Haryana

ग्राउंड रिपोर्ट : सात फेरों पर भी भारी पड़ रही सूखी जमीन, एक फसल के बाद दूसरी की गारंटी नहीं, लड़के बैठे हैं कुंवारे  

सूखी जमीन के कारण युवकों की शादी होने में दिक्कत आ रही है।
– फोटो : अमर उजाला

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हरियाणा में सैकड़ों किल्ले जमीन पर सूखी, एक फसल के बाद लगातार दूसरी की गारंटी नहीं। बिन पानी यहां सब सूना-सूना है। ये सूनापन शादी के लायक युवाओं की जिंदगी भी बेरंग कर रहा है। राजस्थान सीमा से सटे हरियाणा के भिवानी जिले के गांवों के कई लड़कों के सिर सेहरा नहीं बंध रहा, क्योंकि न तो जमीन से अच्छी पैदावार हो रही न कोई रोजगार है।

गांवों में युवाओं के नाम कई किल्ले जमीन तो है, लेकिन उसका कोई लाभ नहीं। सूखी जमीन सात फेरों पर भारी पड़ रही है। कुछ गांवों में यह दिक्कत इतनी गहराती जा रही है कि दूसरे जिलों, यहां तक कि भिवानी जिले के सुविधा संपन्न गांवों के लोग भी अपनी लड़कियों की शादी करने के लिए तैयार नहीं।

सिवानी सिंचाई उपमंडल और लोहारु विधानसभा क्षेत्र में ऐसे कई गांव हैं, जहां के परिवारों के पास आमदनी के साधन नहीं। लड़की वाले जब रिश्ते की बात करने आते हैं तो सबसे पहले यही पूछते हैं कि लड़का करता क्या है, जमीन कितनी है, पानी लगता है या नहीं। लड़के का कोई कारोबार है क्या। लड़के वाले कई किल्ले जमीन की बात तो कहते हैं, लेकिन भूमि असिंचित होने के कारण लड़की वालों का जवाब न में होता है। 

राजस्थान सीमा से लगते हरियाणा के गांवों में सामाजिक तानाबाना बिगड़ने का यह भी बड़ा कारण है। अब इस क्षेत्र में नई नहरें बनने लगी हैं, जिससे हालात बदलने की उम्मीद है। राम सिंह व बलवंत उम्मीद तो करते हैं कि नहरों में पानी आएगा, लेकिन कब और कितना, इसे लेकर इंतजार करने के अलावा उनके पास कुछ नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार नई माइनर पर पैसा तो खूब खर्च कर रही है, लेकिन पानी भी उतना ही आए तो बात बनेगी। 

अविवाहित मयंक ने बताया कि नहरी पानी न मिलने से कुछ गांवों में फसल नहीं होती, बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है। जमीन सूखी पड़ी है। उनके गांव झुंपा कलां में छह महीने से हालात बेहतर हुए हैं। सर्दियों में पानी की दिक्कत नहीं हुई। गर्मियों में भी ऐसा ही रहा तो अच्छी फसल होगी। उनकी सरकार से यही विनती है कि बॉर्डर के सभी गांवों में नई माइनर बनाकर अंतिम टेल तक पानी पहुंचाएं ताकि बेरोजगार युवा खेती कर आर्थिक तौर पर संपन्न हो सकें और उनकी शादी हो सके। 

कई परिवारों में पूर्वोत्तर से आई बहुएं
भिवानी जिले में सामाजिक तानाबाना काफी पहले से बिगड़ा हुआ है। यहां के कई परिवारों ने अपने बेटों की शादी पूर्वोत्तर के राज्यों में करनी पड़ी है। यह भी इतना आसान नहीं। पूर्वोत्तर की लड़कियां भी यहां ब्याह तभी करने को राजी होती हैं, जब पहले से यहां रची-बसी पूर्वोत्तर की कोई विवाहिता उनकी जान पहचान या आस पड़ोस की होती है। अनजान व्यक्ति के साथ शादी करने को कोई लड़की तैयार नहीं।

प्याज का व्यापार खूब आ रहा रास
सीमांत गांवों के युवा व अधेड़ भिवानी व आसपास के जिलों में प्याज का खूब व्यापार करते हैं। वे सस्ते में राजस्थान से प्याज लाकर यहां बेच रहे। सस्ता प्याज लाकर वे कुछ दिन रखते हैं और उसके बाद फेरी लगाकर अच्छे दाम पर बेच देते हैं, जिससे उनका गुजारा चल जाता है।

हरियाणा में सैकड़ों किल्ले जमीन पर सूखी, एक फसल के बाद लगातार दूसरी की गारंटी नहीं। बिन पानी यहां सब सूना-सूना है। ये सूनापन शादी के लायक युवाओं की जिंदगी भी बेरंग कर रहा है। राजस्थान सीमा से सटे हरियाणा के भिवानी जिले के गांवों के कई लड़कों के सिर सेहरा नहीं बंध रहा, क्योंकि न तो जमीन से अच्छी पैदावार हो रही न कोई रोजगार है।

गांवों में युवाओं के नाम कई किल्ले जमीन तो है, लेकिन उसका कोई लाभ नहीं। सूखी जमीन सात फेरों पर भारी पड़ रही है। कुछ गांवों में यह दिक्कत इतनी गहराती जा रही है कि दूसरे जिलों, यहां तक कि भिवानी जिले के सुविधा संपन्न गांवों के लोग भी अपनी लड़कियों की शादी करने के लिए तैयार नहीं।

सिवानी सिंचाई उपमंडल और लोहारु विधानसभा क्षेत्र में ऐसे कई गांव हैं, जहां के परिवारों के पास आमदनी के साधन नहीं। लड़की वाले जब रिश्ते की बात करने आते हैं तो सबसे पहले यही पूछते हैं कि लड़का करता क्या है, जमीन कितनी है, पानी लगता है या नहीं। लड़के का कोई कारोबार है क्या। लड़के वाले कई किल्ले जमीन की बात तो कहते हैं, लेकिन भूमि असिंचित होने के कारण लड़की वालों का जवाब न में होता है। 

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arvind007

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