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बसपा को 2019-20 में 20 हजार से कम मिला चंदा, चुनाव आयोग ने ब्योरा किया जारी

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Fri, 08 Jan 2021 05:15 AM IST

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उत्तर प्रदेश की सत्ता से काफी समय से महरूम और लोकसभा-विधानसभा में बदतर प्रदर्शन की वजह से बसपा को 2019-20 में 20 हजार रुपये से कम चंदा मिला। वहीं महाराष्ट्र में सत्ता में भागीदारी करने वाली एनसीपी को करीब 60 करोड़ रुपये मिले।

यह जानकारी चुनाव आयोग द्वारा जारी क्षेत्रीय दलों के मिले चंदे के ब्योरे में दी गई है। आयोग ने अभी भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों को मिले चंदे का खुलासा नहीं किया है।

आयोग के अनुसार, अन्नाद्रमुक को 52.1 करोड़ और द्रमुक को 48.3 करोड़, जदयू को 6 करोड़ रुपये का चंदा मिला। देश में राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय और क्षेत्रीय पार्टियां हैं। भाजपा, कांग्रेस, माकपा और तृणमूल कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियां है। साथ ही 35 राज्य स्तरीय और 329 क्षेत्रीय दल हैं। एनसीपी को मुख्य रूप से चंदा देने वालों में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का भी नाम है।

वर्ष 2019-20 में एनसीपी को सीरम ने तीन करोड़, बीजी शिर्क कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने 25 करोड़, पंचशील कारपोरेट पार्क ने 7.50 करोड़, फिनोलेक्स ने 1.2 करोड़ रुपये दिए। इसके अलावा एक इलेक्टोरल बांड हार्मनी इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 1.5 करोड़ का चंदा दिया।
 
अन्नाद्रमुक के चंदे में 20 हजार रुपये से अधिक में 94 फीसदी यानी 46.8 करोड़ रुपये टाटा के प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट की ओर से मिला है जबकि द्रमुक को कुल चंदे का 93 फीसदी इलेक्टोरल बांड द्वारा प्राप्त हुआ। टाटा ने क्षेत्रीय दलों को जमकर दान दिया।

कंपनी ने 2019-20 में बीजद को 25.3 करोड़ रुपये का चंदा दिया। 2018-19 में बीजद को टाटा के इसी ट्रस्ट ने 72 करोड़ रुपये दिए थे। जदयू को 1.2 करोड़ रुपये समाज इलेक्टोरल ट्रस्ट से मिले। इसी ट्रस्ट ने रालोद को 1.50 करोड़ रुपये दिए। वहीं ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन को 2019-20 में 13.85 लाख रुपये का चंदा मिला।

उत्तर प्रदेश की सत्ता से काफी समय से महरूम और लोकसभा-विधानसभा में बदतर प्रदर्शन की वजह से बसपा को 2019-20 में 20 हजार रुपये से कम चंदा मिला। वहीं महाराष्ट्र में सत्ता में भागीदारी करने वाली एनसीपी को करीब 60 करोड़ रुपये मिले।

यह जानकारी चुनाव आयोग द्वारा जारी क्षेत्रीय दलों के मिले चंदे के ब्योरे में दी गई है। आयोग ने अभी भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों को मिले चंदे का खुलासा नहीं किया है।

आयोग के अनुसार, अन्नाद्रमुक को 52.1 करोड़ और द्रमुक को 48.3 करोड़, जदयू को 6 करोड़ रुपये का चंदा मिला। देश में राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय और क्षेत्रीय पार्टियां हैं। भाजपा, कांग्रेस, माकपा और तृणमूल कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियां है। साथ ही 35 राज्य स्तरीय और 329 क्षेत्रीय दल हैं। एनसीपी को मुख्य रूप से चंदा देने वालों में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का भी नाम है।

वर्ष 2019-20 में एनसीपी को सीरम ने तीन करोड़, बीजी शिर्क कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने 25 करोड़, पंचशील कारपोरेट पार्क ने 7.50 करोड़, फिनोलेक्स ने 1.2 करोड़ रुपये दिए। इसके अलावा एक इलेक्टोरल बांड हार्मनी इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 1.5 करोड़ का चंदा दिया।

 

अन्नाद्रमुक के चंदे में 20 हजार रुपये से अधिक में 94 फीसदी यानी 46.8 करोड़ रुपये टाटा के प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट की ओर से मिला है जबकि द्रमुक को कुल चंदे का 93 फीसदी इलेक्टोरल बांड द्वारा प्राप्त हुआ। टाटा ने क्षेत्रीय दलों को जमकर दान दिया।

कंपनी ने 2019-20 में बीजद को 25.3 करोड़ रुपये का चंदा दिया। 2018-19 में बीजद को टाटा के इसी ट्रस्ट ने 72 करोड़ रुपये दिए थे। जदयू को 1.2 करोड़ रुपये समाज इलेक्टोरल ट्रस्ट से मिले। इसी ट्रस्ट ने रालोद को 1.50 करोड़ रुपये दिए। वहीं ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन को 2019-20 में 13.85 लाख रुपये का चंदा मिला।


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