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प्रत्यर्पण से बचने को नीरव मोदी ने दी असांजे के मामले की दलील

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के वकील ने अपने मुवक्किल को ब्रिटेन से भारत प्रत्यर्पित होने से रोकने के लिए बृहस्पतिवार को नया पैंतरा अपनाया। लंदन की जेल में बंद नीरव मोदी के वकील ने ब्रिटिश अदालत में विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे का मानसिक स्वास्थ्य के आधार पर अमेरिका के लिए प्रत्यर्पण रोकने वाले अदालती फैसले का हवाला दिया है। साथ ही कहा है कि उसका मुवक्किल भी असांजे जैसी ही मानसिक परिस्थितियों से गुजर रहा है।

नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ करीब 14 हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोपी है। 49 वर्षीय हीरा कारोबारी बृहस्पतिवार को अपने भारत प्रत्यर्पण से जुड़े मामले की दो दिवसीय निर्णायक सुनवाई के पहले दिन वीडियो लिंक के जरिये वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने पेश हुआ।

दक्षिण-पश्चिम लंदन की वैंड्सवर्थ जेल के एक कमरे से ऑनलाइन सुनवाई में शामिल हो रहे नीरव की दाढ़ी बढ़ी हुई थी और उसने एक ढीला सा ब्लेजर पहना हुआ था। सुनवाई के दौरान नीरव के वकील ने जज के सामने सोमवार को ब्रिटिश अदालत की तरफ से जूलियन असांजे के मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया।

डिस्ट्रिक्ट जज वैनेसा बारातिजर ने असांजे का अमेरिका के लिए प्रत्यर्पण इस आधार पर खारिज कर दिया था कि उसका मानसिक स्वास्थ्य खराब है और ऑस्ट्रेलियाई सामाजिक कार्यकर्ता अमेरिकी जेल में दबाव के हालात में आत्महत्या कर सकता है।

नीरव के वकील बैरिस्टर क्लेयर मोंटगॉमरी ने कहा कि उनके मुवक्किल और जूलियन असांजे की मानसिक हालत और भारतीय जेलों में उसके साथ होने वाले व्यवहार की स्थिति एक जैसी है, जिस पर विचार किया जाना चाहिए।

बैरिस्टर मोंटगॉमरी ने इस बात पर जोर दिया कि उनके मुवक्किल की मानसिक हालत मार्च 2019 से अब तक की लंबी कैद के कारण खराब हो गई है और यह मामला अब खारिज कर दिया जाना चाहिए।

भारत सरकार की तरफ से पक्ष रख रही क्राउन प्रॉसीक्यूशन सर्विस (सीपीएस) की बैरिस्टर हेलेन मैल्कम ने नीरव के वकील के इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि दोनों मामले बिल्कुल विपरीत प्रकृति के हैं।

वीडियो लिंक के जरिये ही बहस में हिस्सा ले रही मैल्मक ने मोदी के मानसिक स्वास्थ्य की किसी स्वतंत्र मनोचिकित्सक से जांच कराने और भारत में उसकी देखभाल के बारे में उचित आश्वासन हासिल करने तक के लिए सुनवाई स्थगित करने की मांग की।

हालांकि डिस्ट्रिक्ट जज सैम्युअल गूजी ने उनके आग्रह को खारिज कर दिया और कहा कि भारत सरकार के पास उन पांच रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देने के लिए पर्याप्त मौके थे, जो बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर पेश हुए फोरेंसिक मनोचिकित्सक डॉ. एंड्रयू फॉरेस्टर ने पेश की थी।

डॉ. फॉरेस्टर ने पिछले साल कई बार मोदी की जांच की थी और उसे गंभीर निराशा का शिकार बताया था। हालांकि डॉ. फॉरेस्टर ने कहा था कि उसकी हालत तत्काल आत्महत्या करने जैसा उच्च स्तर का जोखिम पैदा नहीं कर रही है।


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arvind007

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