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बांग्लादेश: धर्मनिरपेक्ष पुस्तकों के प्रकाशक की हत्या मामले में आठ इस्लामी चरमपंथियों को मिली सजा-ए-मौत

बांग्लादेश की अदालत
– फोटो : सोशल मीडिया

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बांग्लादेश में आतंकवाद-रोधी एक विशेष अदालत ने धर्मनिरपेक्षता और नास्तिकता संबंधी पुस्तकों के प्रकाशक फैसल आरिफिन दीपन की हत्या के मामले में बुधवार को आठ इस्लामी चरमपंथियों को मौत की सजा सुनाई। इसमें एक आरोपी बर्खास्त सैन्य अधिकारी भी है। 

दरअसल, राजधानी ढाका में स्थित जागृति पब्लिशर्स के मालिक फैसल आरफिन दीपन की 31 नवंबर 2015 को शाहबाग इलाके में उनके कार्यालय में हत्या कर दी गई थी। बता दें दीपन ने साल 2015 में कई नास्तिक पुस्तकों का विमोचन किया था। इससे कुछ कट्टरपंथी काफी खफा हो गए और उन्हें मौत के घाट उतार दिया। 

अब इस मामले में आतंकवाद रोधी विशेष अदालत के न्यायाधीश मोहम्मद मोजीबुर रहमान ने आठ दोषियों को सजा सुनाई। सजा सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘आरोपियों का लक्ष्य ब्लॉगरों, लेखकों और पब्लिशर्स की हत्या कर लोगों की आवाज को दबाना था। यह लोगों में दहशत पैदा करके सार्वजनिक सुरक्षा को बाधित करना चाहते थे इसलिए दोषियों को फांसी दी जाएगी।’ 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सभी आरोपियों के संबंध प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन अंसार अल इस्लाम से हैं, जिसे अंसारुल्ला बांग्ला टीम के नाम से भी जाना जाता है। सुनवाई के दौरान दोषियों में छह लोग अदालत में उपस्थित थे। इसके अलावा बाकि के दो आरोपी कोर्ट में मौजूद नहीं थे। इनमें हत्या का मास्टरमाइंड और सेना से निष्काषित सैयद जियाउल हक शामिल है। हक पर पहले भी कई हत्याओं का आरोप लग चुका है।

बता दें कई मुस्लिम बहुल देशों की तरह बांग्लादेश में भी माहौल खराब होता जा रहा है। यहां धार्मिक कट्टरपंथी और धर्मनिरपेक्षतावादी लोगों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। धार्मिक कट्टरपंथी हर हाल में सत्ता हथियाने में लगे हुए हैं और धर्मनिरपेक्ष लोगों का एक धड़ा इसे रोकने में लगा हुआ है। इसे लेकर आए दिन हिंसा होती रहती है, जिस कारण आम जीवन बुरी तरह से प्रभावित होता रहता है।

बांग्लादेश में आतंकवाद-रोधी एक विशेष अदालत ने धर्मनिरपेक्षता और नास्तिकता संबंधी पुस्तकों के प्रकाशक फैसल आरिफिन दीपन की हत्या के मामले में बुधवार को आठ इस्लामी चरमपंथियों को मौत की सजा सुनाई। इसमें एक आरोपी बर्खास्त सैन्य अधिकारी भी है। 

दरअसल, राजधानी ढाका में स्थित जागृति पब्लिशर्स के मालिक फैसल आरफिन दीपन की 31 नवंबर 2015 को शाहबाग इलाके में उनके कार्यालय में हत्या कर दी गई थी। बता दें दीपन ने साल 2015 में कई नास्तिक पुस्तकों का विमोचन किया था। इससे कुछ कट्टरपंथी काफी खफा हो गए और उन्हें मौत के घाट उतार दिया। 

अब इस मामले में आतंकवाद रोधी विशेष अदालत के न्यायाधीश मोहम्मद मोजीबुर रहमान ने आठ दोषियों को सजा सुनाई। सजा सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘आरोपियों का लक्ष्य ब्लॉगरों, लेखकों और पब्लिशर्स की हत्या कर लोगों की आवाज को दबाना था। यह लोगों में दहशत पैदा करके सार्वजनिक सुरक्षा को बाधित करना चाहते थे इसलिए दोषियों को फांसी दी जाएगी।’ 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सभी आरोपियों के संबंध प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन अंसार अल इस्लाम से हैं, जिसे अंसारुल्ला बांग्ला टीम के नाम से भी जाना जाता है। सुनवाई के दौरान दोषियों में छह लोग अदालत में उपस्थित थे। इसके अलावा बाकि के दो आरोपी कोर्ट में मौजूद नहीं थे। इनमें हत्या का मास्टरमाइंड और सेना से निष्काषित सैयद जियाउल हक शामिल है। हक पर पहले भी कई हत्याओं का आरोप लग चुका है।

बता दें कई मुस्लिम बहुल देशों की तरह बांग्लादेश में भी माहौल खराब होता जा रहा है। यहां धार्मिक कट्टरपंथी और धर्मनिरपेक्षतावादी लोगों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। धार्मिक कट्टरपंथी हर हाल में सत्ता हथियाने में लगे हुए हैं और धर्मनिरपेक्ष लोगों का एक धड़ा इसे रोकने में लगा हुआ है। इसे लेकर आए दिन हिंसा होती रहती है, जिस कारण आम जीवन बुरी तरह से प्रभावित होता रहता है।

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arvind007

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