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जर्मनी के अगले चांसलर पर टिकी हैं दुनिया की निगाहें, यूरोपियन यूनियन की है सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

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जर्मनी में सत्ताधारी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) पार्टी शनिवार को अपने नेता का चुनाव करेगी। मुमकिन है कि कल जो चुना जाएगा, वही जर्मनी का अगला चांसलर बने। चांसलर पद पर एंजेला मर्केल 2005 से मौजूद हैं। एक पूरी पीढ़ी ने इस पद पर उनके अलावा किसी और चेहरे को नहीं देखा है। इसलिए उनके उत्तराधिकारी के बारे में जानने में दुनिया भर के लोगों में गहरी दिलचस्पी है। इसके अलावा यूरोपियन यूनियन में जर्मनी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इस नाते भी जर्मनी में नेतृत्व किसके हाथ में रहता है, इसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

जर्मनी में कोरोना वायरस महामारी से जिस तरह मर्केल ने निपटा, उससे उनकी लोकप्रियता फिर से बढ़ी है। इस वक्त देश में उनकी अप्रूवल रेटिंग 70 फीसदी है। 2018 में उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई थी। तब उन्होंने पार्टी का नेतृत्व छोड़ दिया था। उसके बाद हुए चुनाव में उनकी अनुयायी अनेग्रेट क्रैम्प-करेनबाउर इस पद पर चुनी गई गई थीं। लेकिन बाद सियासी विवाद के कारण क्रैम्प करेनबाउर को ये पद छोड़ना पड़ा। इसलिए अब पार्टी के नए नेता का चुनाव कराया जा रहा है। 66 वर्षीय एंजेला मर्केल कह चुकी हैं कि इस साल सितंबर में होने वाले चुनाव के बाद वे चांसलर पद छोड़ देंगी। ऐसे में अगर सीडीयू फिर से चुनाव जीतती है, तो संभव है कि शनिवार को पार्टी प्रमुख निर्वाचित होने वाला नेता ही अगला चांसलर बने।

ऐसा पहली बार हो रहा है, जब सीडीयू के नेता का चुनाव पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया से हो रहा है। एक खास बात यह भी है कि नेता पद के लिए जो तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, वे सभी उत्तरी राइन-वेस्टफालिया राज्य से आते हैं। इनमें आर्मिन लैशेट को उदारवादी नजरिए वाला मना जाता है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर वे जीते, तो अधिक संभावना यही है कि वे देश को एंजेला मर्केल के रास्ते पर रखेंगे। लैशेट सामाजिक मामलों में उदार नजरिया रखते हैं, लेकिन वित्तीय मामलों में सख्त अनुशासन के समर्थक हैं। 2017 से 59 वर्षीय लैशेट राइन-वेस्टफालिया राज्य के प्रधानमंत्री हैं। यह देश का सबसे बड़ा राज्य है। इस पद पर काम करने के अनुभव को उन्होंने पार्टी नेता पद की होड़ में अपना मुख्य बिंदु बनाया है।

अगले उम्मीदवार नॉर्बर्ट रॉटजेन हैं, जो देश के पर्यावरण मंत्री रह चुके हैं। फिलहाल वे जर्मन संसद बुंडेस्टैग की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं। उन्हें सीडीयू में एक आउटसाइडर समझा जाता है, लेकिन हाल के हफ्तों में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। 55 वर्षीय रॉटजेन को कानून का जानकार और विदेश नीति संबंधी मसलों का विशेषज्ञ समझा जाता है। इस चुनाव में उन्हें उदारवादी लैशेट और कंजरवेटिव फ्रेडरिक मेर्ज के बीच मध्यमार्गी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

पेशे से वकील मेर्ज ने लंबे समय तक सीन से गायब रहने के बाद 2018 में पार्टी में वापसी की, जब उन्होंने पार्टी के नेता पद का चुनाव लड़ा। लेकिन तब 65 वर्षीय मेर्ज एंजेला मर्केल समर्थित उम्मीदवार क्रैम्प-केरेनबाउर से हार गए। मेर्ज पार्टी के कंजरवेटिव खेमे में लोकप्रिय हैं। उन्होंने खुला एलान किया है कि अगर वे जीते मैर्केल की सामाजिक उदार नीतियों से हटाकर पार्टी को कंजरवेटिव रास्ते पर ले जाएंगे। कंजरवेटिव विचारों के कारण पिछले साल वे विवाद में आए थे, जब उन्होंने समलैंगिकता की तुलना बाल यौन शोषण से कर दी थी।

विश्लेषकों का कहना है कि यह जरूरी नहीं है कि शनिवार को विजेता हुआ नेता ही जर्मनी का अगला चांसलर बने। संभावना यह है कि जर्मनी में अगली सरकार भी सीडीयू और क्रिश्चियन सोशल यूनियन (सीएसयू) पार्टियों की गठबंधन सरकार हो। ऐसे में नेता का चुनाव अगले आम चुनाव के बाद ही होगा। मुमकिन है कि चांसलर पद के लिए मार्च के प्रांतीय चुनावों के बाद सीएसयू किसी दूसरे नाम का प्रस्ताव करे। बावरिया राज्य के प्रधानमंत्री और सीएसयू नेता मार्कस सोडर इस समय लोकप्रियता के चार्ट में ऊपर हैं। वे भी चांसलर पद पर अपना दावा जता सकते हैं।

