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जल्द खत्म हो सकता है खाड़ी संकट! जीसीसी देशों की अहम बैठक मंगलवार को

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साढ़े तीन साल पहले शुरू हुआ खाड़ी संकट अब अपने हल के करीब पहुंच गया है। मंगलवार को इस बारे में खास एलान हो सकता है। इस विवाद से जुड़े सभी प्रमुख पक्षों की बैठक मंगलवार को सऊदी अरब में होगी। 2017 में सऊदी अरब के नेतृत्व में ही कई खाड़ी देशों ने कतर से अपने रिश्ते तोड़ लिए थे और उसकी घेराबंदी करने का एलान कर दिया था। इन देशों का आरोप था कि कतर ने ईरान से करीबी रिश्ते बना लिए हैं और वह कट्टरपंथी इस्लामी गुटों को बढ़ावा दे रहा है।

तब माना गया था कि कतर की ये घेराबंदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इशारे पर की गई है। ट्रंप उस समय ईरान को अलग-थलग करने में जुटे हुए थे। जानकारों का कहना है कि अब ट्रंप का दौर खत्म हो रहा है, तो खाड़ी देशों के रुख में भी बदलाव देखा गया है।

मंगलवार को खाड़ी देशों के संगठन खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की बैठक सऊदी अरब के शहर अल-उला में होगी। पश्चिम एशिया के अखबारों में छपी खबरों के मुताबिक खाड़ी देशों और कतर के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने और आपसी भरोसे का माहौल बनाने के लिए एक समझौते का प्रारूप तैयार किया गया है। लेकिन कुछ सूत्रों ने स्थानीय मीडिया से कहा है कि कतर का बायकॉट कर रहे सभी खाड़ी देशों ने अभी इस प्रारूप पर दस्तखत नहीं किए हैं।

जो देश कतर के बहिष्कार में शामिल हुए थे, उनमें सऊदी अरब (यूएई), संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन शामिल थे। खाड़ी सहयोग परिषद में इन देशों के अलावा कुवैत, ओमान और कतर भी शामिल हैं। कुवैत और ओमान ने इस विवाद में तटस्थ रुख अपनाया था। सऊदी अरब, यूएई और बहरीन ने कतर की घेराबंदी के सिलसिले में अपने यहां रहने वाले कतर के लोगों को निकाल दिया था, कतर एयरलाइन के विमानों की अपने यहां आवाजाही रोक दी थी, अपने हवाई क्षेत्र से कतर के विमानों के उड़ने पर रोक लगा दी थी, और अपने बंदरगाहों और सीमाओं को सील कर दिया था।

बाद में इन देशों ने कतर के सामने अपनी 13 मांगें रखी थीं। उनमें कतर से चलने वाले टीवी चैनल अल-जजीरा को बंद करने की मांग भी शामिल थी। साथ ही कतर से कहा गया था कि वह अपने यहां टर्की के सैनिक अड्डे को बंद कर दे और आतंकवादियों को धन देना बंद करे। कतर ने आतंकवादियों को धन देने के आरोप का खंडन किया था। उसने बाकी मांगें मानने से भी इनकार कर दिया था।

ऐसी खबर है कि मंगलवार की बैठक के बाद समझौते का एलान होगा। मुमकिन है कि इस मौके पर कतर के अमीर भी मौजूद रहें। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि वे बैठक में जाएंगे। कुछ खबरों में बताया गया है कि कतर यह मांग मान सकता है कि उसके मीडिया संस्थान सऊदी अरब के बारे में अपनी रिपोर्टिंग के तेवर को मद्धम रखें। इनमें अल-जजीरा को शामिल करने पर वह राजी हो सकता है। खबरों के मुताबिक बहरीन ने अभी तक इस समझौते पर अपनी सहमति नहीं दी है। बाकी देश इस पर राजी हो गए हैं।

पिछले 22 दिसंबर को यूएई विदेश मंत्री अनवर गार्गैश ने एक ट्विट में कहा था कि खाड़ी का राजनीतिक और सामाजिक माहौल कतर संकट के खत्म करने के इंतजार में है। लेकिन उन्होंने कहा था कि कतर के मीडिया को लेकर अपनी शिकायत फिर जताई थी। सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने भी कुछ रोज पहले कहा था कि खाड़ी संकट का अंत निकट है। कुवैत काफी समय से संकट खत्म कराने के लिए मध्यस्थता करता रहा है। कुवैत के विदेश मंत्री शेख अहमद नासीर अल-मोहम्मद अल-सबाह ने एक ताजा बयान में कहा है कि सभी पक्ष अंतिम समझौते पर राजी हो गए हैं। इस बयान से संकट खत्म होने की उम्मीद बढ़ गई है।

