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प्रधानमंत्री मोदी की वैक्सीन डिप्लोमेसी, मित्र देशों में हो सकती है निर्यात, पहली खेप बांग्लादेश जाएगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 08 Jan 2021 11:27 AM IST

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भारत ने दो स्वदेशी वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। कोरोना से जारी वैश्विक जंग में वैक्सीन के स्तर पर भी भारत की भूमिका महत्वपूर्ण होने जा रही है। पैरासीटामोल और हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन ( एचसीक्यू ) दवा की तरह दुनिया के कई देश अब भारत से कोरोना वैक्सीन लेने की उम्मीद कर रहे हैं। कई देशों ने तो सरकारी स्तर पर भारत सरकार से संपर्क भी साधना शुरू कर दिया है। मोदी सरकार ने शुरुआत से पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है। इसी के तहत अब इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड वैक्सीन की पहली खेप केंद्र सरकार की निगरानी में बांग्लादेश भेजी जाएगी।

भारत में वैक्सीन लगने की औपचारिक शुरुआत के माह भर के भीतर भारत सरकार वैक्सीन निर्यात की इजाजत दे सकती है। फिलहाल, यह निर्यात सरकारी स्तर पर होगा। भारत सरकार के कहने पर वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां तय मात्रा में दूसरे देशों को वैक्सीन की आपूर्ति करेंगी। कोरोना से जंग में भारत की तरफ से 50 से अधिक देशों को पैरासीटामोल, एचसीक्यू व अन्य दवाइयों की आपूर्ति की गई। वैक्सीन आपूर्ति के मामले में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की तरफ से दुनिया में अग्रणी भूमिका निभाने की बात कह चुके हैं।

कई देशों में भारतीय वैक्सीन का इंतजार
वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, ब्राजील व मैक्सिको जैसे देशों से भारत में निर्मित कोरोना वैक्सीन को लेकर पूछताछ की गई है। कई अन्य देश भारत में औपचारिक तौर पर वैक्सीन लगने की शुरुआत का इंतजार कर रहे हैं। बांग्लादेश पहले से ही भारतीय वैक्सीन का इंतजार कर रहा है। कोरोना वैक्सीन को लेकर पाकिस्तान भी भारतीय फार्मा जगत से संपर्क की कोशिश में हैं।

 मित्र देशों को पहले दी जाएगी वैक्सीन
सीरम ने नवंबर में बांग्लादेश के स्वास्थ्य मंत्रालय और बांग्लादेश की बेक्सिमको फार्मास्यूटिकल्स के साथ तीन करोड़ डोज के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के पास चार करोड़ अतिरिक्त टीके उपलब्ध हैं और आपूर्ति की शुरुआत बांग्लादेश से होगी। बांग्लादेश के अलावा वैक्सीन श्रीलंका, मालदीव, नेपाल और अन्य पड़ोसी देशों को भी भेजी जाएगी। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक देश में वैक्सीन लगने की औपचारिक शुरुआत के बाद भारत के साथ दोस्ताना व्यवहार रखने वाले देशों में निर्यात की इजाजत दी जा सकती है, लेकिन आरंभ के महीनों में सरकार की निगरानी में ही सीमित रूप से वैक्सीन का निर्यात किया जा सकेगा। वैक्सीन सिर्फ उन्हीं देशों को भेजी जाएंगी जिनके लिए सरकार की तरफ से मंजूरी होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही पड़ोसी देशों के साथ संपर्क साधकर उन्हें यह भरोसा दिलाया था कि भारतीय वैक्सीन वैश्विक मापदंडों पर खरी है और पूरी तरह से सुरक्षित है। साथ ही यह पश्चिमी देशों की अनेक कंपनियों की वैक्सीन की तुलना में सस्ती भी है।

भारत ने दो स्वदेशी वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। कोरोना से जारी वैश्विक जंग में वैक्सीन के स्तर पर भी भारत की भूमिका महत्वपूर्ण होने जा रही है। पैरासीटामोल और हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन ( एचसीक्यू ) दवा की तरह दुनिया के कई देश अब भारत से कोरोना वैक्सीन लेने की उम्मीद कर रहे हैं। कई देशों ने तो सरकारी स्तर पर भारत सरकार से संपर्क भी साधना शुरू कर दिया है। मोदी सरकार ने शुरुआत से पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है। इसी के तहत अब इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड वैक्सीन की पहली खेप केंद्र सरकार की निगरानी में बांग्लादेश भेजी जाएगी।

भारत में वैक्सीन लगने की औपचारिक शुरुआत के माह भर के भीतर भारत सरकार वैक्सीन निर्यात की इजाजत दे सकती है। फिलहाल, यह निर्यात सरकारी स्तर पर होगा। भारत सरकार के कहने पर वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां तय मात्रा में दूसरे देशों को वैक्सीन की आपूर्ति करेंगी। कोरोना से जंग में भारत की तरफ से 50 से अधिक देशों को पैरासीटामोल, एचसीक्यू व अन्य दवाइयों की आपूर्ति की गई। वैक्सीन आपूर्ति के मामले में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की तरफ से दुनिया में अग्रणी भूमिका निभाने की बात कह चुके हैं।

कई देशों में भारतीय वैक्सीन का इंतजार

वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, ब्राजील व मैक्सिको जैसे देशों से भारत में निर्मित कोरोना वैक्सीन को लेकर पूछताछ की गई है। कई अन्य देश भारत में औपचारिक तौर पर वैक्सीन लगने की शुरुआत का इंतजार कर रहे हैं। बांग्लादेश पहले से ही भारतीय वैक्सीन का इंतजार कर रहा है। कोरोना वैक्सीन को लेकर पाकिस्तान भी भारतीय फार्मा जगत से संपर्क की कोशिश में हैं।

 मित्र देशों को पहले दी जाएगी वैक्सीन

सीरम ने नवंबर में बांग्लादेश के स्वास्थ्य मंत्रालय और बांग्लादेश की बेक्सिमको फार्मास्यूटिकल्स के साथ तीन करोड़ डोज के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के पास चार करोड़ अतिरिक्त टीके उपलब्ध हैं और आपूर्ति की शुरुआत बांग्लादेश से होगी। बांग्लादेश के अलावा वैक्सीन श्रीलंका, मालदीव, नेपाल और अन्य पड़ोसी देशों को भी भेजी जाएगी। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक देश में वैक्सीन लगने की औपचारिक शुरुआत के बाद भारत के साथ दोस्ताना व्यवहार रखने वाले देशों में निर्यात की इजाजत दी जा सकती है, लेकिन आरंभ के महीनों में सरकार की निगरानी में ही सीमित रूप से वैक्सीन का निर्यात किया जा सकेगा। वैक्सीन सिर्फ उन्हीं देशों को भेजी जाएंगी जिनके लिए सरकार की तरफ से मंजूरी होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही पड़ोसी देशों के साथ संपर्क साधकर उन्हें यह भरोसा दिलाया था कि भारतीय वैक्सीन वैश्विक मापदंडों पर खरी है और पूरी तरह से सुरक्षित है। साथ ही यह पश्चिमी देशों की अनेक कंपनियों की वैक्सीन की तुलना में सस्ती भी है।


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