सार

जर्मनी में कोरोना वायरस महामारी से जिस तरह मर्केल ने निपटा, उससे उनकी लोकप्रियता फिर से बढ़ी है। इस वक्त देश में उनकी अप्रूवल रेटिंग 70 फीसदी है। 2018 में उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई थी। तब उन्होंने पार्टी का नेतृत्व छोड़ दिया था…

विस्तार

जर्मनी में सत्ताधारी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) पार्टी शनिवार को अपने नेता का चुनाव करेगी। मुमकिन है कि कल जो चुना जाएगा, वही जर्मनी का अगला चांसलर बने। चांसलर पद पर एंजेला मर्केल 2005 से मौजूद हैं। एक पूरी पीढ़ी ने इस पद पर उनके अलावा किसी और चेहरे को नहीं देखा है। इसलिए उनके उत्तराधिकारी के बारे में जानने में दुनिया भर के लोगों में गहरी दिलचस्पी है। इसके अलावा यूरोपियन यूनियन में जर्मनी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इस नाते भी जर्मनी में नेतृत्व किसके हाथ में रहता है, इसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

जर्मनी में कोरोना वायरस महामारी से जिस तरह मर्केल ने निपटा, उससे उनकी लोकप्रियता फिर से बढ़ी है। इस वक्त देश में उनकी अप्रूवल रेटिंग 70 फीसदी है। 2018 में उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई थी। तब उन्होंने पार्टी का नेतृत्व छोड़ दिया था। उसके बाद हुए चुनाव में उनकी अनुयायी अनेग्रेट क्रैम्प-करेनबाउर इस पद पर चुनी गई गई थीं। लेकिन बाद सियासी विवाद के कारण क्रैम्प करेनबाउर को ये पद छोड़ना पड़ा। इसलिए अब पार्टी के नए नेता का चुनाव कराया जा रहा है। 66 वर्षीय एंजेला मर्केल कह चुकी हैं कि इस साल सितंबर में होने वाले चुनाव के बाद वे चांसलर पद छोड़ देंगी। ऐसे में अगर सीडीयू फिर से चुनाव जीतती है, तो संभव है कि शनिवार को पार्टी प्रमुख निर्वाचित होने वाला नेता ही अगला चांसलर बने।

ऐसा पहली बार हो रहा है, जब सीडीयू के नेता का चुनाव पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया से हो रहा है। एक खास बात यह भी है कि नेता पद के लिए जो तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, वे सभी उत्तरी राइन-वेस्टफालिया राज्य से आते हैं। इनमें आर्मिन लैशेट को उदारवादी नजरिए वाला मना जाता है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर वे जीते, तो अधिक संभावना यही है कि वे देश को एंजेला मर्केल के रास्ते पर रखेंगे। लैशेट सामाजिक मामलों में उदार नजरिया रखते हैं, लेकिन वित्तीय मामलों में सख्त अनुशासन के समर्थक हैं। 2017 से 59 वर्षीय लैशेट राइन-वेस्टफालिया राज्य के प्रधानमंत्री हैं। यह देश का सबसे बड़ा राज्य है। इस पद पर काम करने के अनुभव को उन्होंने पार्टी नेता पद की होड़ में अपना मुख्य बिंदु बनाया है।

अगले उम्मीदवार नॉर्बर्ट रॉटजेन हैं, जो देश के पर्यावरण मंत्री रह चुके हैं। फिलहाल वे जर्मन संसद बुंडेस्टैग की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं। उन्हें सीडीयू में एक आउटसाइडर समझा जाता है, लेकिन हाल के हफ्तों में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। 55 वर्षीय रॉटजेन को कानून का जानकार और विदेश नीति संबंधी मसलों का विशेषज्ञ समझा जाता है। इस चुनाव में उन्हें उदारवादी लैशेट और कंजरवेटिव फ्रेडरिक मेर्ज के बीच मध्यमार्गी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

पेशे से वकील मेर्ज ने लंबे समय तक सीन से गायब रहने के बाद 2018 में पार्टी में वापसी की, जब उन्होंने पार्टी के नेता पद का चुनाव लड़ा। लेकिन तब 65 वर्षीय मेर्ज एंजेला मर्केल समर्थित उम्मीदवार क्रैम्प-केरेनबाउर से हार गए। मेर्ज पार्टी के कंजरवेटिव खेमे में लोकप्रिय हैं। उन्होंने खुला एलान किया है कि अगर वे जीते मैर्केल की सामाजिक उदार नीतियों से हटाकर पार्टी को कंजरवेटिव रास्ते पर ले जाएंगे। कंजरवेटिव विचारों के कारण पिछले साल वे विवाद में आए थे, जब उन्होंने समलैंगिकता की तुलना बाल यौन शोषण से कर दी थी।

विश्लेषकों का कहना है कि यह जरूरी नहीं है कि शनिवार को विजेता हुआ नेता ही जर्मनी का अगला चांसलर बने। संभावना यह है कि जर्मनी में अगली सरकार भी सीडीयू और क्रिश्चियन सोशल यूनियन (सीएसयू) पार्टियों की गठबंधन सरकार हो। ऐसे में नेता का चुनाव अगले आम चुनाव के बाद ही होगा। मुमकिन है कि चांसलर पद के लिए मार्च के प्रांतीय चुनावों के बाद सीएसयू किसी दूसरे नाम का प्रस्ताव करे। बावरिया राज्य के प्रधानमंत्री और सीएसयू नेता मार्कस सोडर इस समय लोकप्रियता के चार्ट में ऊपर हैं। वे भी चांसलर पद पर अपना दावा जता सकते हैं।


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