नई परमाणु हथियार विनियमन संधि (स्टार्ट), कोरोना महामारी के खिलाफ सहयोग और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित रही। क्रेमलिन के बयान के मुताबिक दोनों राष्ट्रपतियों ने नई स्टार्ट संधि की दिशा में अब तक हुई प्रगति पर संतोष जताया।

विश्लेषकों का कहना है कि बाइडन-पुतिन वार्ता का साफ संदेश यह है कि बाइडन प्रशासन रूस के साथ टकराव नहीं चाहता। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों बीच सीधा संवाद बनने का यही मतलब है कि आगे टकराव के हालात को नियंत्रित किया जा सके।

लेकिन बाइडन ने यह संकेत भी जरूर दिया है कि रूस के प्रति उनका रुख पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप की तुलना में ज्यादा सख्त होगा। खबरों के मुताबिक बाइडन ने साफ तौर पर पुतिन से कहा कि 2016 और 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनावों में रूस ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की थी। ट्रंप ने ये मुद्दा कभी पुतिन के सामने नहीं उठाया था।

ट्रंप प्रशासन ने दूसरे अंतरराष्ट्रीय मसलों की तरह रूस के प्रति भी अस्थिर रुख अपनाया था। एक तरफ पुतिन के प्रति वे नरम दिखते थे, वहीं उन्होंने रूस के साथ कई संधियों से अमेरिका को हटा लिया। इनमें स्टार्ट और ओपन स्काई संधि भी शामिल हैं। इसके अलावा यूक्रेन के मुद्दे पर उन्होंने रूस पर कई कड़े प्रतिबंध लगा दिए।

इससे रूस को चाहे जो नुकसान हुआ हो, अमेरिका को कोई लाभ नहीं हुआ। अब माना जा रहा है कि बाइडन एक सुसंगत और नियोजित रूस नीति अपनाएंगे। इसमें गैर जरूरी टकराव को टाला जाएगा और जहां तक संभव है, वहां तक सहयोग करने की नीति पर अमेरिका चलेगा।

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