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टीकाकरण अभियान: कोवाक्सिन टीका कड़ी मेहनत से बना है, सवाल उठाना ठीक नहीं 

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भारत के पहले स्वदेश कोरोना टीका को वापसी को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं। लेकिन पिछले 8 महीने से टीके पर शोध में जुटे वैज्ञानिकों का कुछ और ही कहना है। सोमवार को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के संक्रामक रोग विभाग प्रमुख समीरन पांडा ने अमर उजाला से बातचीत की तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कोरोना के विषाणु पर नियंत्रण आसान नहीं था।

वैज्ञानिक प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही मिली मंजूरी, पूरी तरह सुरक्षित 
रात-दिन की मेहनत के साथ तैयार हुए टीके भी की प्रभाविकता और सुरक्षा पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने काफी मुश्किलों में वायरस को आइसोलेट किया था जिसके कारण आज हमारे पास कोरोना का अपना स्वदेशी टीका है।

वैज्ञानिक प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही कोवाक्सिन को लांच किया गया है। कम समय के बाद भी हम इसकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं कर सकते। इससे किसी की जान को खतरा नहीं है।

लोग बुद्धिमानी दिखाएं और कोराना टीका लगवाएं, वैज्ञानिकों ने पूरी जांच-परख के बाद ही बनाया है टीका
डॉक्टर पांडा ने कहा, उन्हें आज भी वह दिन याद है जब कोरोना वायरस को सबसे पहला आइसोलेट करने की कामयाबी वैज्ञानिक को मिली थी। उस वक्त हमारे हौसले सबसे बुलंद थे। लेकिन आज तरह-तरह की चर्चाओं को देख बुरा महसूस होता है अभी महामारी घट रही है।

लेकिन भारत एक विशाल देश है। कुछ राज्य ऐसे हैं जहां हम संक्रमण की दूसरी और तीसरी लहर देख रहे हैं। कुछ ऐसे राज्य हैं जहां कोरोना वायरस भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर है। इसके अलावा नए म्युटेंट वायरस भी अपनी उपस्थिति बना रहे हैं। उसकी पूरी जानकारी अभी तक विशेषज्ञों के पास नहीं है।

पहले नहीं बनी ऐसी वैक्सीन
कभी भी इतने कम समय में टीका नहीं बना है। 12 जनवरी 2020 को वैज्ञानिकों ने वायरस के जीनोमिक को रिकॉर्ड किया और इतने सारे टीके 10 महीने से कम समय में क्लीनिकल परीक्षण के चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार हो गए।

क्लीनिकल परीक्षा में पास होने पर दे सकते हैं मंजूरी
वर्ष 2019 में नई ड्रग और क्लीनिकल ट्रायल अनुमोदन प्रक्रिया में प्रावधान जोड़ा गया था। इसके तहत ऐसी स्थितियों में जब किसी बीमारी का हमारे पास बेहतर उपचार विकल्प नहीं होता है, तो पहले वह क्लीनिकल परीक्षण के परिणाम यदि उल्लेखनीय हों तो, तीसरे चरण के परीक्षण के टीके को त्वरित गति को मंजूरी देने में मदद कर सकता है।

नए म्यूटेशन के बाद भी कोवाक्सिन प्रभावी
कोरोना के विषाणु पर काम करते हुए कोवाक्सिन तैयार की गई है। परिणाम स्वरूप प्रतिरक्षा का एक बहुमुखी स्पेक्ट्रम प्राप्त होगा। डॉक्टर पांडा ने उम्मीद जताई है कि कोरोना वायरस के नए म्यूटेशन पर भी भारत का स्वदेशी टीका खरा उतरेगा।

 

भारत के पहले स्वदेश कोरोना टीका को वापसी को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं। लेकिन पिछले 8 महीने से टीके पर शोध में जुटे वैज्ञानिकों का कुछ और ही कहना है। सोमवार को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के संक्रामक रोग विभाग प्रमुख समीरन पांडा ने अमर उजाला से बातचीत की तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कोरोना के विषाणु पर नियंत्रण आसान नहीं था।

वैज्ञानिक प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही मिली मंजूरी, पूरी तरह सुरक्षित 

रात-दिन की मेहनत के साथ तैयार हुए टीके भी की प्रभाविकता और सुरक्षा पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने काफी मुश्किलों में वायरस को आइसोलेट किया था जिसके कारण आज हमारे पास कोरोना का अपना स्वदेशी टीका है।

वैज्ञानिक प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही कोवाक्सिन को लांच किया गया है। कम समय के बाद भी हम इसकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं कर सकते। इससे किसी की जान को खतरा नहीं है।

लोग बुद्धिमानी दिखाएं और कोराना टीका लगवाएं, वैज्ञानिकों ने पूरी जांच-परख के बाद ही बनाया है टीका

डॉक्टर पांडा ने कहा, उन्हें आज भी वह दिन याद है जब कोरोना वायरस को सबसे पहला आइसोलेट करने की कामयाबी वैज्ञानिक को मिली थी। उस वक्त हमारे हौसले सबसे बुलंद थे। लेकिन आज तरह-तरह की चर्चाओं को देख बुरा महसूस होता है अभी महामारी घट रही है।

लेकिन भारत एक विशाल देश है। कुछ राज्य ऐसे हैं जहां हम संक्रमण की दूसरी और तीसरी लहर देख रहे हैं। कुछ ऐसे राज्य हैं जहां कोरोना वायरस भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर है। इसके अलावा नए म्युटेंट वायरस भी अपनी उपस्थिति बना रहे हैं। उसकी पूरी जानकारी अभी तक विशेषज्ञों के पास नहीं है।

पहले नहीं बनी ऐसी वैक्सीन

कभी भी इतने कम समय में टीका नहीं बना है। 12 जनवरी 2020 को वैज्ञानिकों ने वायरस के जीनोमिक को रिकॉर्ड किया और इतने सारे टीके 10 महीने से कम समय में क्लीनिकल परीक्षण के चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार हो गए।

क्लीनिकल परीक्षा में पास होने पर दे सकते हैं मंजूरी

वर्ष 2019 में नई ड्रग और क्लीनिकल ट्रायल अनुमोदन प्रक्रिया में प्रावधान जोड़ा गया था। इसके तहत ऐसी स्थितियों में जब किसी बीमारी का हमारे पास बेहतर उपचार विकल्प नहीं होता है, तो पहले वह क्लीनिकल परीक्षण के परिणाम यदि उल्लेखनीय हों तो, तीसरे चरण के परीक्षण के टीके को त्वरित गति को मंजूरी देने में मदद कर सकता है।

नए म्यूटेशन के बाद भी कोवाक्सिन प्रभावी

कोरोना के विषाणु पर काम करते हुए कोवाक्सिन तैयार की गई है। परिणाम स्वरूप प्रतिरक्षा का एक बहुमुखी स्पेक्ट्रम प्राप्त होगा। डॉक्टर पांडा ने उम्मीद जताई है कि कोरोना वायरस के नए म्यूटेशन पर भी भारत का स्वदेशी टीका खरा उतरेगा।

 


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arvind007

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