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दिशा रवि केस में हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा, जांच संबंधी जानाकारी सार्वजनिक न करने की बात पर अडिग रहें

जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि
– फोटो : Social Media

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टूलकिट मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह अपने इस रूख पर सख्ती से कायम रहे कि जांच संबंधी जानकारी उसने लीक नहीं की और न ही उसका ऐसा कोई इरादा है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की निजता का अधिकार, बोलने की स्वतंत्रता को संरक्षित और संतुलित करने की आवश्यकता है। अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में यह भी कहा है कि दिल्ली पुलिस आज दायर हलफनामे का सख्ती से पालन करे। 

सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने पुलिस के किसी भी ट्वीट अथवा समाचार सामग्री को इस स्तर पर हटाने का आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने मीडिया से यह सुनिश्चित करने को कहा कि केवल सत्यापित सामग्री ही प्रकाशित की जाए और वह जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के सिलसिले में चल रही जांच को बाधित न करें। न्यायालय का कहना है कि टूलकिट मामले में पुलिस कानून का पालन करते हुए संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर सकती है। अदालत ने मीडिया से कहा कि लीक हुई जांच सामग्री को प्रसारित नहीं किया जाए क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है।
 

इससे पहले गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने किसान आंदोलन से जुड़ी टूलकिट साझा करने के मामले में गिरफ्तार जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि की याचिका पर दिल्ली पुलिस व कई मीडिया हाउस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिका में दिशा रवि ने पुलिस पर उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से संबंधित जांच सामग्री को मीडिया में लीक करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा उन्होंने अदालत से जांच सामग्री को लीक करने से रोकने व मीडिया में एकतरफा खबरें दिखाने पर रोक लगाने की मांग की है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह के समक्ष हालांकि दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि दिल्ली पुलिस की तरफ से कुछ भी लीक नहीं हुआ है। अदालत ने उनके बयान को रिकार्ड पर लेते हुए दिल्ली पुलिस को शुक्रवार तक अपना जवाब शपथपत्र में दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने इसके अलावा राष्ट्रीय प्रसारण मानक प्राधिकरण (एनबीएसए), टाइम्स नाउ और न्यूज18 को नोटिस जारी किया था।

टूलकिट मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह अपने इस रूख पर सख्ती से कायम रहे कि जांच संबंधी जानकारी उसने लीक नहीं की और न ही उसका ऐसा कोई इरादा है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की निजता का अधिकार, बोलने की स्वतंत्रता को संरक्षित और संतुलित करने की आवश्यकता है। अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में यह भी कहा है कि दिल्ली पुलिस आज दायर हलफनामे का सख्ती से पालन करे। 

सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने पुलिस के किसी भी ट्वीट अथवा समाचार सामग्री को इस स्तर पर हटाने का आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने मीडिया से यह सुनिश्चित करने को कहा कि केवल सत्यापित सामग्री ही प्रकाशित की जाए और वह जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के सिलसिले में चल रही जांच को बाधित न करें। न्यायालय का कहना है कि टूलकिट मामले में पुलिस कानून का पालन करते हुए संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर सकती है। अदालत ने मीडिया से कहा कि लीक हुई जांच सामग्री को प्रसारित नहीं किया जाए क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है।

 

इससे पहले गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने किसान आंदोलन से जुड़ी टूलकिट साझा करने के मामले में गिरफ्तार जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि की याचिका पर दिल्ली पुलिस व कई मीडिया हाउस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिका में दिशा रवि ने पुलिस पर उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से संबंधित जांच सामग्री को मीडिया में लीक करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा उन्होंने अदालत से जांच सामग्री को लीक करने से रोकने व मीडिया में एकतरफा खबरें दिखाने पर रोक लगाने की मांग की है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह के समक्ष हालांकि दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि दिल्ली पुलिस की तरफ से कुछ भी लीक नहीं हुआ है। अदालत ने उनके बयान को रिकार्ड पर लेते हुए दिल्ली पुलिस को शुक्रवार तक अपना जवाब शपथपत्र में दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने इसके अलावा राष्ट्रीय प्रसारण मानक प्राधिकरण (एनबीएसए), टाइम्स नाउ और न्यूज18 को नोटिस जारी किया था।



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