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नमस्ते बाइडन : भारत के लिए बढ़ेंगे अवसर, निशाने पर बना रहेगा चीन

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन
– फोटो : PTI

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अमेरिका की पहचान दशकों से दुनिया पर अपने दबदबे का प्रदर्शन करने वाले देश की रही है लेकिन निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घरेलू नीतियों पर ज्यादा जोर दिया। नतीजे में पिछले चार साल में विश्व मंच पर अमेरिकी प्रभाव कम होता नजर आया। ट्रंप के उलट नए राष्ट्रपति जो बाइडन वैश्विक मामलों में अमेरिकी भूमिका को फिर प्रभावशाली बनाने के पक्ष में हैं।

इसी कारण बाइडन प्रशासन की टीम में नियुक्तियां वैश्वीकरण, पेरिस जलवायु समझौते, अंतरराष्ट्रीय व्यापार संधियों और नाटो के साथ हुए करारों को मानने के साथ डब्ल्यूएचओ और यूनेस्को से जुड़ाव बहाल करने के साथ संकटग्रस्त इलाकों में सैन्य दखल की नीति बहाल करने के उद्देश्य से की गई है। अमेरिका के पारंपरिक विश्व नीति पर लौटने के साथ ही भारत के लिए कई नए अवसर बनते नजर आ रहे हैं।

भारत-अमेरिकियों को मिलेगा फायदा
बाइडन प्रशासन ने मंगलवार को ही संकेत दे दिया कि वह नागरिकता की नई नीति ला रहा है। इससे विदेशी नागरिक आठ वर्ष के निवास के बाद अमेरिका में रहते हैं, जो उसकी कुल आबादी का 1.2 प्रतिशत है। नई नीति का फायदा उन सवा छह लाख और भारतीयों को मिल सकता है, जो बिना वैध कागजात के अमेरिका में हैं। इस नीति के तहत 1.10 करोड़ लोगों को नागरिकता मिलने की उम्मीद है, जिनमें से करीब पांच प्रतिशत भारतीय होंगे।

भारतीयों के लिए ज्यादा वीजा
बाइडन ने चुनाव अभियान में ही साफ कर दिया था कि वैश्विक प्रतिभाओं के लिए वे अमेरिका के दरवाजे खुले रखेंगे। एच-1बी वीजा को लेकर ट्रंप प्रशासन में लगे प्रतिबंधों और सीमाओं ने भारतीय युवाओं का रास्ता रोका। नए प्रशासन में टेक कंपनियों को ज्यादा संख्या में आईटी व सॉफ्टवेयर इंजीनियर भारत से नियुक्त करने में मदद मिलेगी।

साझा हित वालों से मिलकर करेंगे चीन से मुकाबला
मनोनीत रक्षा मंत्री लॉयड आॉस्टिन ने चीन को लेकर बाइडन प्रशासन की सोच साफ करते हुए दावा किया कि चीन विश्व की प्रभावशाली शक्ति बनने का सपना देख रहा है। चार वर्ष में महामारी व बिगड़े आर्थिक हालात में विश्व ने अमेरिका को कमजोर होते और चीन को बढ़ते हुए ही देखा। चीन से मुकाबला अमेरिका के लिए बोझ बन चुका है, जिसे साझा करने के लिए उसे ऐसा सहयोगी चाहिए, जिनके साझा हित हों। उसे यह सहयोगी भारत में नजर आ रहा है, पर हमें हमेशा की तरह अमेरिका की खुदगर्जी भरी नीतियों की वजह से फूंक-फूंक कर कदम उठाने होंगे।

रक्षा मोर्चे पर क्वाड की बढ़ेगी भूमिका
ऑस्टिन ने भारत से रक्षा सहयोग बढ़ाने की घोषणा करते हुए संकेत दिए कि भारत रक्षा मोर्चे पर मजबूती के लिए बाइडन प्रशासन में नए अवसर बना सकता है। ट्रंप के समय में अमेरिका, जापान, भारत व ऑस्ट्रेलिया के क्वाड्रिलेट्र्ल सिक्योरिटी डायलॉग (क्वाड) ने नई धुरी तैयार की। बाइडन पूर्ववर्ती के कामों को आगे बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं, इसलिए क्वाड भविष्य में ज्यादा सक्रिय नजर आ सकता है।

कारोबारी सहयोग समय की मांग
ट्रंप-काल में अमेरिका प्रयास भारत के बाजारों में अपने डेयरी, कृषि उत्पाद व चिकित्सा उपकरण पहुंचाने को रहा, जिसे भारत ने अपने हितों की वजह से रोकने में पूरा जोर लगाया। इसे पीएम मोदी के साथ कारोबारी समझौता न होने की एक वजह भी माना गया। बाइडन प्रशासन के लिए मोदी के आत्मनिर्भर भारत का मान रखते हुए नए कारोबारी संबंध कायम करना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन यहां भी चीन फैक्टर दोनों को सहयोग बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

