Business

बजट 2021: टैक्स में राहत चाहता है ऑटो सेक्टर, क्या वित्त मंत्री पूरी कर पाएंगी उनकी उम्मीदें

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 25 Jan 2021 11:16 AM IST

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

एक फरवरी 2021 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद भवन में बजट 2021 पेश करेंगी। कोविड 19 के चलते ऑटो सेक्टर को काफी नुकसान हुआ। ऐसे में आगामी बजट से ऑटो सेक्टर को काफी उम्मीदें हैं। सरकारों के इलेक्ट्रिक वाहनों पर फोकस को बढ़ता देख इसमें राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही हैं। ऐसे में अगर जीएसटी की दरें कम की जाती है तो इससे गाड़ियों के दाम कम होंगे। ऐसे में लोग कम कीमत पर इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियां खरीद सकेंगे।

पिछले दिनों इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियां को प्रमोट करने को लेकर परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि सरकार 15 साल से पुराने वालों को हटाने की योजना को जल्द ही मंजूरी देगी। उन्होंने कहा, ‘हमने प्रस्ताव पेश कर दिया है और मैं उम्मीद कर रहा हूं कि जल्द ही हमें स्क्रैपिंग नीति के लिए मंजूरी मिल जाएगी। ’

इस नीति के तहत कार, ट्रक और बस जैसे 15 साल से पुराने वाहनों को सड़क से हटाने का प्रस्ताव है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बजट में सरकार व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी लेकर आएगी।  अगर इस दिशा में बजट में फैसला लिया जाता है तो इस सेक्टर में जान आ जाएगी।  

जीएसटी घटाकर 18 फीसदी करने की मांग
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ऑटो सेक्टर जीएसटी में भी कटौती की मांग कर रहा है। कोरोना के बाद लोगों ने पर्सनल व्हीकल को रखना शुरू किया है। जिसके चलते पहली बार गाड़ी खरीदने वालों की संख्या में काफी तेजी आई है। वर्तमान में व्हीकल पर लगभग 28 फीसदी का जीएसटी लगता है। ऑटो इंडस्ट्री की मांग है कि अगर इसे घटाकर 18 फीसदी कर दिया जाता है तो मांग में जबरदस्त तेजी आएगी। 

सिंथेटिक्स उत्पादों में आयात शुल्क हो कम 
इसके आलावा यह भी उम्मीद की जा रही कि भारत में तकनीकी संबंधी उत्पादों की मांग को बढ़ावा देने के लिए सिंथेटिक्स उत्पादों और बेस तेलों पर आयात शुल्क कम किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिदृश्य में, अर्थव्यवस्था को महामारी के प्रभाव के बाद विकास की गति बढ़ाने की सख्त जरूरत है।

”सरकार को ग्रीनर मोबिलिटी के लिए वित्तीय प्रोत्साहन के साथ ई-बाइक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन नीतियां को लागू करना चाहिए। ग्राहकों को सीधे ई-बाइक की सवारी करने और खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहन पारित किया जाना चाहिए। यदि हम प्रदूषण मुक्त स्थानों की ओर बढ़ना चाहते हैं और ऊर्जा का उपयोग कम करना चाहते हैं, तो इलेक्ट्रिक बाइक को व्यापक तौर पर अपनाने का ही एकमात्र विकल्प है। ई-मोबिलिटी के दृष्टिकोण से, सरकार को फेम-2 प्रोग्राम के तहत सभी तरह की सब्सिडी और लाभ इलेक्ट्रिक साइकिल को भी प्रदान करने चाहिए। चूंकि ई-बाइक बहुत कम गति दायरे में काम करती हैं, इसलिए उन्हें फेम-2 प्रोग्राम के लाभों को दायरे में शामिल नहीं किया जाता है। इससे निर्माताओं को अपनी ई-बाइक को अंतिम उपभोक्ताओं (एंड-यूजर्स) तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। इको-फ्रेंडली होने के अलावा, ई-बाइक ट्रैफिक जाम और रेंज डिसऑर्डर के मुद्दे को भी हल करती है (एक ऐसा मुद्दा जो ईवी इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण है) क्योंकि उन्हें बैटरी चार्ज के बिना भी पैडल किया जा सकता है। ”
अंकित कुमार, सीईओ, GoZero Mobility

