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जिनके कारण देश को रिकॉर्ड समय में मिले कोरोना वैक्सीन, मिलिए उन शख्सियतों से

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हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक के प्रबंध निदेशक कृष्णा एला (51) किसान परिवार से हैं। मूल रूप से तमिलनाडु के थिरूथानी गांव के हैं। कृषि की पढ़ाई करने के बाद आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए बेयर कैमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स कंपनी के कृषि विभाग में काम करना शुरू किया। इसी बीच इन्हें स्कॉलरशिप मिली। मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में अमेरिका के हवाई विश्वविद्यालय से मास्टर्स की डिग्री ली। इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉनसिन-मेडिसिन से पीएचडी करने के बाद 1995 में भारत लौटे। 

1996 में शुरू की कंपनी 
मां के कहने पर पत्नी सुचित्रा के साथ भारत लौटे कृष्णा ने 12.5 करोड़ की लागत से हैदराबाद में 1996 में भारत बायोटेक की स्थापना की। तीन साल के भीतर इनकी कंपनी ने हेपेटाइटिस-बी का टीका तैयार किया जिसको तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने वर्ष 1996 में लॉन्च किया। 

देश को हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण अभियान के लिए दस रुपये प्रति डोज के हिसाब से टीका मुहैया कराया। उस समय अंतर्राष्ट्रीय बाजार में हेपेटाइटिस-बी के टीके की एक डोज 1400 रुपये की थी।  

दुनिया के 150 देशों को यूनिसेफ और गावी के तहत विभिन्न टीकों की 300 करोड़ डोज मुहैया करा रहे हैं। इनकी कंपनी के पास कुल 160 पेटेंट हैं और कंपनी के पास स्वयं के 16 तरह के टीके हैं।
 

बढ़ते कदम…
1996 में भारत बायोटेक की स्थापना।
1999 में हेपेटाइटिस-बी का टीका लॉन्च।
2002 में गेट्स फाउंडेशन की ओर से मदद।
2006- रेबीज का टीका लॉन्च किया।
2010- स्वाइनफ्लू का टीका लेकर आए।
2013- टायफॉयड का टीका पेश किया।
2014- जेई का स्वदेशी टीका देश को मिला।
2015- मेड इन इंडिया अभियान के तहत सबसे पहले रोटावायरस वैक्सीन तैयार की।
2020- कोरोना के टीके पर अध्ययन, 2021 में मिली मंजूरी

डॉ. सायरस पूनावाला पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के चेयरमैन हैं। यह देश की सबसे सर्वश्रेष्ठ बायोटेक कंपनी होने के साथ दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन उत्पादक कंपनी भी है। इनका ध्येय है ‘गुणवत्ता से समझौता नहीं, सभी स्वस्थ रहें इसलिए सस्ता टीका’। डॉ. सायरस ने पुणे के बृहन महाराष्ट्र कॉलेज ऑफ कॉमर्स से शिक्षा ली, पुणे विश्वविद्याल से ‘बेहतर तकनीक से विशेष एंटी-टॉक्सिनन्स निर्माण और समाज पर प्रभाव’ विषय से पीएचडी की।
 
घोड़ा पालन से आया विचार…
सायरस के पिता घोड़ा पालन का काम करते थे। 20 साल की उम्र में उन्हें आभास हुआ कि इस काम में उनका भविष्य नहीं है। सायरस ने सभी घोड़ों को सरकारी हॉफकिन इंस्टीट्यूट को बेच दिया, जो घोड़ों के सीरम से टीका तैयार करता था। यहीं से उन्हें सीरम निर्माण क्षेत्र में काम करने का विचार आया और पिता को रजामंद कर 166 में संस्थान की शुरुआत की।