सार

  • नमस्ते बाइडन : भारत के लिए बढ़ेंगे अवसर
  • बाइडन ने रक्षा-आर्थिक मोर्चे पर परंपरागत नीतियां जारी रखने के दिए संकेत
  • वैश्विक मामलों में दखल बढ़ाएगा नया प्रशासन, निशाने पर बना रहेगा चीन

विस्तार

अमेरिका की पहचान दशकों से दुनिया पर अपने दबदबे का प्रदर्शन करने वाले देश की रही है लेकिन निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घरेलू नीतियों पर ज्यादा जोर दिया। नतीजे में पिछले चार साल में विश्व मंच पर अमेरिकी प्रभाव कम होता नजर आया। ट्रंप के उलट नए राष्ट्रपति जो बाइडन वैश्विक मामलों में अमेरिकी भूमिका को फिर प्रभावशाली बनाने के पक्ष में हैं।

इसी कारण बाइडन प्रशासन की टीम में नियुक्तियां वैश्वीकरण, पेरिस जलवायु समझौते, अंतरराष्ट्रीय व्यापार संधियों और नाटो के साथ हुए करारों को मानने के साथ डब्ल्यूएचओ और यूनेस्को से जुड़ाव बहाल करने के साथ संकटग्रस्त इलाकों में सैन्य दखल की नीति बहाल करने के उद्देश्य से की गई है। अमेरिका के पारंपरिक विश्व नीति पर लौटने के साथ ही भारत के लिए कई नए अवसर बनते नजर आ रहे हैं।

भारत-अमेरिकियों को मिलेगा फायदा

बाइडन प्रशासन ने मंगलवार को ही संकेत दे दिया कि वह नागरिकता की नई नीति ला रहा है। इससे विदेशी नागरिक आठ वर्ष के निवास के बाद अमेरिका में रहते हैं, जो उसकी कुल आबादी का 1.2 प्रतिशत है। नई नीति का फायदा उन सवा छह लाख और भारतीयों को मिल सकता है, जो बिना वैध कागजात के अमेरिका में हैं। इस नीति के तहत 1.10 करोड़ लोगों को नागरिकता मिलने की उम्मीद है, जिनमें से करीब पांच प्रतिशत भारतीय होंगे।

भारतीयों के लिए ज्यादा वीजा

बाइडन ने चुनाव अभियान में ही साफ कर दिया था कि वैश्विक प्रतिभाओं के लिए वे अमेरिका के दरवाजे खुले रखेंगे। एच-1बी वीजा को लेकर ट्रंप प्रशासन में लगे प्रतिबंधों और सीमाओं ने भारतीय युवाओं का रास्ता रोका। नए प्रशासन में टेक कंपनियों को ज्यादा संख्या में आईटी व सॉफ्टवेयर इंजीनियर भारत से नियुक्त करने में मदद मिलेगी।

साझा हित वालों से मिलकर करेंगे चीन से मुकाबला

मनोनीत रक्षा मंत्री लॉयड आॉस्टिन ने चीन को लेकर बाइडन प्रशासन की सोच साफ करते हुए दावा किया कि चीन विश्व की प्रभावशाली शक्ति बनने का सपना देख रहा है। चार वर्ष में महामारी व बिगड़े आर्थिक हालात में विश्व ने अमेरिका को कमजोर होते और चीन को बढ़ते हुए ही देखा। चीन से मुकाबला अमेरिका के लिए बोझ बन चुका है, जिसे साझा करने के लिए उसे ऐसा सहयोगी चाहिए, जिनके साझा हित हों। उसे यह सहयोगी भारत में नजर आ रहा है, पर हमें हमेशा की तरह अमेरिका की खुदगर्जी भरी नीतियों की वजह से फूंक-फूंक कर कदम उठाने होंगे।

रक्षा मोर्चे पर क्वाड की बढ़ेगी भूमिका

ऑस्टिन ने भारत से रक्षा सहयोग बढ़ाने की घोषणा करते हुए संकेत दिए कि भारत रक्षा मोर्चे पर मजबूती के लिए बाइडन प्रशासन में नए अवसर बना सकता है। ट्रंप के समय में अमेरिका, जापान, भारत व ऑस्ट्रेलिया के क्वाड्रिलेट्र्ल सिक्योरिटी डायलॉग (क्वाड) ने नई धुरी तैयार की। बाइडन पूर्ववर्ती के कामों को आगे बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं, इसलिए क्वाड भविष्य में ज्यादा सक्रिय नजर आ सकता है।

कारोबारी सहयोग समय की मांग

ट्रंप-काल में अमेरिका प्रयास भारत के बाजारों में अपने डेयरी, कृषि उत्पाद व चिकित्सा उपकरण पहुंचाने को रहा, जिसे भारत ने अपने हितों की वजह से रोकने में पूरा जोर लगाया। इसे पीएम मोदी के साथ कारोबारी समझौता न होने की एक वजह भी माना गया। बाइडन प्रशासन के लिए मोदी के आत्मनिर्भर भारत का मान रखते हुए नए कारोबारी संबंध कायम करना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन यहां भी चीन फैक्टर दोनों को सहयोग बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

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