एक फरवरी 2021 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद भवन में बजट 2021 पेश करेंगी। कोविड 19 के चलते ऑटो सेक्टर को काफी नुकसान हुआ। ऐसे में आगामी बजट से ऑटो सेक्टर को काफी उम्मीदें हैं। सरकारों के इलेक्ट्रिक वाहनों पर फोकस को बढ़ता देख इसमें राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही हैं। ऐसे में अगर जीएसटी की दरें कम की जाती है तो इससे गाड़ियों के दाम कम होंगे। ऐसे में लोग कम कीमत पर इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियां खरीद सकेंगे।

पिछले दिनों इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियां को प्रमोट करने को लेकर परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि सरकार 15 साल से पुराने वालों को हटाने की योजना को जल्द ही मंजूरी देगी। उन्होंने कहा, ‘हमने प्रस्ताव पेश कर दिया है और मैं उम्मीद कर रहा हूं कि जल्द ही हमें स्क्रैपिंग नीति के लिए मंजूरी मिल जाएगी। ’

इस नीति के तहत कार, ट्रक और बस जैसे 15 साल से पुराने वाहनों को सड़क से हटाने का प्रस्ताव है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बजट में सरकार व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी लेकर आएगी।  अगर इस दिशा में बजट में फैसला लिया जाता है तो इस सेक्टर में जान आ जाएगी।  

जीएसटी घटाकर 18 फीसदी करने की मांग

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ऑटो सेक्टर जीएसटी में भी कटौती की मांग कर रहा है। कोरोना के बाद लोगों ने पर्सनल व्हीकल को रखना शुरू किया है। जिसके चलते पहली बार गाड़ी खरीदने वालों की संख्या में काफी तेजी आई है। वर्तमान में व्हीकल पर लगभग 28 फीसदी का जीएसटी लगता है। ऑटो इंडस्ट्री की मांग है कि अगर इसे घटाकर 18 फीसदी कर दिया जाता है तो मांग में जबरदस्त तेजी आएगी। 

सिंथेटिक्स उत्पादों में आयात शुल्क हो कम 

इसके आलावा यह भी उम्मीद की जा रही कि भारत में तकनीकी संबंधी उत्पादों की मांग को बढ़ावा देने के लिए सिंथेटिक्स उत्पादों और बेस तेलों पर आयात शुल्क कम किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिदृश्य में, अर्थव्यवस्था को महामारी के प्रभाव के बाद विकास की गति बढ़ाने की सख्त जरूरत है।

”सरकार को ग्रीनर मोबिलिटी के लिए वित्तीय प्रोत्साहन के साथ ई-बाइक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन नीतियां को लागू करना चाहिए। ग्राहकों को सीधे ई-बाइक की सवारी करने और खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहन पारित किया जाना चाहिए। यदि हम प्रदूषण मुक्त स्थानों की ओर बढ़ना चाहते हैं और ऊर्जा का उपयोग कम करना चाहते हैं, तो इलेक्ट्रिक बाइक को व्यापक तौर पर अपनाने का ही एकमात्र विकल्प है। ई-मोबिलिटी के दृष्टिकोण से, सरकार को फेम-2 प्रोग्राम के तहत सभी तरह की सब्सिडी और लाभ इलेक्ट्रिक साइकिल को भी प्रदान करने चाहिए। चूंकि ई-बाइक बहुत कम गति दायरे में काम करती हैं, इसलिए उन्हें फेम-2 प्रोग्राम के लाभों को दायरे में शामिल नहीं किया जाता है। इससे निर्माताओं को अपनी ई-बाइक को अंतिम उपभोक्ताओं (एंड-यूजर्स) तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। इको-फ्रेंडली होने के अलावा, ई-बाइक ट्रैफिक जाम और रेंज डिसऑर्डर के मुद्दे को भी हल करती है (एक ऐसा मुद्दा जो ईवी इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण है) क्योंकि उन्हें बैटरी चार्ज के बिना भी पैडल किया जा सकता है। ”

अंकित कुमार, सीईओ, GoZero Mobility

Source link

arvind007

News Media24 is a Professional News Platform. Here we will provide you National, International, Entertainment News, Gadgets updates, etc. 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
%d bloggers like this: