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डोनाल्ड ट्रंप ने बनाया अगले चुनावों के लिए अपनी वापसी का प्लान, रविवार को करेंगे एलान

Donald trump and Melania trump
– फोटो : पीटीआई (फाइल)

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डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की राजनीति में फिर सक्रिय होने का फैसला कर लिया है। ये खबर वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने ट्रंप के सहयोगियों के हवाले से दी है। ट्रंप ने ये फैसला यह भरोसा मजबूत होने के बाद किया कि रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों में उनका मजबूत आधार बना हुआ है। अगले रविवार को वे इस बात का साफ संकेत दे देंगे कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उनके उम्मीदवार बनने की संभावना कायम है।

वेबसाइट एक्सियोस ने कहा है कि अगले हफ्ते ट्रंप कंजरवेटिव समूहों की एक बड़ी सभा को संबोधित करेंगे। व्हाइट हाउस से विदाई के बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक सभा होगी। ट्रंप के सहयोगियों के मुताबिक वहां दिए भाषण के जरिए ट्रंप यह संदेश देंगे कि भले अब वे राष्ट्रपति ना हों और उनके ट्विटर हैंडल को उनसे छीन लिया गया हो, लेकिन उनकी सियासी ताकत कायम है।

इस खबर के मुताबिक ट्रंप की रणनीति यह है कि वे पहले अपनी ताकत 2022 के मध्यावधि संसदीय चुनाव में दिखाने की कोशिश करेंगे। इन चुनावों में वे खुद को ‘किंग मेकर’ के रूप में पेश करेंगे। इस रणनीति को आखिरी रूप देने के लिए इसी हफ्ते फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में वे अपने सलाहकारों के साथ बैठक करने वाले हैं। राष्ट्रपति पद से हटने के बाद ट्रंप ने इसी जगह को अपना निवास बनाया है।

ट्रंप गुट अगले साल सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के चुनाव के लिए होने वाली प्राइमरी (उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया) में रिपब्लिकन पार्टी के उन सांसदों को हराने की कोशिश करेगा, जिन्होंने पाला बदल लिया है। इनके खिलाफ ट्रंप समर्थक नेताओं को पार्टी का उम्मीदवार बनाने के लिए ट्रंप गुट बड़े पैमाने पर धन खर्च करने की योजना बना रहा है। ट्रंप भी अपने समर्थक नेताओं का खुल कर समर्थन करेंगे। गौरतलब है कि कई राज्यों की रिपब्लिकन पार्टी की इकाइयां पूरी ताकत से ट्रंप के साथ बनी हुई हैं। उन्होंने ट्रंप के आलोचक नेताओं की निंदा करते हुए बाकायदा प्रस्ताव भी पारित किए हैं।

इसीलिए रविवार को ऑर्लैंडो में होने वाली कंजरवेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। इस सम्मेलन का आयोजन इस रूप में किया गया है, जिससे ये संदेश जाए कि कंजरवेटिव समूहों पर ट्रंप की पूरी पकड़ बनी हुई है। ट्रंप समर्थकों का दावा है कि ट्रंप की ताकत रिपब्लिकन पार्टी नहीं है। बल्कि उनकी ताकत वह बहुत बड़ा जन समुदाय है, जो आज भी पूरी ताकत से उनके पीछे खड़ा है। ट्रंप के सलाहकार जेसॉन मिलर ने वेबसाइट एक्सियोस से कहा- ‘वास्तव में ट्रंप ही रिपब्लिकन पार्टी हैं। पार्टी के पुराने इनसाइडर्स और ग्रासरूट के बीच खाई जरूर है। लेकिन आज अगर आप ट्रंप की आलोचना करते हैं, उसका मतलब है कि आप रिपब्लिकन ग्रासरूट (आधार) पर हमला बोल रहे हैं।’

वैसे भी ऐसे रिपब्लिकन नेता कम ही हैं, जिन्होंने चुनाव के बाद ट्रंप की खुल कर आलोचना की हो। यही वजह है कि ट्रंप के खिलाफ डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से लाया गया महाभियोग प्रस्ताव सीनेट में पास नहीं हो पाया। सिर्फ सात सीनेटरों ने ट्रंप के खिलाफ वोट दिया। उनमें से कई सीनेटरों की उनके राज्यों की पार्टी इकाइयों ने निंदा की है।

जानकारों का कहना है कि ट्रंप की समर्थक पॉलिटिकल एक्शन कमेटी ‘सेव अमेरिका’ ने साढ़े सात करोड़ डॉलर का चंदा इकट्ठा कर रखा है। इसके अलावा ट्रंप के डाटाबेस में करोड़ों लोगों के नाम-पते हैं, जिनसे उनके समर्थक सीधा संपर्क बनाए हुए हैं।

खबरों के मुताबिक रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों पर उनकी पकड़ का आलम यह है कि कई रिपब्लिन नेताओं ने उनसे संपर्क कर कहा है कि वे चुनाव तभी लड़ेंगे, जब ट्रंप उनका समर्थन करेंगे। इसके बावजूद ट्रंप के सलाहकारों का कहना है कि रविवार को ट्रंप 2024 के लिए अपनी उम्मीदवारी का सीधे एलान नहीं करेंगे। बल्कि वे सिर्फ यह संदेश देंगे कि राजनीतिक अखाड़े में वे मौजूद हैं। इसके अलावा वे राष्ट्रपति जो बाइडन पर कड़ा हमला बोलेंगे। वे दावा करेंगे कि बाइडन को लेकर उन्होंने जो भविष्यवाणियां की थीं, उनमें से कई अभी ही सच साबित हो गई हैं।