टिटनस, डिप्थीरिया और सर्पदंश से बचाव का टीका
सीरम संस्थान हर साल 1500 करोड़ टीके का उत्पादन कर रहा है जो पूरे विश्व में काम आते हैं। यहां स्थापना के दो वर्ष बाद ही एंटी-टिटनस सीरम लॉन्च किया गया और अगले दो वर्ष में इसके टीके का उत्पादन शुरू कर दिया। डिप्थेरिया से बचाव का टीका 1974 में और सर्पदंश से बचाव का टीका 1981 में बनाया गया।
 
अदार पूनावाला, सीईओ, सीरम इंस्टीट्यूट: वेस्टमिंस्टर विश्वविद्यालय से पढ़ाई। 2001 से काम शुरू किया। उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाए। आज 35 देशों को सीरम संस्थान में बने चिकित्सा उत्पाद निर्यात हो रहे हैं। 2011 में कंपनी के सीईओ बने और 2012 में नीदरलैंड की सरकारी वैक्सीन उत्पादक कंपनी बिल्थोवन बायोलॉजिक्स का अधिग्रहण किया। 2014 में मुंह से दिया जाने वाला पोलियो का टीका लॉन्च किया।

सार

  • भारत बायोटेक- किसान के बेटे ने 12 करोड़ में शुरू की कंपनी। 
  • खेती करना चाहते थे लेकिन आज बना रहे हैं वैक्सीन।
  • 1966 में पुणे में स्थापित हुई सीरम इंस्टीट्यूट।
  •  1500 करोड़ टीके का उत्पादन हर साल, 1964 में डब्ल्यूएचओ ने भी लाइसेंस दिया।

विस्तार

हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक के प्रबंध निदेशक कृष्णा एला (51) किसान परिवार से हैं। मूल रूप से तमिलनाडु के थिरूथानी गांव के हैं। कृषि की पढ़ाई करने के बाद आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए बेयर कैमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स कंपनी के कृषि विभाग में काम करना शुरू किया। इसी बीच इन्हें स्कॉलरशिप मिली। मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में अमेरिका के हवाई विश्वविद्यालय से मास्टर्स की डिग्री ली। इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉनसिन-मेडिसिन से पीएचडी करने के बाद 1995 में भारत लौटे। 

1996 में शुरू की कंपनी 

मां के कहने पर पत्नी सुचित्रा के साथ भारत लौटे कृष्णा ने 12.5 करोड़ की लागत से हैदराबाद में 1996 में भारत बायोटेक की स्थापना की। तीन साल के भीतर इनकी कंपनी ने हेपेटाइटिस-बी का टीका तैयार किया जिसको तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने वर्ष 1996 में लॉन्च किया। 

देश को हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण अभियान के लिए दस रुपये प्रति डोज के हिसाब से टीका मुहैया कराया। उस समय अंतर्राष्ट्रीय बाजार में हेपेटाइटिस-बी के टीके की एक डोज 1400 रुपये की थी।  

दुनिया के 150 देशों को यूनिसेफ और गावी के तहत विभिन्न टीकों की 300 करोड़ डोज मुहैया करा रहे हैं। इनकी कंपनी के पास कुल 160 पेटेंट हैं और कंपनी के पास स्वयं के 16 तरह के टीके हैं।

 

बढ़ते कदम…

1996 में भारत बायोटेक की स्थापना।

1999 में हेपेटाइटिस-बी का टीका लॉन्च।

2002 में गेट्स फाउंडेशन की ओर से मदद।

2006- रेबीज का टीका लॉन्च किया।

2010- स्वाइनफ्लू का टीका लेकर आए।

2013- टायफॉयड का टीका पेश किया।

2014- जेई का स्वदेशी टीका देश को मिला।

2015- मेड इन इंडिया अभियान के तहत सबसे पहले रोटावायरस वैक्सीन तैयार की।

2020- कोरोना के टीके पर अध्ययन, 2021 में मिली मंजूरी


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सीरम का ध्येय: सब स्वस्थ रहें, इसलिए सस्ता टीका, पर गुणवत्ता से समझौता नहीं


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arvind007

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