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ट्रंप प्रशासन पर नस्ली आरोप लगाने वाली भारतीय अमेरिकी महिला को बाइडन ने सौंपा अहम पद, जानिए कौन हैं उजरा जेया

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Updated Sun, 17 Jan 2021 09:39 AM IST

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अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने देश के निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के विरोध में 2018 में विदेश सेवा छोड़ने वाली भारतीय अमेरिकी राजनयिक उजरा जेया को विदेश मंत्रालय के एक अहम पद के लिए शनिवार को नामित किया।आइए बताते हैं कि कौन उजरा जेया, जिन्होंने ट्रंप प्रशासन पर लगाया था नस्ली आरोप…

बाइडन की ओर से विदेश मंत्रालय के लिए घोषित अहम पदों के नामांकन के अनुसार, जेया को असैन्य सुरक्षा, लोकतंत्र और मानवाधिकार के लिए अवर मंत्री नामित किया गया है। इसके अलावा वेंडी आर शेरमन को उप विदेश मंत्री, ब्रायन मैकेओन को प्रबंधन एवं संसाधन के लिए उपमंत्री, बोनी जेनकिंस को हथियार नियंत्रण एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के लिए अवर मंत्री और विक्टोरिया नुलैंड को राजनीतिक मामलों के लिए अवर मंत्री नियुक्त किया गया है।

बाइडन ने कहा, नामित विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन के नेतृत्व वाली यह विविधता भरी संपूर्ण टीम मेरे विश्वास का प्रतीक है कि जब अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करता है, तो यह सबसे मजबूत होता है।

उजरा ने नस्ली और अभद्र व्यवहार का लगाया था आरोप 
उजरा जेया ने हाल में ‘अलायंस फॉर पीसबिल्डिंग’ की अध्यक्ष एवं सीईओ के रूप में सेवाएं दी हैं। उन्होंने 2014 से 2017 तक पेरिस स्थित अमेरिकी दूतावास में मिशन की उप प्रमुख के तौर पर भी सेवाएं दी थीं। भारतीय मूल की पूर्व अमेरिकी वरिष्ठ राजनयिक उजरा जेया ने सितंबर, 2018 में अमेरिका के विदेश मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर नस्ली और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया था। उजरा ने कहा था कि विदेश मंत्रालय और दूतावास के उच्च अधिकारी अल्पसंख्यकों का बहिष्कार करते हैं। 

अमेरिकी विदेश मंत्रालय में 25 साल तक किया काम 
उजरा के पिता भारतीय हैं, जबकि उजरा का जन्म अमेरिका में ही हुआ था। उन्होंने 25 साल तक अमेरिकी विदेश मंत्रालय में काम किया था।  वर्ष 2018 में भेदभाव का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था। उजरा ने कहा था, ‘ट्रंप प्रशासन के काम संभालने के पांच महीने बाद ही तीन वरिष्ठ अफ्रीकी मूल के अमेरिकी अधिकारी या तो विभाग से निकाल दिए गए या उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उनकी रिपोर्टिंग श्वेत लोगों को सौंप दी गई। उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि पिछले एक महीने के दौरान अच्छा काम करने वाले अल्पसंख्यक राजनयिकों को सचिवालय की बैठकों में नहीं बुलाया जाता है।
 

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने देश के निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के विरोध में 2018 में विदेश सेवा छोड़ने वाली भारतीय अमेरिकी राजनयिक उजरा जेया को विदेश मंत्रालय के एक अहम पद के लिए शनिवार को नामित किया।आइए बताते हैं कि कौन उजरा जेया, जिन्होंने ट्रंप प्रशासन पर लगाया था नस्ली आरोप…

बाइडन की ओर से विदेश मंत्रालय के लिए घोषित अहम पदों के नामांकन के अनुसार, जेया को असैन्य सुरक्षा, लोकतंत्र और मानवाधिकार के लिए अवर मंत्री नामित किया गया है। इसके अलावा वेंडी आर शेरमन को उप विदेश मंत्री, ब्रायन मैकेओन को प्रबंधन एवं संसाधन के लिए उपमंत्री, बोनी जेनकिंस को हथियार नियंत्रण एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के लिए अवर मंत्री और विक्टोरिया नुलैंड को राजनीतिक मामलों के लिए अवर मंत्री नियुक्त किया गया है।

बाइडन ने कहा, नामित विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन के नेतृत्व वाली यह विविधता भरी संपूर्ण टीम मेरे विश्वास का प्रतीक है कि जब अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करता है, तो यह सबसे मजबूत होता है।

उजरा ने नस्ली और अभद्र व्यवहार का लगाया था आरोप 

उजरा जेया ने हाल में ‘अलायंस फॉर पीसबिल्डिंग’ की अध्यक्ष एवं सीईओ के रूप में सेवाएं दी हैं। उन्होंने 2014 से 2017 तक पेरिस स्थित अमेरिकी दूतावास में मिशन की उप प्रमुख के तौर पर भी सेवाएं दी थीं। भारतीय मूल की पूर्व अमेरिकी वरिष्ठ राजनयिक उजरा जेया ने सितंबर, 2018 में अमेरिका के विदेश मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर नस्ली और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया था। उजरा ने कहा था कि विदेश मंत्रालय और दूतावास के उच्च अधिकारी अल्पसंख्यकों का बहिष्कार करते हैं। 

अमेरिकी विदेश मंत्रालय में 25 साल तक किया काम 

उजरा के पिता भारतीय हैं, जबकि उजरा का जन्म अमेरिका में ही हुआ था। उन्होंने 25 साल तक अमेरिकी विदेश मंत्रालय में काम किया था।  वर्ष 2018 में भेदभाव का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था। उजरा ने कहा था, ‘ट्रंप प्रशासन के काम संभालने के पांच महीने बाद ही तीन वरिष्ठ अफ्रीकी मूल के अमेरिकी अधिकारी या तो विभाग से निकाल दिए गए या उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उनकी रिपोर्टिंग श्वेत लोगों को सौंप दी गई। उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि पिछले एक महीने के दौरान अच्छा काम करने वाले अल्पसंख्यक राजनयिकों को सचिवालय की बैठकों में नहीं बुलाया जाता है।

 


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