सार

रविवार को ऑर्लैंडो में होने वाली कंजरवेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। इस सम्मेलन का आयोजन इस रूप में किया गया है, जिससे ये संदेश जाए कि कंजरवेटिव समूहों पर ट्रंप की पूरी पकड़ बनी हुई है…

विस्तार

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की राजनीति में फिर सक्रिय होने का फैसला कर लिया है। ये खबर वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने ट्रंप के सहयोगियों के हवाले से दी है। ट्रंप ने ये फैसला यह भरोसा मजबूत होने के बाद किया कि रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों में उनका मजबूत आधार बना हुआ है। अगले रविवार को वे इस बात का साफ संकेत दे देंगे कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उनके उम्मीदवार बनने की संभावना कायम है।

वेबसाइट एक्सियोस ने कहा है कि अगले हफ्ते ट्रंप कंजरवेटिव समूहों की एक बड़ी सभा को संबोधित करेंगे। व्हाइट हाउस से विदाई के बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक सभा होगी। ट्रंप के सहयोगियों के मुताबिक वहां दिए भाषण के जरिए ट्रंप यह संदेश देंगे कि भले अब वे राष्ट्रपति ना हों और उनके ट्विटर हैंडल को उनसे छीन लिया गया हो, लेकिन उनकी सियासी ताकत कायम है।

इस खबर के मुताबिक ट्रंप की रणनीति यह है कि वे पहले अपनी ताकत 2022 के मध्यावधि संसदीय चुनाव में दिखाने की कोशिश करेंगे। इन चुनावों में वे खुद को ‘किंग मेकर’ के रूप में पेश करेंगे। इस रणनीति को आखिरी रूप देने के लिए इसी हफ्ते फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में वे अपने सलाहकारों के साथ बैठक करने वाले हैं। राष्ट्रपति पद से हटने के बाद ट्रंप ने इसी जगह को अपना निवास बनाया है।

ट्रंप गुट अगले साल सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के चुनाव के लिए होने वाली प्राइमरी (उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया) में रिपब्लिकन पार्टी के उन सांसदों को हराने की कोशिश करेगा, जिन्होंने पाला बदल लिया है। इनके खिलाफ ट्रंप समर्थक नेताओं को पार्टी का उम्मीदवार बनाने के लिए ट्रंप गुट बड़े पैमाने पर धन खर्च करने की योजना बना रहा है। ट्रंप भी अपने समर्थक नेताओं का खुल कर समर्थन करेंगे। गौरतलब है कि कई राज्यों की रिपब्लिकन पार्टी की इकाइयां पूरी ताकत से ट्रंप के साथ बनी हुई हैं। उन्होंने ट्रंप के आलोचक नेताओं की निंदा करते हुए बाकायदा प्रस्ताव भी पारित किए हैं।

इसीलिए रविवार को ऑर्लैंडो में होने वाली कंजरवेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। इस सम्मेलन का आयोजन इस रूप में किया गया है, जिससे ये संदेश जाए कि कंजरवेटिव समूहों पर ट्रंप की पूरी पकड़ बनी हुई है। ट्रंप समर्थकों का दावा है कि ट्रंप की ताकत रिपब्लिकन पार्टी नहीं है। बल्कि उनकी ताकत वह बहुत बड़ा जन समुदाय है, जो आज भी पूरी ताकत से उनके पीछे खड़ा है। ट्रंप के सलाहकार जेसॉन मिलर ने वेबसाइट एक्सियोस से कहा- ‘वास्तव में ट्रंप ही रिपब्लिकन पार्टी हैं। पार्टी के पुराने इनसाइडर्स और ग्रासरूट के बीच खाई जरूर है। लेकिन आज अगर आप ट्रंप की आलोचना करते हैं, उसका मतलब है कि आप रिपब्लिकन ग्रासरूट (आधार) पर हमला बोल रहे हैं।’

वैसे भी ऐसे रिपब्लिकन नेता कम ही हैं, जिन्होंने चुनाव के बाद ट्रंप की खुल कर आलोचना की हो। यही वजह है कि ट्रंप के खिलाफ डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से लाया गया महाभियोग प्रस्ताव सीनेट में पास नहीं हो पाया। सिर्फ सात सीनेटरों ने ट्रंप के खिलाफ वोट दिया। उनमें से कई सीनेटरों की उनके राज्यों की पार्टी इकाइयों ने निंदा की है।

जानकारों का कहना है कि ट्रंप की समर्थक पॉलिटिकल एक्शन कमेटी ‘सेव अमेरिका’ ने साढ़े सात करोड़ डॉलर का चंदा इकट्ठा कर रखा है। इसके अलावा ट्रंप के डाटाबेस में करोड़ों लोगों के नाम-पते हैं, जिनसे उनके समर्थक सीधा संपर्क बनाए हुए हैं।

खबरों के मुताबिक रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों पर उनकी पकड़ का आलम यह है कि कई रिपब्लिन नेताओं ने उनसे संपर्क कर कहा है कि वे चुनाव तभी लड़ेंगे, जब ट्रंप उनका समर्थन करेंगे। इसके बावजूद ट्रंप के सलाहकारों का कहना है कि रविवार को ट्रंप 2024 के लिए अपनी उम्मीदवारी का सीधे एलान नहीं करेंगे। बल्कि वे सिर्फ यह संदेश देंगे कि राजनीतिक अखाड़े में वे मौजूद हैं। इसके अलावा वे राष्ट्रपति जो बाइडन पर कड़ा हमला बोलेंगे। वे दावा करेंगे कि बाइडन को लेकर उन्होंने जो भविष्यवाणियां की थीं, उनमें से कई अभी ही सच साबित हो गई हैं।

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