सार

जीसीसी देशों ने कतर के सामने अपनी 13 मांगें रखी थीं। उनमें कतर से चलने वाले टीवी चैनल अल-जजीरा को बंद करने की मांग भी शामिल थी। साथ ही कतर से कहा गया था कि वह अपने यहां टर्की के सैनिक अड्डे को बंद कर दे और आतंकवादियों को धन देना बंद करे…

विस्तार

साढ़े तीन साल पहले शुरू हुआ खाड़ी संकट अब अपने हल के करीब पहुंच गया है। मंगलवार को इस बारे में खास एलान हो सकता है। इस विवाद से जुड़े सभी प्रमुख पक्षों की बैठक मंगलवार को सऊदी अरब में होगी। 2017 में सऊदी अरब के नेतृत्व में ही कई खाड़ी देशों ने कतर से अपने रिश्ते तोड़ लिए थे और उसकी घेराबंदी करने का एलान कर दिया था। इन देशों का आरोप था कि कतर ने ईरान से करीबी रिश्ते बना लिए हैं और वह कट्टरपंथी इस्लामी गुटों को बढ़ावा दे रहा है।

तब माना गया था कि कतर की ये घेराबंदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इशारे पर की गई है। ट्रंप उस समय ईरान को अलग-थलग करने में जुटे हुए थे। जानकारों का कहना है कि अब ट्रंप का दौर खत्म हो रहा है, तो खाड़ी देशों के रुख में भी बदलाव देखा गया है।

मंगलवार को खाड़ी देशों के संगठन खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की बैठक सऊदी अरब के शहर अल-उला में होगी। पश्चिम एशिया के अखबारों में छपी खबरों के मुताबिक खाड़ी देशों और कतर के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने और आपसी भरोसे का माहौल बनाने के लिए एक समझौते का प्रारूप तैयार किया गया है। लेकिन कुछ सूत्रों ने स्थानीय मीडिया से कहा है कि कतर का बायकॉट कर रहे सभी खाड़ी देशों ने अभी इस प्रारूप पर दस्तखत नहीं किए हैं।

जो देश कतर के बहिष्कार में शामिल हुए थे, उनमें सऊदी अरब (यूएई), संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन शामिल थे। खाड़ी सहयोग परिषद में इन देशों के अलावा कुवैत, ओमान और कतर भी शामिल हैं। कुवैत और ओमान ने इस विवाद में तटस्थ रुख अपनाया था। सऊदी अरब, यूएई और बहरीन ने कतर की घेराबंदी के सिलसिले में अपने यहां रहने वाले कतर के लोगों को निकाल दिया था, कतर एयरलाइन के विमानों की अपने यहां आवाजाही रोक दी थी, अपने हवाई क्षेत्र से कतर के विमानों के उड़ने पर रोक लगा दी थी, और अपने बंदरगाहों और सीमाओं को सील कर दिया था।

बाद में इन देशों ने कतर के सामने अपनी 13 मांगें रखी थीं। उनमें कतर से चलने वाले टीवी चैनल अल-जजीरा को बंद करने की मांग भी शामिल थी। साथ ही कतर से कहा गया था कि वह अपने यहां टर्की के सैनिक अड्डे को बंद कर दे और आतंकवादियों को धन देना बंद करे। कतर ने आतंकवादियों को धन देने के आरोप का खंडन किया था। उसने बाकी मांगें मानने से भी इनकार कर दिया था।

ऐसी खबर है कि मंगलवार की बैठक के बाद समझौते का एलान होगा। मुमकिन है कि इस मौके पर कतर के अमीर भी मौजूद रहें। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि वे बैठक में जाएंगे। कुछ खबरों में बताया गया है कि कतर यह मांग मान सकता है कि उसके मीडिया संस्थान सऊदी अरब के बारे में अपनी रिपोर्टिंग के तेवर को मद्धम रखें। इनमें अल-जजीरा को शामिल करने पर वह राजी हो सकता है। खबरों के मुताबिक बहरीन ने अभी तक इस समझौते पर अपनी सहमति नहीं दी है। बाकी देश इस पर राजी हो गए हैं।

पिछले 22 दिसंबर को यूएई विदेश मंत्री अनवर गार्गैश ने एक ट्विट में कहा था कि खाड़ी का राजनीतिक और सामाजिक माहौल कतर संकट के खत्म करने के इंतजार में है। लेकिन उन्होंने कहा था कि कतर के मीडिया को लेकर अपनी शिकायत फिर जताई थी। सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने भी कुछ रोज पहले कहा था कि खाड़ी संकट का अंत निकट है। कुवैत काफी समय से संकट खत्म कराने के लिए मध्यस्थता करता रहा है। कुवैत के विदेश मंत्री शेख अहमद नासीर अल-मोहम्मद अल-सबाह ने एक ताजा बयान में कहा है कि सभी पक्ष अंतिम समझौते पर राजी हो गए हैं। इस बयान से संकट खत्म होने की उम्मीद बढ़ गई है।


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