Uttar Pradesh

पीडीए के जोनल अधिकारी सत शुक्ला केडीए से संबद्ध

prayagraj news : प्रयागराज विकास प्राधिकरण।
– फोटो : prayagraj

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माफिया विरोधी अभियान में बढ़चढ़ कर कार्रवाई कराने वाले पीडीए के ओएसडी, जोनल अधिकारी सत शुक्ला को शासन ने कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) से संबद्ध कर दिया है। अचानक हुए तबादले पर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। शासन के इस आदेश पर अफसर चुप हैं। सत शुक्ला काम केडीए में करेंगे लेकिन वेतन उनका यहीं से मिलेगा। सूत्र बताते हैं कि कानपुर में माफिया विरोधी कार्रवाई को गति देने के बाद उनकी यहां वापसी हो सकती है।

जिले में पांच सितंबर से शुरू माफिया कार्रवाई का नेतृत्व करने वाले ओएसडी सत शुक्ला ने शासन के निर्देश के अलावा किसी की एक नहीं सुनीं। विभागीय अफसरों और पुलिस पर बेबाक टिप्पणी कर काम को पूरा कराने वाले सत शुक्ला अवैध निर्माण कराने वालों के लिए किरकिरी बने थे। 
पांच महीने में 47 कार्रवाइयों के दौरान उन्होंने माफिया संपत्तियों और निर्माण का शमन कराने के बजाए ध्वस्तीकरण को प्राथमिकता दी। अतीक अहमद, अशरफ, विजय मिश्र, अतीक के गुर्गों के खिलाफ कार्रवाई से वह माफिया के निशाने पर थे। 

उन्होंने सिविल लाइंस, लूकरगंज और मेंहदौरी में माफिया कब्जे से नजूल की जमीन मुक्त कराकर प्रशासन का कब्जा दिलाया। इन जमीनों का बाजारू मूल्य करोड़ों में नहीं, अरबों में है। मौके पर अब प्रशासन के स्वामित्व का बोर्ड लगा है।

पीडीए में बृहस्पतिवार को सत शुक्ला के अचानक हुए संबद्धीकरण के बारे में तरह-तरह की चर्चाएं रहीं। लोगों ने इसे माफिया विरोधी कार्रवाई से जोड़ा। वहीं कुछ ने यह भी कहा कि सत शुक्ला की तेजतर्रार कार्यशैली और ईमानदार अफसर की छवि के कारण उन्हें कानपुर में माफिया विरोधी कार्य कराने के लिए भेजा जा रहा है। सुबह आदेश आने के बाद उन्हें पीडीए से कार्यमुक्त कर दिया गया। पीडीए उपाध्यक्ष अंकित अग्रवाल ने इसकी पुष्टि की है।

माफिया विरोधी अभियान में बढ़चढ़ कर कार्रवाई कराने वाले पीडीए के ओएसडी, जोनल अधिकारी सत शुक्ला को शासन ने कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) से संबद्ध कर दिया है। अचानक हुए तबादले पर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। शासन के इस आदेश पर अफसर चुप हैं। सत शुक्ला काम केडीए में करेंगे लेकिन वेतन उनका यहीं से मिलेगा। सूत्र बताते हैं कि कानपुर में माफिया विरोधी कार्रवाई को गति देने के बाद उनकी यहां वापसी हो सकती है।

जिले में पांच सितंबर से शुरू माफिया कार्रवाई का नेतृत्व करने वाले ओएसडी सत शुक्ला ने शासन के निर्देश के अलावा किसी की एक नहीं सुनीं। विभागीय अफसरों और पुलिस पर बेबाक टिप्पणी कर काम को पूरा कराने वाले सत शुक्ला अवैध निर्माण कराने वालों के लिए किरकिरी बने थे। 

पांच महीने में 47 कार्रवाइयों के दौरान उन्होंने माफिया संपत्तियों और निर्माण का शमन कराने के बजाए ध्वस्तीकरण को प्राथमिकता दी। अतीक अहमद, अशरफ, विजय मिश्र, अतीक के गुर्गों के खिलाफ कार्रवाई से वह माफिया के निशाने पर थे। 

उन्होंने सिविल लाइंस, लूकरगंज और मेंहदौरी में माफिया कब्जे से नजूल की जमीन मुक्त कराकर प्रशासन का कब्जा दिलाया। इन जमीनों का बाजारू मूल्य करोड़ों में नहीं, अरबों में है। मौके पर अब प्रशासन के स्वामित्व का बोर्ड लगा है।

पीडीए में बृहस्पतिवार को सत शुक्ला के अचानक हुए संबद्धीकरण के बारे में तरह-तरह की चर्चाएं रहीं। लोगों ने इसे माफिया विरोधी कार्रवाई से जोड़ा। वहीं कुछ ने यह भी कहा कि सत शुक्ला की तेजतर्रार कार्यशैली और ईमानदार अफसर की छवि के कारण उन्हें कानपुर में माफिया विरोधी कार्य कराने के लिए भेजा जा रहा है। सुबह आदेश आने के बाद उन्हें पीडीए से कार्यमुक्त कर दिया गया। पीडीए उपाध्यक्ष अंकित अग्रवाल ने इसकी पुष्टि की है।

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