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पाकिस्तान की अदालत ने टेरर फंडिंग केस में तीन को छह माह की सजा दी

मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के तीन सहयोगियों को पाकिस्तान के लाहौर स्थित आतंक  निरोधी अदालत (एटीसी) ने टेरर फंडिंग केस में छह महीने की जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने जमात-उद-दावा (जेयूडी) के प्रमुख सईद के साले हाफिज अब्दुर रहमान मक्की, जेयूडी के प्रवक्ता याहया मुजाहिद और जफर इकबाल को अदालत ने छह माह की कारावास की सजा सुनाई है।

अदालत के फैसले के बाद मुजाहिद और इकबाल को अब 80 और 50 वर्ष तक जेल में रहना होगा। एटीसी-2 के न्यायाधीश अरशद हुसैन भुट्टा ने फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान तीनों दोषी अदालत में मौजूद थे। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जेयूडी नेताओं पर करीब 41 मामले दर्ज हैं जिसमें 37 पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। एजेंसी।

चीन-इकनॉमिक कॉरिडोर को लेकर विपक्ष ने सीनेट से किया वॉकआउट
चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) पर पाकिस्तान सरकार की कोई प्रतिक्रिया न आने के चलते शुक्रवार को विपक्षी दल सीनेट (उच्च सदन) से वॉकआउट कर गए। इसके अलावा विपक्षी दलों ने सेवानिवृत्त ले. जनरल सलीम बाजवा की चीन के राजनयिक के साथ बातचीत को लेकर भी सवाल उठाया।

सदस्यों का कहना था कि  सीपीईसी का कोई चेयरमैन भी नहीं है और ऑर्डिनेंस भी लैप्स हो गया है। इस आधार पर पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के सीनेटर मुहम्मद जावेद ने पूछा कि ‘क्या बाजवा अभी भी सीपीईसी के चेयरमैन का वेतन ले रहे हैं।’

इसी तरह जमीयत-ई-इस्लामी के सीनेटर मुस्ताक अहमद ने कहा कि आखिर किस आधार पर बाजवा ने चीन के राजनयिक से बैठक की। उन्होंने कहा कि बाजवा विवादित शख्सियत हैं और उनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप हैं।

उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसा कोई व्यक्ति जिसके ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप है उसे इस पद पर नहीं बैठाया जाना चाहिए। वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री इमरान खान ने बाजवा को सीपीईसी का चेयरमैन नियुक्त किया था। 

चीन के सैन्यकर्मियों के वेतन में हो सकती है 40 फीसदी की बंपर बढ़ोतरी
कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया वेतन कटौती में लगी हैं। वहीं दूसरी ओर चीन अपने सैन्यकर्मियों के वेतन में 40 फीसदी की बंपर बढ़ोतरी कर सकता है। चीन सरकार के इस फैसले से करीब 20 लाख सैन्यकर्मियों को लाभ मिलेगा।

चीन के हांगकांग के साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में ये फैसला इसी साल से लागू हो सकता है। सैन्य अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर इस फैसले की पुष्टि भी की है। चीन ने इस साल सेना को लेकर बड़े पैमाने पर काम किया है। वो चाहता है कि उसकी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) हर स्तर पर मजबूत रहे।

इसी को ध्यान में रखकर उसने नेशनल डिफेंस लॉ में भी बदलाव कर सेंट्रल मिलिट्री कमीशन की शक्तियों को बढ़ाया है। इसके तहत चीन की सेना देशहित को ध्यान में रखकर देश के भीतर और देश के बाहर भी संसाधनों का विस्तार कर सकती है।

चीन सेना के एक जानकार की मानें तो वेतन बढ़ोतरी का फैसला युवा सैन्यकर्मियों और अफसरों को भरोसे में लेने के लिए हो रहा है। इसका मकसद वे नए बदलावों को स्वीकार करें और उसी के तहत काम करें। एजेंसी।

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arvind007

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