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जामताड़ा के ठगों पर अमेरिकी रिसर्च एजेंसी करेगी शोध, साइबर क्राइम का गढ़ है ये झारखंड का जिला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 15 Jan 2021 11:31 AM IST

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झारखंड का जामताड़ा साइबर ठगी के लिए काफी ज्यादा जाना जाता है। इस पर एक बेहतरीन वेब सीरीज भी बनी है, जो ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी और उसे काफी पसंद किया गया था। जामताड़ा साइबर ठगों के लिए जाना जाता है, जिसमें स्कूली बच्चे अलग-अलग नंबर से फोन कर शहर के लोगों को ठगते थे।

जामताड़ा के इन शातिर ठगों पर अब अमेरिका के शोधकर्ताओं ने दिलचस्पी दिखाई है। जामताड़ा के ठगों पर अमेरिका रिसर्च करने वाला है। इन ठगों ने अपने स्टाइल के लिए दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थीं। जामताड़ा के ये ठग इतने पढ़े लिखे नहीं है लेकिन फिर भी इन्होंने लाखों पढ़े-लिखे और अमीर लोगों को ठगा है। 

अब इन ठगों पर अमेरिका की एक एजेंसी रिसर्च करेगी। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका की यह रिसर्च एजेंसी इस बात पर शोध करेगी कि जामताड़ा जैसे शहर और यहां रहने वाले, बिना पढ़े लिखे इन ठगों ने इतनी संख्या में लोगों को अपना शिकार कैसे बनाया। एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि इन ठगों को तकनीकी की इतनी जानकारी कैसे और कहां से मिली।

अमेरिकी एजेंसी इस बात पर जोर डालना चाहती है कि कैसे इन ठगों ने तकनीकी का इस्तेमाल कर लोगों को बेवकूफ बनाया और लोगों को अकाउंट हैक कर लाखों रुपयों पर अपना हाथ साफ किया। बता दें कि जामताड़ा में साइबर अपराधों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही हैै। किसी ना किसी राज्य की पुलिस यहां जांच करने के लिए आती है। बता दें कि जामताड़ा में साक्षरता दर काफी कम है।

अमेरिकी एजेंसी इन ठगों की ब्रेन मैपिंग कर यह पता लगाएगी कि इतना कम पढ़ा-लिखा होने के बावजूद भी यहां के साइबर ठगों को आईटी की बारिकियां कैसे मालूम हैं। यहां के ठग किस तकनीकी के आधार पर लोगों का अकाउंट हैक कर लेते हैं। इन सभी बिंदुओं को लेकर दिल्ली में डीजीपी स्तर के अधिकारियों ने बैठक की है।

झारखंड का जामताड़ा साइबर ठगी के लिए काफी ज्यादा जाना जाता है। इस पर एक बेहतरीन वेब सीरीज भी बनी है, जो ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी और उसे काफी पसंद किया गया था। जामताड़ा साइबर ठगों के लिए जाना जाता है, जिसमें स्कूली बच्चे अलग-अलग नंबर से फोन कर शहर के लोगों को ठगते थे।

जामताड़ा के इन शातिर ठगों पर अब अमेरिका के शोधकर्ताओं ने दिलचस्पी दिखाई है। जामताड़ा के ठगों पर अमेरिका रिसर्च करने वाला है। इन ठगों ने अपने स्टाइल के लिए दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थीं। जामताड़ा के ये ठग इतने पढ़े लिखे नहीं है लेकिन फिर भी इन्होंने लाखों पढ़े-लिखे और अमीर लोगों को ठगा है। 

अब इन ठगों पर अमेरिका की एक एजेंसी रिसर्च करेगी। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका की यह रिसर्च एजेंसी इस बात पर शोध करेगी कि जामताड़ा जैसे शहर और यहां रहने वाले, बिना पढ़े लिखे इन ठगों ने इतनी संख्या में लोगों को अपना शिकार कैसे बनाया। एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि इन ठगों को तकनीकी की इतनी जानकारी कैसे और कहां से मिली।

अमेरिकी एजेंसी इस बात पर जोर डालना चाहती है कि कैसे इन ठगों ने तकनीकी का इस्तेमाल कर लोगों को बेवकूफ बनाया और लोगों को अकाउंट हैक कर लाखों रुपयों पर अपना हाथ साफ किया। बता दें कि जामताड़ा में साइबर अपराधों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही हैै। किसी ना किसी राज्य की पुलिस यहां जांच करने के लिए आती है। बता दें कि जामताड़ा में साक्षरता दर काफी कम है।

अमेरिकी एजेंसी इन ठगों की ब्रेन मैपिंग कर यह पता लगाएगी कि इतना कम पढ़ा-लिखा होने के बावजूद भी यहां के साइबर ठगों को आईटी की बारिकियां कैसे मालूम हैं। यहां के ठग किस तकनीकी के आधार पर लोगों का अकाउंट हैक कर लेते हैं। इन सभी बिंदुओं को लेकर दिल्ली में डीजीपी स्तर के अधिकारियों ने बैठक की है।


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