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पीआईए के सिंध-बलूच कर्मियों को धोना पड़ा नौकरी से हाथ, ये है बड़ी वजह

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पाकिस्तान इंटरनेशल एरयलाइंस (पीआईए) का मुख्यालय कराची से इस्लामाबाद स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में करीब आधे कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। इनमें से अधिकांश कर्मचारी सिंध और बलूचिस्तान प्रांत के माने जा रहे हैं क्योंकि उनकी भाषा सिंधी या बलूची रही है। 

माना जा रहा है कि यह फैसला राजनीतिक कारणों से लिया गया जिसके पीछे आईएसआई का हाथ होने की मंशा है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक सिंध और बलूचिस्तान में विरोध की आवाज दबाने के लिए पीआईए का मुख्यालय स्थानांतरित करने का निर्णय पाक सरकार को लेना पड़ा।

इस बीच, 800 कर्मचारी कराची से इस्लामाबाद भेजे गए। इनमें से सिंधी और बलूची भाषा बोलने वालों ने इस्लामाबाद जाने की जगह ऐच्छिक अवकाश ग्रहण करना उचित माना। उनके अनुसार कराची से ज्यादा महंगे इस्लामाबाद में अन्य स्थितियां भी सकारात्मक नहीं थीं। इसलिए वहां जाना उचित नहीं था। बता दें कि सिंध और बलूचिस्तान के नागरिकों के साथ पाक सेना और आईएसआई पर अत्याचार करने के आरोप लगते रहे हैं।

फर्जी डिग्री विवाद : पीआईए ने 141 में से 110 पायलटों के लाइसेंस को दी मंजूरी
बता दें कि बीते साल दिसंबर में पीआईए ने फर्जी डिग्री विवाद में निलंबित किए गए 141 में से 110 पायलटों को विमान उड़ाने की इजाजत दे दी थी। पाकिस्तान मीडिया के मुताबिक, वरिष्ठ वकील सलमान अकरम राजा ने पीआईए की नुमाइंदगी करते हुए उच्चतम न्यायालय को यह जानकारी दी।

मुख्य न्यायाधीश गुलजार अहमद की अध्यक्षता वाली तीन सदस्ययी पीठ ने पाकिस्तान इंटरनेशल एरयलाइंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एयर मार्शल अरशद मलिक की अपील पर सुनवाई की थी। मलिक ने यह अपील सिंध उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर की थी।

क्या था मामला 
दरअसल बीते साल 22 मई को कराची में पीआईए का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसके बाद लाइसेंस का मुद्दा सामने आया। इस हादसे में कुल 97 लोग मारे गए थे। शुरुआती जांच में पता चला कि पायलटों ने मानक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया और अलार्म्स की अनदेखी की। विमानन मंत्री गुलाम सरवर खान ने मीडिया को बताया था कि देश के 860 सक्रिय पायलटों में से 260 के पास या तो फर्जी लाइसेंस है या उन्होंने परीक्षा में नकल की थी।

पाकिस्तान इंटरनेशल एरयलाइंस (पीआईए) का मुख्यालय कराची से इस्लामाबाद स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में करीब आधे कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। इनमें से अधिकांश कर्मचारी सिंध और बलूचिस्तान प्रांत के माने जा रहे हैं क्योंकि उनकी भाषा सिंधी या बलूची रही है। 

माना जा रहा है कि यह फैसला राजनीतिक कारणों से लिया गया जिसके पीछे आईएसआई का हाथ होने की मंशा है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक सिंध और बलूचिस्तान में विरोध की आवाज दबाने के लिए पीआईए का मुख्यालय स्थानांतरित करने का निर्णय पाक सरकार को लेना पड़ा।

इस बीच, 800 कर्मचारी कराची से इस्लामाबाद भेजे गए। इनमें से सिंधी और बलूची भाषा बोलने वालों ने इस्लामाबाद जाने की जगह ऐच्छिक अवकाश ग्रहण करना उचित माना। उनके अनुसार कराची से ज्यादा महंगे इस्लामाबाद में अन्य स्थितियां भी सकारात्मक नहीं थीं। इसलिए वहां जाना उचित नहीं था। बता दें कि सिंध और बलूचिस्तान के नागरिकों के साथ पाक सेना और आईएसआई पर अत्याचार करने के आरोप लगते रहे हैं।

फर्जी डिग्री विवाद : पीआईए ने 141 में से 110 पायलटों के लाइसेंस को दी मंजूरी

बता दें कि बीते साल दिसंबर में पीआईए ने फर्जी डिग्री विवाद में निलंबित किए गए 141 में से 110 पायलटों को विमान उड़ाने की इजाजत दे दी थी। पाकिस्तान मीडिया के मुताबिक, वरिष्ठ वकील सलमान अकरम राजा ने पीआईए की नुमाइंदगी करते हुए उच्चतम न्यायालय को यह जानकारी दी।

मुख्य न्यायाधीश गुलजार अहमद की अध्यक्षता वाली तीन सदस्ययी पीठ ने पाकिस्तान इंटरनेशल एरयलाइंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एयर मार्शल अरशद मलिक की अपील पर सुनवाई की थी। मलिक ने यह अपील सिंध उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर की थी।

क्या था मामला 

दरअसल बीते साल 22 मई को कराची में पीआईए का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसके बाद लाइसेंस का मुद्दा सामने आया। इस हादसे में कुल 97 लोग मारे गए थे। शुरुआती जांच में पता चला कि पायलटों ने मानक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया और अलार्म्स की अनदेखी की। विमानन मंत्री गुलाम सरवर खान ने मीडिया को बताया था कि देश के 860 सक्रिय पायलटों में से 260 के पास या तो फर्जी लाइसेंस है या उन्होंने परीक्षा में नकल की थी।


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arvind007

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